फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   पुलिस ‘कान’ लगाकर जांचती है ध्वनि प्रदूषण

पुलिस ‘कान’ लगाकर जांचती है ध्वनि प्रदूषण

Sun, 21 Sep 2014 05:31 AM IST
Fatehpur
Fatehpur Updated Sun, 21 Sep 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
फतेहपुर। जिले में यातायात दुरुस्त करने के लिए आए दिन चेकिंग अभियान चलाया जाता है। इसके तहत ध्वनि प्रदूषण के नाम पर वाहन स्वामियों से जुर्माना वसूला जाता है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है पुलिस अन्य कामों की तरह इस सिस्टम को भी हवा में चला रही है। विभाग के पास ध्वनि प्रदूषण मापक यंत्र (आडियोमीटर) का ही अता-पता नहीं है। अभियान के दौरान यातायात पुलिस कान लगाकर ध्वनि प्रदूषण का मानक तय कर जुर्माना लगाती है। ट्रैफिक सिस्टम को पटरी में लाने के लिए तमाम कवायदें हो रही है। लेकिन बेहद खतरनाक ध्वनि प्रदूषण में रोक लगाने का कोई इंतजाम पुलिस के पास नहीं है। शहर में आम तौर पर फर्राटा भरने वाले वाहनों में तेज आवाजें करके ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले हार्न लगे हुए हैं। हार्नों से तरह-तरह की चीख मचाने वाली आवाजें तक निकलती है। इनके अचानक बजाए जाने से राहगीर भौचक होकर दुर्घटनाओं का शिकार बन रहे हैं और ट्रैफिक नियमों का भी उल्लघंन हो रहा है। यातायात पुलिस की माने तो चेकिंग अभियान में अक्सर ऐसे वाहनों का चालान होता है। पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से हवा हवाई है। सच बात यह है कि पुलिस के पास कोई भी वाहनों की ध्वनि मापक यंत्र (आडियोमीटर) ही नहीं है। ऐसे में ट्रैफिक कं ट्रोल सिस्टम के पास ध्वनि प्रदूषण करने वालों पर कार्रवाई का कोई मजबूत आधार ही नहीं है। इससे मामूली जुर्माने पर ही वाहन चालकों को निजात मिल जाता है और बेखौफ होकर वाहनों के चालक तेज आवाजों वाले हार्न इस्तेमाल कर रहे हैं।
विज्ञापन


ध्वनि प्रदूषण से कानों में पड़ता असर
जिला अस्पताल के गला, नाक, कान रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव चौधरी बताते हैं कि तेज हार्न के प्रभाव से लोगों के कानों का पर्दा और नसें फट जाती हैं। इससे कम सुनाई देने और कानों में सनसनाहट होने की शिकायत होती है। साउंड का लेवल आम तौर 80 से 90 डेसीबल तक इंसान को सुनना चाहिए। इससे अधिक आवाज कानों के लिए खतरनाक है और प्रेशर हार्न आदि में 120 से 160 डेसीबल की आवाज होती है।
विज्ञापन


इंसेट
वाहन चालकों के खेल में पुलिस फेल
वाहनों के चालक प्रेशर से लेकर अन्य कई प्रकारों के तेज ध्वनि के हार्न लगाए रहते हैं। इसकी पुलिस को भनक तक नहीं लगती है। पुलिस को चेकिंग के दौरान भी वाहन चालक चूना लगा देते हैं। मामला यह है कि ध्वनि प्रदूषण पैदा करने वाले हार्न और उनके कंट्रोल स्विच ट्रक, बसों, कारों, बाइकों के चालक छिपाकर लगाते हैं। उनका सीधा कनेक्शन कंपनी के लगे हार्न के स्विच से नहीं होता है। इस तरह से चालक पुलिस को चकमा दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



कोट
वाहनों की ध्वनि जांच की पड़ताल में उनकी टीम प्रेशर हार्न चेक करती है। जिस वाहन में प्रेशर हार्न होता ह, उसे ही सिर्फ ध्वनि प्रदूषण में लाकर चालान किया जाता है। उनके विभाग में कई सालों से आडियोमीटर उपलब्ध नहीं है। यातायात प्रभारी अंजन कुमार सिंह।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed