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गंगाजल टेस्ट में फेल, घट रही आक्सीजन की मात्रा
Fatehpur
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। जनवरी में शुरू कुंभ मेले में आचमन के लिए श्रद्धालुओं को शुद्ध गंगाजल मिल जाए तो बड़ी बात है। ऐसा महज गंगा की ऊपरी सतह पर तैरने वाली गंदगी के आधार पर नहीं कहा जा रहा है, बल्कि कुछ दिन पूर्व गंगाजल की गुणवत्ता परखने के लिए की गई डीओ टेस्टिंग की जांच रिपोर्ट भी यही बया कर रही है। हालांकि मामले को संज्ञान में लेते हुए 10 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अधिकारियों को सुधार के निर्देश देते हुए कड़ी फटकार लगाई है। इसके बाद प्रति माह होने वाली जांच के तहत 17 नवंबर को दोबारा गंगाजल का सैंपल लिया गया। उक्त परीक्षण में पानी में तय मानक के अनुरूप आक्सीजन की मात्रा कम होने के साथ ही यह तथ्य भी सामने आया कि कानपुर से निकलने के बाद गंगा का पानी और ज्यादा प्रदूषित हो जाता है। कानपुर के विभागीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है। जनवरी में संगम की रेती पर आयोजित होने वाले कुंभ मेले को देखते हुए इसी माह की 17 तारीख को कानपुर-फतेहपुर सीमा के मध्य गंगा जल का डीओ टेस्ट (डिजाल्व आक्सीजन एक्सपेरीमेंट टेस्ट) कराया गया, जो फेल हो गया। परीक्षण के दौरान पानी में आक्सीजन की मात्रा 6.30 मिलीग्राम प्रति लीटर के अनुपात में पाई गई, जबकि तय मानक के मुताबिक यह मात्रा साढ़े सात मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर होनी चाहिए। आक्सीजन का लेबल कम पाए जाने पर 10 नवंबर को हाईकोर्ट ने शासन को फटकार लगाई थी। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को सर्कुलर जारी करते हुए कड़े निर्देश दिए गए कि वे तकनीकी आधार पर नियमित रिपोर्ट तैयार करें। भिटौरा स्थित बाढ़ नियंत्रण कार्यालय के मुताबिक गंगा में इस समय पानी का स्तर 51 मीटर गेज के ऊपर है। अधिकारियों का मानना है कि यदि जल स्तर इससे कम हुआ तो पानी में प्रदूषण बढ़ेगा जिससे आक्सीजन का स्तर 5 मिलीग्राम प्रति लीटर या इससे भी नीचे गिर सकता है। सहायक अभियंता बाढ़ नियंत्रण कार्यालय भिटौरा, एनपी सिंह ने बताया कि गंगा जल में आक्सीजन की मात्रा तय मानक से काफी कम है। कोर्ट के आदेशानुसार इस संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है। साथ ही उच्च अधिकारियों के माध्यम से नरौरा चेकडैम से पर्याप्त पानी छोड़े जाने की सिफारिश की गई है। जिससे कुंभ तक पानी में आक्सीजन के स्तर को दुरुस्त कर समुचित पानी मुहैया कराया जा सके। कानपुर से निकलने के बाद गंगा का पानी और ज्यादा प्रदूषित हो जाता है। इसलिए कानपुर के विभागीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है।
जल-जीवों के लिए भी संकट
फतेहपुर। गंगा के पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने से कुंभ मेले की तैयारियों में लगे अधिकारियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने से जल जीवों को घुटन होने लगती है। गंगा माई डाल्फिन प्रोजेक्ट से जुड़े वाइल्ड लाइफ विभाग के डाक्टर संदीप बेहरा ने बताया कि गंगा में आक्सीजन का स्तर कम होना काफी काफी गंभीर मामला है।
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जल-जीवों के लिए भी संकट
फतेहपुर। गंगा के पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने से कुंभ मेले की तैयारियों में लगे अधिकारियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने से जल जीवों को घुटन होने लगती है। गंगा माई डाल्फिन प्रोजेक्ट से जुड़े वाइल्ड लाइफ विभाग के डाक्टर संदीप बेहरा ने बताया कि गंगा में आक्सीजन का स्तर कम होना काफी काफी गंभीर मामला है।
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