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Fatehpur News: गंगा-पांडु के बाद यमुना भी उफान पर, फसलें बर्बाद, सहमे ग्रामीण
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फोटो-33-सदनहा गांव मेें फूलों की खेती मेें भरा बाढ़ का पानी। संवाद
फतेहपुर(औंग)। मलवां ब्लॉक के कटरी क्षेत्र में गंगा और पांडु नदी ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कुछ दिन पहले ही बाढ़ का पानी उतरने से लोगों को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन शनिवार को जलस्तर में फिर वृद्धि होने से ग्रामीणों में दहशत है। किसानों की हजारों बीघे फसलें डूब गई हैं। अब घरों की ओर बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है।
पहले गंगा के बढ़ते जलस्तर से करीब 2000 बीघे खेतों की फसल बर्बाद हो गई थी। अब पांडु नदी में आई बाढ़ ने 200 बीघे फूलों की खेती को जलमग्न कर दिया।
खासकर नवरात्र के लिए तैयार की गई गेंदा, गुलाब, गुल्दौरी, रजनीगंधा जैसी मौसमी फूलों की फसल पूरी तरह तबाह हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार बाजार में फूलों की कीमतें जरूर बढ़ेंगी, लेकिन उनके खेत उजड़ जाने से वे इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे।
पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के चलते गंगा और पांडु नदियों का जलस्तर फिर बढ़ गया है। शुक्रवार को गंगा 100.87 मीटर पर थी, जो शनिवार को घटकर 100.85 मीटर हो गई, फिर भी यह खतरे के निशान (100.86 मीटर) के आसपास बनी हुई है। बिंदकी, सदनहा, जाड़े का पुरवा, मदारपुर सहित कई कटरी गांवों में बाढ़ का पानी अब भी भरा है।
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कटरी निवासी किसान मुंशीलाल ने बताया कि यदि नदियों का यही उफान जारी रहा तो फसलें ही नहीं, घरों में भी पानी घुस जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन पर राहत कार्य में लापरवाही का आरोप लगाया है। दिनेश, भोला, अजय, पंचम व बसंत राजाराम ने बताया कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस मदद नहीं मिल रही।
24 घंटे में डेढ़ मीटर बढ़ा यमुना का जलस्तर
गंगा और पांडु के साथ अब यमुना भी तेजी से खतरे की ओर बढ़ रही है। शुक्रवार को यमुना का जलस्तर 95.04 मीटर था, जो शनिवार को बढ़कर 96.89 मीटर पर पहुंच गया है। अभी यह खतरे के निशान 100 मीटर से लगभग तीन मीटर नीचे है, लेकिन तेजी से बढ़ते जलस्तर ने ललौली, जाफरगंज और अमौली क्षेत्र के ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया है।
शनिवार को करीब एक सेंटीमीटर पानी की कमी दर्ज की गई है। प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है। जो लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकलेंगे, उनके लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
अचलेश सिंह, तहसीलदार
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पहले गंगा के बढ़ते जलस्तर से करीब 2000 बीघे खेतों की फसल बर्बाद हो गई थी। अब पांडु नदी में आई बाढ़ ने 200 बीघे फूलों की खेती को जलमग्न कर दिया।
खासकर नवरात्र के लिए तैयार की गई गेंदा, गुलाब, गुल्दौरी, रजनीगंधा जैसी मौसमी फूलों की फसल पूरी तरह तबाह हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार बाजार में फूलों की कीमतें जरूर बढ़ेंगी, लेकिन उनके खेत उजड़ जाने से वे इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे।
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पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के चलते गंगा और पांडु नदियों का जलस्तर फिर बढ़ गया है। शुक्रवार को गंगा 100.87 मीटर पर थी, जो शनिवार को घटकर 100.85 मीटर हो गई, फिर भी यह खतरे के निशान (100.86 मीटर) के आसपास बनी हुई है। बिंदकी, सदनहा, जाड़े का पुरवा, मदारपुर सहित कई कटरी गांवों में बाढ़ का पानी अब भी भरा है।
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कटरी निवासी किसान मुंशीलाल ने बताया कि यदि नदियों का यही उफान जारी रहा तो फसलें ही नहीं, घरों में भी पानी घुस जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन पर राहत कार्य में लापरवाही का आरोप लगाया है। दिनेश, भोला, अजय, पंचम व बसंत राजाराम ने बताया कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस मदद नहीं मिल रही।
24 घंटे में डेढ़ मीटर बढ़ा यमुना का जलस्तर
गंगा और पांडु के साथ अब यमुना भी तेजी से खतरे की ओर बढ़ रही है। शुक्रवार को यमुना का जलस्तर 95.04 मीटर था, जो शनिवार को बढ़कर 96.89 मीटर पर पहुंच गया है। अभी यह खतरे के निशान 100 मीटर से लगभग तीन मीटर नीचे है, लेकिन तेजी से बढ़ते जलस्तर ने ललौली, जाफरगंज और अमौली क्षेत्र के ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया है।
शनिवार को करीब एक सेंटीमीटर पानी की कमी दर्ज की गई है। प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है। जो लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकलेंगे, उनके लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
अचलेश सिंह, तहसीलदार