फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   सरकारी इमदाद की आस में सूखे से बेहाल किसान

सरकारी इमदाद की आस में सूखे से बेहाल किसान

Fri, 19 Sep 2014 05:31 AM IST
Fatehpur
Fatehpur Updated Fri, 19 Sep 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
फतेहपुर। सूबे के सूखाग्रस्त घोषित जिलों में शामिल फतेहपुर में किसानों को राहत देने के लिए कार्ययोजना पर काम शुरू हो चुका है। लक्ष्य का करीब 45 फीसदी फसल उत्पादन प्रभावित होने वाले जिले में प्रशासन स्तर पर फसली नुकसान का आंकलन शुरू है। संबंधित विभागों को सूखे से तबाह हुए बर्बाद हुए किसानों को हर संभव मदद दिए जाने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। राजस्व कर्मी खसरा खतौनी खंगालने में लगा दिए गए हैं। जिले के करीब ढाई लाख किसानों की खसरा खतौनी खंगाली जाने लगी हैं। राजस्व समेत अन्य वसूली पर रोक लगा दी गई है। जिला कृषि अधिकारी रविकांत का कहना है कि राजस्व समेत अन्य वसूली पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने अपना काम चालू कर दिया है। जिले में विभिन्न बैंकों में 25 हजार 106 किसानों ने फसली बीमा करा रखा है।भीषण सूखे से जिले की सिंचित और असिंचित 57 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई हैं। खरीफ की फसल में 139106 हेक्टेयर बुआई हुई थी, जिसमें 80083 हेक्टेयर फसल सूख चुकी है। किसान बर्बादी की कगार पर आ गया है और परिवार के भरण-पोषण की चिंता सताने लगी है। जून से मानसूनी बारिश के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाए किसानों की आंखें पथरा गईं, लेकिन अबकी पूरा समय बिना पानी बरसे ही गुजर गया। जून माह से अब तक कुछ इलाकों में छिटपुट ही बारिश हुई है। जून माह में 70.4 मिमी. की तुलना में मात्र 23.8 मिमी. बारिश हुई है। इसी प्रकार जुलाई माह में मात्र 100.7 मिमी बारिश हुई है जबकि 278.40 मिमी. होनी चाहिए। अगस्त माह में 289.70 मिमी न होकर मात्र 39.4 मिमी ही बारिश हुई है। अत्याधिक कम बरसात होने से फसलों की लागत भी निकलना मुश्किल है।
विज्ञापन


दर्द बया करते किसान
फोटो
21- कैलाश शुक्ला
22- लक्ष्मीचंद्र
23- राजेश तिवारी
24- धर्मेंद्र तिवारी
किसान राजेश तिवारी, धर्मेंद्र तिवारी, कैलाश शुक्ला और लक्ष्मीचंद्र ने बताया कि खरीफ में धान की फसल से मुख्य आय होती है। बरसात और पानी की सिंचाई पर निर्भर होती है। धान की रोपाई नलकूपों से भरकर कर दी गई थी, लेकिन बारिश न होने और बिजली की बदहाल हालत से फसल की सिंचाई नहीं हो सकी है। आधे से ज्यादा धान की फसल सूख कर खराब हो गई है। उधर, बिजली न आने से नलकूपों से सिंचाई भी मुश्किल में है। किसानों का कहना है कि बड़े काश्तकारों को छोड़कर मझोले और छोटे किसानों के सामने निजी संसाधनों से फसलों की सिंचाई बड़ा संकट है।
विज्ञापन


फैक्ट फाइल

फसल कुल फसल सूखी प्रतिशत
------------------------------------
धान 87404 51857 59.33
ज्वार 8179 4563 53.33
बाजरा 7633 3994 52.33
मक्का 246 132 53.33
उरद 6708 3712 55.33
मूंग 887 496 56.00
अरहर 19473 10515 54.00
तिल 8311 4875 58.66
मूंगफली 265 141 53.37
--------------------------------------
योग-- 139106 80083 57.57
--------------------------------------
(सभी आंकड़े हेक्टेयर में )

बारिश का औसत
जून माह में 70.4 मिमी. की तुलना में मात्र 23.8 मिमी. बारिश हुई है। इसी प्रकार जुलाई माह में मात्र 100.7 मिमी बारिश हुई है जबकि 278.40 मिमी. होनी चाहिए। अगस्त माह में 289.70 मिमी न होकर मात्र 39.4 मिमी ही बारिश हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोट
‘50 प्रतिशत फसल सूखे से नष्ट होने पर सूखा घोषित किया जाने का नियम है। 31 अगस्त तक की रिपोर्ट में 57.57 फीसदी फसल का नुकसान बताया गया था। शासन को यह रिपोर्ट भेजी गई थी।’ - रविकांत सिंह - जिला कृषि अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed