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जिले में ही जा रहा एचआईवी/एड्स का खतरा, जागरूकता सिफर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Tue, 10 Feb 2015 12:40 AM IST
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राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जानलेवा मर्ज के खिलाफ
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अभियान-दर-अभियान चल रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह सब कागजी साबित हो रहे
हैं। जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी का जागरूकता अभियान भी कागजी साबित हो रहा
है।
जिले में एचआईवी का ग्राफ सबसे ज्यादा दूसरे बड़े शहरों से कमा कर लौटने वाले लोगों में है। भिटौरा ब्लाक के एक गांव में पिछले एक दशक के दौरान 17 मौतें इस भयावहता का गवाह बन चुकी हैं।
इसके अलावा बहुआ ब्लाक के एक बड़े गांव समेत यमुना पट्टी से वास्ता रखने वाले कई गांवों मेें इस संक्रमण की घुसपैठ है।
इतना ही नहीं पिछले साल एक एचआईवी पीड़ित महिला ने तो दुधमुंहे बच्चे के साथ आत्महत्या तक कर ली थी।
सरकारी स्तर पर एचआईवी/एड्स की जांच के लिए सदर अस्पताल में खुले एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र के काउंसलर अतुल जायसवाल की मानें तो वर्ष 2013 में 4303 जांचे हुईं।
इनमें से 49 लोग एचआईवी पाजीटिव मिले। इसी प्रकार से वर्ष 2014 में 6006 जांचें की गईं। इस संख्या में 53 लोग इसकी चपेट में आए।
चालू वर्ष में अब तक हुईं 450 जांचों में फिलहाल एक एचआईवी पाजीटिव सामने आया है। जबकि एक तमाम लोग प्राइवेट स्तर पर जांचें कराते हैं।
कहने को तो इस खतरे के नियंत्रण के लिए बकायदा जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी है। इस सोसाइटी को एचआईवी/एड्स से आगाह करने के लिए जागरूकता अभियान समय समय पर चलाने होते हैं, लेकिन इसका वजूद केवल जागरूकता रैली तक सिमटा दिखाई दे रहा है।
क्या कहते हैं जवाबदेह
‘ सरकार से पर्याप्त बजट नहीं मिलने से अभियान को रवानी देने में दिक्कतें आ रही हैं। पिछले साल महज 10 हजार रुपया का बजट मिल पाया था। जिसमें जागरूकता रैली निकाल कर बचाव के लिए सचेत किया गया। इसके अलावा इस दिशा मेें जिलास्तर पर जनकल्याण महासमिति भी काम रही है’।
- पीएल दशारिया, सचिव, जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी
जिले में एचआईवी का ग्राफ सबसे ज्यादा दूसरे बड़े शहरों से कमा कर लौटने वाले लोगों में है। भिटौरा ब्लाक के एक गांव में पिछले एक दशक के दौरान 17 मौतें इस भयावहता का गवाह बन चुकी हैं।
इसके अलावा बहुआ ब्लाक के एक बड़े गांव समेत यमुना पट्टी से वास्ता रखने वाले कई गांवों मेें इस संक्रमण की घुसपैठ है।
इतना ही नहीं पिछले साल एक एचआईवी पीड़ित महिला ने तो दुधमुंहे बच्चे के साथ आत्महत्या तक कर ली थी।
सरकारी स्तर पर एचआईवी/एड्स की जांच के लिए सदर अस्पताल में खुले एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र के काउंसलर अतुल जायसवाल की मानें तो वर्ष 2013 में 4303 जांचे हुईं।
इनमें से 49 लोग एचआईवी पाजीटिव मिले। इसी प्रकार से वर्ष 2014 में 6006 जांचें की गईं। इस संख्या में 53 लोग इसकी चपेट में आए।
चालू वर्ष में अब तक हुईं 450 जांचों में फिलहाल एक एचआईवी पाजीटिव सामने आया है। जबकि एक तमाम लोग प्राइवेट स्तर पर जांचें कराते हैं।
कहने को तो इस खतरे के नियंत्रण के लिए बकायदा जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी है। इस सोसाइटी को एचआईवी/एड्स से आगाह करने के लिए जागरूकता अभियान समय समय पर चलाने होते हैं, लेकिन इसका वजूद केवल जागरूकता रैली तक सिमटा दिखाई दे रहा है।
क्या कहते हैं जवाबदेह
‘ सरकार से पर्याप्त बजट नहीं मिलने से अभियान को रवानी देने में दिक्कतें आ रही हैं। पिछले साल महज 10 हजार रुपया का बजट मिल पाया था। जिसमें जागरूकता रैली निकाल कर बचाव के लिए सचेत किया गया। इसके अलावा इस दिशा मेें जिलास्तर पर जनकल्याण महासमिति भी काम रही है’।
- पीएल दशारिया, सचिव, जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी