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प्लीज पास कर दीजिए, नहीं तो मां को कुछ भी हो सकता है
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फतेहपुर। बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं माध्यमिक शिक्षा की पोल खोल रही हैं। इंटरमीडिएट के एक परीक्षार्थी ने करोड़ को कड़ोर लिखा। एक ने प्रश्नोत्तर के स्थान पर प्रश्नोत्तर कई स्थानों पर लिखा। ज्यादातर उत्तर पुस्तिकाओं में सवालों के हल बिना कटिंग के पूरे नहीं हुए हैं। एक परीक्षार्थी ने मां की बीमारी का हवाला देकर पास करने की प्रार्थना की।
माध्यमिक शिक्षा विभाग की शैक्षिक गुणवत्ता का हाल बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन केंद्रों में दिख रहा है। एक परीक्षक को एक दिन में जांचने के लिए 40 कापियां आवंटित की जा रही हैं। परीक्षकों की कमी के कारण बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त शिक्षक परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। एक हिंदी की एक उत्तर पुस्तिका में छात्रा ने उत्तर पुस्तिका के अंत में परीक्षक से पास करने के लिए निवेदन किया है। लिखा है कि मां बीमार है। उसकी देखरेख में परीक्षा की तैयारी नहीं हो पाई। फेल होने पर मां को तकलीफ होगी। ऐसे में मां को कुछ भी हो सकता है। प्लीज पास कर दीजिए। उधर, विज्ञान और गणित की उत्तर पुस्तिकाओं को आवंटित करने का बाद सबसे पहले परीक्षक उनकी सघन तलाशी लेते हैं। इसके बाद मूल्यांकन शुरू करते हैं। एक परीक्षक ने बताया कि कोई भी दिन ऐसा नहीं होता है, जब खर्चा पानी के लिए उत्तर पुस्तिका में रुपये न मिलते हों।
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माध्यमिक शिक्षा विभाग की शैक्षिक गुणवत्ता का हाल बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन केंद्रों में दिख रहा है। एक परीक्षक को एक दिन में जांचने के लिए 40 कापियां आवंटित की जा रही हैं। परीक्षकों की कमी के कारण बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त शिक्षक परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। एक हिंदी की एक उत्तर पुस्तिका में छात्रा ने उत्तर पुस्तिका के अंत में परीक्षक से पास करने के लिए निवेदन किया है। लिखा है कि मां बीमार है। उसकी देखरेख में परीक्षा की तैयारी नहीं हो पाई। फेल होने पर मां को तकलीफ होगी। ऐसे में मां को कुछ भी हो सकता है। प्लीज पास कर दीजिए। उधर, विज्ञान और गणित की उत्तर पुस्तिकाओं को आवंटित करने का बाद सबसे पहले परीक्षक उनकी सघन तलाशी लेते हैं। इसके बाद मूल्यांकन शुरू करते हैं। एक परीक्षक ने बताया कि कोई भी दिन ऐसा नहीं होता है, जब खर्चा पानी के लिए उत्तर पुस्तिका में रुपये न मिलते हों।
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