एक लाख छब्बीस हजार क्विंटल गेहूं बाहर पड़ा

Fatehpur Updated Sun, 08 Jul 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। बारिश से पहले गोदामों में सुरक्षित पहुंचाने के प्रयासों के बावजूद अभी भी हजारों क्विंटल गेहूं अभी भी बाहर पड़ा है, जिसकी सुरक्षा को लेकर चुनौती खड़ी हो गई है। बारिश में भीगने या नमी लगने के बाद इस गेहूं को गोदाम में डंप कराने का जोखिम भारतीय खाद्य निगम नहीं उठा पा रहा है। ऐसे में बाहर पड़े गेहूं का सत्यापन कराया जा रहा है। मानक के मुताबिक पाया गया गेहूं गोदाम में भेजने के बजाए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सीधा उपभोक्ताओं को दे दिया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक अभी 1 लाख,26 हजार 535 क्विंटल गेहूं बाहर पड़ा हुआ है। इसमें 60 हजार क्विंटल गेहूं मार्केटिंग का और शेष आढ़तियों का है। ढुलाई की दिक्कतों के चलते भंडार गृह तक न पहुंचने पाने वाले इस खाद्यान को क्रय केन्द्रों में ही किसी तरह संभाल कर रखे जाने के प्रयास किए गए है। रखरखाव की समुचित व्यवस्था न होने की वजह से काफी मात्रा में गेहूं भीग गया है। ऐसे में कही गोदाम में रखने पर उक्त अनाज खराब न हो जाए इसे देखते हुए इसे गोदाम भेजने के बजाए इसे पीडीएस के अंतरगत वितरित कराने का निर्णय लिया गया है। जुलाई एवं अगस्त का खाद्यान उपभोक्ताओं को एक साथ वितरित किया जाएगा। इसके लिए एफसीआई ने दोनो माह रिलीजिंग आर्डर एक साथ जारी किया है। जिला प्रबंधक एफसीआई ने बताया कि बाहर पड़े खाद्यान को गोदाम में भेजने के बजाए पीडीएस के तहत वितरण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि दो माह का अनाज एक साथ रिलीज होने सीमित अनाज बचेगा, जिससे समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।
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आरएमओ ने देखे दस्तावेज
फतेहपुर। आरएमओ इलाहाबाद श्रीकृष्ण यादव ने एफसीआई के पक्का तालाब स्थित कार्यालय में गेहूं के भंडारण की व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्हाेंने लेजर आदि का मिलान विभिन्न एजेंसियों के बकाया एवं अदायगी की स्थिति तथा बिलों के बारे में जानकारी प्राप्त की। अभी भी अनाज से लदी तमाम गाडि़यां बाहर खड़ी हैं, जिनकी अनलोडिंग नहीं हो पा रही है। आरएमओ ने खाली हो रहे गोदाम में उक्त अनाज के भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
किसानों के गेहूं का छह करोड़ बकाया
फतेहपुर। गेहूं खरीद करने वाली एजेंसियों की स्थिति डिफाल्टर जैसी गई है। किसानों के भुगतान के लिए पूरी तरह से एफसीआई पर निर्भर यह एजेंसियां भले ही गेहूं खरीद बंद होने के बाद राहत महसूस कर रही हो लेकिन उन किसानों की हालत पतली हो रही है, जिनका लाखों रुपया क्रय केद्र पर बकाया है।
एजेंसियों ने गेहूं की पूरी खरीद क्रेडिट पर की है। खरीद की मंजूरी मिलने के बाद एजेंसियों ने किसानों का गेहूं लेना शुरू किया और फिर उस गेहूं की बिक्री से जो पैसा भारतीय खाद्य निगम से मिला उसे किसानों को दे दिया गया। इसमें मार्जिन के तौर पर मोटी रकम एजेंसियों के अधिकारियों व ठेकेदारों की जेब में चली गई। खरीद बंद होने के बाद न तो ठेकेदार कहीं दिखाई दे रहा है और न ही संबंधित अधिकारी। क्रय केन्द्र बंद होने के बाद किसान भुगतान के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अभी तक गेहूं खरीद में अठारह करोड़ रुपये का वितरण हो चुका है जबकि करीब छह करोड़ रुपए की अदायगी अभी बाकी है। इसमें सबसे ज्यादा बकाया पीसीएफ एवं यूपी एग्रो का है। नियम यह है कि तौल के साथ ही किसानों को भुगतान कर दिया जाए लेकिन व्यवहारिक तौर पर स्थिति बिल्कुल उलट है। एक सप्ताह का समय खरीद बंद हुए बीत चुका है लेकिन अभी तक अदायगी नहीं हो पायी है। इस बारे में एजेंसियों का कहना है कि एफसीआई से ही पैसा नहीं मिल पा रहा है। जबकि जिला प्रबंधक एफसीआई डीपी सिंह ने बताया कि मार्केटिंग ने सारी बिलिंग करा ली है जिसका पूरा भुगतान हो चुका है। दिक्कत उन एजेंसियों साथ है जो बिलिंग में ढिलाई कर रही है। प्रबंधक ने बताया कि जून तक की सारी बिलिंग हो चुकी है। इधर जो गाडि़या उतर रही हैैं उनका पेमेंट नहीं हो पाया है।

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