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Fatehpur News: भैया दूज पर दोपहर 12 बजे तक शुभ मुहूर्त
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फतेहपुर। भैया दूज बुधवार को मनाया जाएगा। भैया दूज का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर 12 बजे तक रहेगा। इस तिथि को बहन के घर भोजन करने का बड़ा महत्व माना जाता है।
दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहने भाई का तिलक कर लंबी उम्र की कामना करेंगी। मान्यता है कि भाई इस दिन बहन से तिलक कराने वाले भाई की अकाल मृत्यु नहीं होती है। आचार्य दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि भैया दूज का शुभ मुहूर्त बुधवार को सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे तक है। हालांकि पूरा दिन भाई बहन से तिलक करा सकते हैं। वहीं, भगवान चित्रगुप्त की जयंती भी जगह-जगह मनाई जाएगी।
आचार्य ने बताया कि भैया दूज दिन भाई भोर में चंद्रमा के दर्शन करें और शुद्ध जल से स्नान करें। बहने, भाई को तिलक और आरती के लिए थाल सजाकर उसमें कुमकुम, सिंदूर, चंदन, फल, फूल, मिठाई और सुपारी रखें। तिलक करने से पहले चावल के मिश्रण से एक चौक बनाएं। चावल के इस चौक पर भाई को बिठाएं और शुभ मुहूर्त में बहनें उनका तिलक करें। तिलक करने के बाद फूल, पान, सुपारी, बताशे और काले चने भाई को दें और उनकी आरती उतारें। तिलक और आरती के बाद भाई अपनी बहनों को उपहार भेंट करें और सदैव उनकी रक्षा का वचन दें।
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दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहने भाई का तिलक कर लंबी उम्र की कामना करेंगी। मान्यता है कि भाई इस दिन बहन से तिलक कराने वाले भाई की अकाल मृत्यु नहीं होती है। आचार्य दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि भैया दूज का शुभ मुहूर्त बुधवार को सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे तक है। हालांकि पूरा दिन भाई बहन से तिलक करा सकते हैं। वहीं, भगवान चित्रगुप्त की जयंती भी जगह-जगह मनाई जाएगी।
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आचार्य ने बताया कि भैया दूज दिन भाई भोर में चंद्रमा के दर्शन करें और शुद्ध जल से स्नान करें। बहने, भाई को तिलक और आरती के लिए थाल सजाकर उसमें कुमकुम, सिंदूर, चंदन, फल, फूल, मिठाई और सुपारी रखें। तिलक करने से पहले चावल के मिश्रण से एक चौक बनाएं। चावल के इस चौक पर भाई को बिठाएं और शुभ मुहूर्त में बहनें उनका तिलक करें। तिलक करने के बाद फूल, पान, सुपारी, बताशे और काले चने भाई को दें और उनकी आरती उतारें। तिलक और आरती के बाद भाई अपनी बहनों को उपहार भेंट करें और सदैव उनकी रक्षा का वचन दें।
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