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Fatehpur News: कहीं सशर्त दी जा रही रही खाद तो कहीं लौट रहे खाली हाथ, हंगामा

Fri, 22 Nov 2024 12:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2024 12:57 AM IST
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At some places fertilizer is being given conditionally and at other places people are returning empty handed, uproar
फतेहपुर। किसानों को सशर्त डीएपी खाद लेने को मजबूर किया जा रहा है। नैनो डीएपी लेने पर दो बोरी खाद दी जा रही है, वरना एक बोरी पकड़ाकर चलता किया जा रहा है। इस पर मथुरापुर व पधारा गांव की समितियों में किसानों ने हंगामा किया। वहीं जनपद कई समितियां बंद होने से किसान मायूस लौटे।
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गुरुवार को बकेवर के मथुरापुर व पधारा की समितियों में सचिव ने अपने फरमान से किसानों को परेशान कर दिया। दोनों समितियों से 360-360 बोरी खाद बुधवार शाम पहुंची। गुरुवार को किसानों की भीड़ देखते हुए सचिव ने दो बोरी डीएपी के साथ एक बोरी नैनो अनिवार्य कर दी। किसान दो बोरी खाद का 2700 रुपये लेकर पहुंचे। उनके सामने नैनो के 600 रुपये की अनिवार्य खरीदी ने परेशानी पैदा कर दी। ऐसे में किसानों ने जमकर हंगामा काटा और सचिव से जमकर बहस हुई, लेकिन नैनो के साथ ही डीएपी किसानों को बांटी गई।
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मथुरापुर में सुबह से शाम तक 200 बोरी खाद ही बट पाई। वहीं पधारा में हंगामे के चलते दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक सिर्फ 150 बोरी ही खाद बट पाई। शुक्रवार सुबह से यहां खाद वितरण होगा। पधारा के सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि टीएसपी खाद का स्टॉक भी समिति में है। इस वजह से डीएपी खाद बांटने के लिए इंतजार किया गया। मथुरापुर के सचिव मुकेश कुमार ने बताया कि गुरुवार को 200 बोरी खाद का वितरण किया गया है, साथ में नैनो डीएपी लेने वाले को दो बोरी व न लेने वाले को एक बोरी डीएपी दी गई है।
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- बहुआ की सहकारी समिति में एक सप्ताह से अधिक समय से खाद नहीं आई है। समिति में करीब 300 बोरी टीएसपी(ट्रिपल सुपर फास्फेट) खाद सप्ताह भर पहले आई थी। किसानों ने इस खाद से दूरी बना रखी थी। मजबूरी में कुछ किसानों ने इस खाद का उपयोग किया, लेकिन अभी भी 50 बोरी टीएसपी खाद समिति में है। सचिव ज्ञान सिंह ने बताया कि खाद की रैक दो से तीन में आने की संभावना है।
- गाजीपुर समिति में डीएपी खाद न आने के कारण किसान मजबूरी में टीएसपी खाद लेने के लिए ही लाइन में लगे। किसानों ने बताया कि बुधवार को समिति में खाद के लिए आए थे। खाद नहीं मिली। गेहूं बुआई का समय भी निकला जा रहा है, इसलिए मजबूरी में टीएसपी खाद ही ले रहे हैं। सचिव मान सिंह ने बताया कि खाद की 360 बोरी का वितरण बुधवार को किया गया है। पहले दिन ही समिति से खाद खत्म हो गई इसलिए और खाद की मांग की गई है। किसानों को फिलहाल टीएसपी खाद दी जा रही है।
- हथगाम, मलवां, मेवली बुजुर्ग में समिति में खाद खत्म है। विजयीपुर में 10 दिनों से समिति बंद है। सचिव मान सिंह यादव ने बताया कि परिजन की तबीयत खराब होने के कारण प्रयागराज में हैं। समिति में खाद भी नहीं है। यहां किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है।

घोराहा निवासी चुन्नू बाजपेई ने बताया कि सुबह से मथुरापुर समिति के बाहर लाइन में लग गए। लेकिन समिति में नैनो डीएपी के साथ दो बोरी खाद लेने की अनिवार्यता से हैरान हैं। मजबूरी में नैनो डीएपी खाद ली है, क्योंकि गेहूं बुआई का समय निकला जा रहा है।

बरिगंवा निवासी ननकू दिवाकर ने बताया कि पता नहीं था कि मथुरापुर समिति में नैनो डीएपी भी लेना जरूरी है। घर से दो बोरी खाद के लिए 27 00 रुपये ही लेकर आए थे। नैनो की अनिवार्यता के चलते दूसरे से उधार लेकर खाद लिया।

बकेवर के आसपास के बहुत से किसानों को अभी तक डीएपी नहीं मिल पाई। जगदीशपुर गांव के सुजान सिंह यादव अपने छह बीघे खेत में सुपर, जैविक खाद और यूरिया बाजार से लेकर खेत की बुवाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि समिति में खाद न मिलने के कारण बाजार से तीनों चीजों को खरीद कर खेत में डाल रहे हैं।



विभागीय आंकड़ों के अनुसार आठ हजार मीट्रिक टन यानी करीब एक लाख 60 हजार बोरी खाद का वितरण हो चुका है। इसमें करीब 80 हजार किसान दो बोरी के हिसाब खाद पा चुके है। वहीं जिले में अकेले गेहूं की फसल बुआई करने वाले किसानों की संख्या दो लाख से अधिक है। इनमें 50 हजार किसान प्राइवेट से लेते हैं। बाकी किसान समितियों के भरोसे रहते हैं। आकड़ों के हिसाब से अभी 70 हजार किसानों को खाद नहीं मिल पाई है।
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