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कसाब को फांसी तो ठीक, लेकिन देर हुई
Fatehpur
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। 26/11 की तारीख हर हिंदुस्तानियों के दिलो-दिमाग पर छाई है। देश की मायानगरी में ना जाने कितने बेगुनाह जान से हाथ धो बैठे। खून की होली खेलने वाले आतंकवादी को बुधवार को फांसी दिए जाने से अवाम में विश्वास की लहर पैदा हो गई। ऐसे में साथ दिखा, आतंकवाद के विरोध में मुखरता से बोलने का जज्बा। क्या हिंदू और क्या मुस्लिम, समाज के हर वर्ग ने नरसंहार को अंजाम देने वाले को फांसी की सजा पर खुशी जाहिर की। हां यह जरूर कहा सरकार ने देर कर दी। सबने कहा ये मौत आंतकवाद को पीछे पलटकर सोेंचने को मजबूर करेगी। यही तो हर हिन्दुस्तानी की ख्वाहिश है। जिसने घटना वाली तारीख से कब होगी कसाब को फांसी, कि आस लगाए बैठा था। अमर उजाला/ कांपैक्ट ने आंतकवादी अफजल कसाब को फांसी दिए जाने के मसले पर समाज के प्रबुद्धजनों से बात की। सभी ने आंतकवाद को जड़ से समाप्त करने की वकालत की। कहा देश के इस नासूर को सरकार और भी तेजी से खत्म करने के लिए जल्दी से निर्णय लेना सीखे।
कसाब ने देश में जो किया उसे उसका फल मिला
- सभी तबके के लोगों ने एक सुर में कहा, पस्त हों आतंकवादियों के हौसले
अफजल कसाब जैसे आंतकवादियों को और जल्दी फांसी की सजा सुनाई जानी चाहिए थी। दिल की कहूं तो जितनी बार कसाब को फांसी पर लटकाया जाए, कम है। देश के लिए खतरा बनने वाले को ऐसी ही सजा मिले ताकि आंतकवाद आगे से सिर न उठा सके। कसाब की अपील ऊपर से नीचे तक खारिज होने से दोष साबित हो चुका था। ऐसी स्थिति में जो फैसला हुआ उस पर कोई आपत्ति करने की बात नहीं। देश की सुरक्षा को लेकर सरकार को और भी सख्त होना चाहिए जिससे आतंकवादियों के हौसले टूटे। कसाब को फांसी दिए जाने से समाज में सही संदेश गया है। आतंकवादी को देश में अस्थिरता फैलाने से पहले ही कुचल देना चाहिए। बुधवार की सुबह जो कुछ हुआ उसे काफी पहले हो जाना चाहिए था। हो सकता है कि सरकार की अपनी कोई मजबूरी रही हो।
मुंबई में बम ब्लास्ट कराके खून बहाने वाले अफजल कसाब को सरकार ने फांसी की सजा सुनाकर सरकार ने बता दिया कि वह सख्त से सख्त फैसला लेना जानती है। फांसी दिया जाना सही फैसला है। लेकिन यह देरी से आया। कसाब को बेवजह इतने दिन के लिए जीवनदान दिया गया। जो दूसरों की दुनिया उजाड़े उसे समाज में रहने का अधिकार नहीं है। कसाब को फांसी उसका जुर्म सामने आने के साथ ही दे देनी चाहिए थी। ऐसा होता तो दुनिया की निगाह में देश की छवि कुछ और होती। हो सकता है सरकार की कोई मजबूरी रही हो। सरकार आतंकी को पनपने से पहले की कुचल दे। जिससे फिर मुंबई जैसे कांड न हो। इसके लिए सरकार फैसला क्विक एंड फास्ट लेना चाहिए था। कसाब ने मुंबई में खून का खेल खेला। बेगुनाह मारे गए। दिन रात भागने वाली मुंबई में कई दिन सन्नाटा जैसा माहौल बना रहा। दोषी को सजा देकर सरकार ने सुरक्षा के प्रति अच्छा संदेश दिया है। देश में आतंक की इबारत लिखने वाले कसाब को सजा ठीक मिली। सरकार ने उसे फांसी पर लटका कर आतंकवाद को सबक सिखाने का काम किया है। कसाब ने देश में जो किया उसे उसका फल मिला। ऐसे देश के दुश्मन को फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए। बुधवार को सरकार ने दुनिया को आंतकवाद के मामले में अच्छा संदेश दिया है।
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पूरे दिन रही चौकस निगहबानी
- आतंकी कसाब को फांसी दिए जाने से निगहबानी तेज रही
फतेहपुर। बुधवार को सारा दिन शहर की सड़कें खाकी की मौजूदगी का अहसास कराती रही। इसे पहने जवान और उनके अधिकारी पल पल की खबर लेते रहें। खासकर मिलीजुली बस्तियों में सुरक्षा को लेकर ज्यादा चौकसी नजर आई। खासकर ऐसे में पुलिस का मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में खास फोकस रहा। मसलन चौक क्षेत्र हो या फिर आबू नगर हर जगह पुलिस के जवान घूमते दिखे। कोतवाल यशवीर सिंह ने बताया ऐतिहात के तौर पर पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है। ताजिया निकलने के दौरान वैसे ही पहले से पुलिस बड़ी संख्या में इंगेज रहती है।
आतंक के एक अध्याय का अंत हो गया
बीजेपी के जिलाध्यक्ष रणवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कसाब को फांसी देने के साथ ही आतंक के एक अध्याय का अंत हो गया है। इससे सही संदेश जाएगा कि बुरे कर्मों का परिणाम कभी अच्छा नहीं हो सकता है। सपा जिलाध्यक्ष रामेश्वर दयाल ने कहा कि आतंक का कोई मजहब नहीं होता है। कसाब को फांसी दिए जाने से देश के नागरिकों में राष्ट्रीयता की भावना मजबूत होगी। बसपा जिलाध्यक्ष सुनील गौतम ने कहा कि मानवता से खिलवाड़ करने वालों की स्थिति ऐसी ही होती है। तमाम निर्दोष लोगों की जान से खेलने वाले आतंकी कसाब का ऐसा अंत निश्चित था। कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश द्विवेदी ने कहा कि कसाब को फांसी दिए जाने से उन तमाम परिवाराें को कुछ राहत मिली होगी जिन्हाेंने उस हमले में अपने लोगों को खो दिया।
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कसाब ने देश में जो किया उसे उसका फल मिला
- सभी तबके के लोगों ने एक सुर में कहा, पस्त हों आतंकवादियों के हौसले
अफजल कसाब जैसे आंतकवादियों को और जल्दी फांसी की सजा सुनाई जानी चाहिए थी। दिल की कहूं तो जितनी बार कसाब को फांसी पर लटकाया जाए, कम है। देश के लिए खतरा बनने वाले को ऐसी ही सजा मिले ताकि आंतकवाद आगे से सिर न उठा सके। कसाब की अपील ऊपर से नीचे तक खारिज होने से दोष साबित हो चुका था। ऐसी स्थिति में जो फैसला हुआ उस पर कोई आपत्ति करने की बात नहीं। देश की सुरक्षा को लेकर सरकार को और भी सख्त होना चाहिए जिससे आतंकवादियों के हौसले टूटे। कसाब को फांसी दिए जाने से समाज में सही संदेश गया है। आतंकवादी को देश में अस्थिरता फैलाने से पहले ही कुचल देना चाहिए। बुधवार की सुबह जो कुछ हुआ उसे काफी पहले हो जाना चाहिए था। हो सकता है कि सरकार की अपनी कोई मजबूरी रही हो।
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मुंबई में बम ब्लास्ट कराके खून बहाने वाले अफजल कसाब को सरकार ने फांसी की सजा सुनाकर सरकार ने बता दिया कि वह सख्त से सख्त फैसला लेना जानती है। फांसी दिया जाना सही फैसला है। लेकिन यह देरी से आया। कसाब को बेवजह इतने दिन के लिए जीवनदान दिया गया। जो दूसरों की दुनिया उजाड़े उसे समाज में रहने का अधिकार नहीं है। कसाब को फांसी उसका जुर्म सामने आने के साथ ही दे देनी चाहिए थी। ऐसा होता तो दुनिया की निगाह में देश की छवि कुछ और होती। हो सकता है सरकार की कोई मजबूरी रही हो। सरकार आतंकी को पनपने से पहले की कुचल दे। जिससे फिर मुंबई जैसे कांड न हो। इसके लिए सरकार फैसला क्विक एंड फास्ट लेना चाहिए था। कसाब ने मुंबई में खून का खेल खेला। बेगुनाह मारे गए। दिन रात भागने वाली मुंबई में कई दिन सन्नाटा जैसा माहौल बना रहा। दोषी को सजा देकर सरकार ने सुरक्षा के प्रति अच्छा संदेश दिया है। देश में आतंक की इबारत लिखने वाले कसाब को सजा ठीक मिली। सरकार ने उसे फांसी पर लटका कर आतंकवाद को सबक सिखाने का काम किया है। कसाब ने देश में जो किया उसे उसका फल मिला। ऐसे देश के दुश्मन को फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए। बुधवार को सरकार ने दुनिया को आंतकवाद के मामले में अच्छा संदेश दिया है।
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पूरे दिन रही चौकस निगहबानी
- आतंकी कसाब को फांसी दिए जाने से निगहबानी तेज रही
फतेहपुर। बुधवार को सारा दिन शहर की सड़कें खाकी की मौजूदगी का अहसास कराती रही। इसे पहने जवान और उनके अधिकारी पल पल की खबर लेते रहें। खासकर मिलीजुली बस्तियों में सुरक्षा को लेकर ज्यादा चौकसी नजर आई। खासकर ऐसे में पुलिस का मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में खास फोकस रहा। मसलन चौक क्षेत्र हो या फिर आबू नगर हर जगह पुलिस के जवान घूमते दिखे। कोतवाल यशवीर सिंह ने बताया ऐतिहात के तौर पर पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है। ताजिया निकलने के दौरान वैसे ही पहले से पुलिस बड़ी संख्या में इंगेज रहती है।
आतंक के एक अध्याय का अंत हो गया
बीजेपी के जिलाध्यक्ष रणवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कसाब को फांसी देने के साथ ही आतंक के एक अध्याय का अंत हो गया है। इससे सही संदेश जाएगा कि बुरे कर्मों का परिणाम कभी अच्छा नहीं हो सकता है। सपा जिलाध्यक्ष रामेश्वर दयाल ने कहा कि आतंक का कोई मजहब नहीं होता है। कसाब को फांसी दिए जाने से देश के नागरिकों में राष्ट्रीयता की भावना मजबूत होगी। बसपा जिलाध्यक्ष सुनील गौतम ने कहा कि मानवता से खिलवाड़ करने वालों की स्थिति ऐसी ही होती है। तमाम निर्दोष लोगों की जान से खेलने वाले आतंकी कसाब का ऐसा अंत निश्चित था। कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश द्विवेदी ने कहा कि कसाब को फांसी दिए जाने से उन तमाम परिवाराें को कुछ राहत मिली होगी जिन्हाेंने उस हमले में अपने लोगों को खो दिया।