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बोरे खत्म होने से गेहूं खरीद ठप
Fatehpur
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। समर्थन मूल्य योजना के तहत गेहूं खरीद पटरी पर नहीं आ रही है। तौल का काम ठीक से शुरू भी नहीं हो पाया था कि बोरों की कमी की वजह से खरीद व्यवस्था लड़खड़ा गई है। ज्यादातर सेंटरों में बोरों की कमी की वजह से तौल का काम बंद है। तौल को पटरी पर लाने के लिए दस लाख बोरों की जरूरत है जिसके सापेक्ष कुल पचीस हजार बोरे ही विभाग के पास इस समय है। समस्या की वजह से ज्यादातर कांटे ठप है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी गेहूं खरीद में बारदाने कीकमी की समस्या आड़े आ रही है। ज्यादातर केंद्रों में बोरे नहीं हैं जिसकी वजह से कांटे बंद है और तौल का काम रुका हुआ है। जो किसान अपनी उपज लेकर सेंटर पर पहुंच रहे हैं उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। हजारों क्विंटल गेहूं क्रय केंद्रों में डंप हो गया है। कर्मचारियों ने तौल से हाथ खड़े कर दिए हैं। तौल के लिए दस लाख बोरों की जरूरत है जबकि उपलब्धता पचीस हजार बोरों की है। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर जिन सेंटरों पर आवक न होने से तौल नहीं हो रही है वहां के बोरे उन सेंटरों में शिफ्ट किए जा रहे हैं जहां तौल का काम प्रभावित हो रहा है। लेकिन यह उपलब्धता बेहद कम है। किसी भी सेंटर में एक-दो गांठ(पांच सौ या हजार) से अधिक बोरे नहीं है। इनसे अधिकतम पांच सौ क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सकता है। जिला विपणन अधिकारी प्रदीप कुमार कुशवाहा ने बताया बोरों की कमी के बारे में मंडलायुक्तको अवगत करा दिया गया है। शीघ बारदाना उपलब्ध कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे तौल का काम बिना दिक्कत के चल सके।
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सरकारी गेहूं खरीद में बारदाने कीकमी की समस्या आड़े आ रही है। ज्यादातर केंद्रों में बोरे नहीं हैं जिसकी वजह से कांटे बंद है और तौल का काम रुका हुआ है। जो किसान अपनी उपज लेकर सेंटर पर पहुंच रहे हैं उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। हजारों क्विंटल गेहूं क्रय केंद्रों में डंप हो गया है। कर्मचारियों ने तौल से हाथ खड़े कर दिए हैं। तौल के लिए दस लाख बोरों की जरूरत है जबकि उपलब्धता पचीस हजार बोरों की है। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर जिन सेंटरों पर आवक न होने से तौल नहीं हो रही है वहां के बोरे उन सेंटरों में शिफ्ट किए जा रहे हैं जहां तौल का काम प्रभावित हो रहा है। लेकिन यह उपलब्धता बेहद कम है। किसी भी सेंटर में एक-दो गांठ(पांच सौ या हजार) से अधिक बोरे नहीं है। इनसे अधिकतम पांच सौ क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सकता है। जिला विपणन अधिकारी प्रदीप कुमार कुशवाहा ने बताया बोरों की कमी के बारे में मंडलायुक्तको अवगत करा दिया गया है। शीघ बारदाना उपलब्ध कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे तौल का काम बिना दिक्कत के चल सके।
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