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733 परिषदीय विद्यालयों में पानी की व्यवस्था नहीं
fatehpur
Updated Tue, 10 Apr 2018 11:09 PM IST
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प्राथमिक स्कूल असोथर प्रथम का खराब हैंडपंप
- फोटो : amarujala
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। गर्मी के मौसम में 733 परिषदीय विद्यालयों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, जबकि प्रधानों को हैंडपंप लगाने का आदेश फाइलों में ही गुम होकर रह गया। ऐसे में स्कूली बच्चों को बोतल में पानी भरकर घर से ले आना मजबूरी है। मध्याह्न भोजन खाने के बाद अधिकतर बच्चे अपने घर चले जाते हैं। ऐसे में भोजन के बाद स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति नगण्य हो जाती है।
जिले में कुल 2650 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 733 विद्यालयों में कुछ में हैंडपंप ही नहीं हैं। बहुतायत स्कूलों में लगे हैंडपंप खराब हैं। यहां बच्चों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा। पिछली गर्मी के मौसम में तत्कालीन बीएसए विनय कुमार ने समस्या से डीएम को अवगत कराया था। डीएम ने जिला पंचायत राज विभाग को हैंडपंपों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। एक साल गुजर चुका है, लेकिन अभी तक जिला पंचायत राज विभाग ने नए हैंडपंप लगाना तो दूर, पुराने हैंडपंपों की मरम्मत तक नहीं कराई। यहां के बच्चों को दोपहर में एमडीएम तो परोसा जा रहा है लेकिन पीने का पानी बच्चे घर से लाते हैं। रसोइयां खाना पकाने और बर्तन धोने के लिए पानी लाती हैं, लेकिन बच्चों के पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं होती है।
कोट्स-
बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि अभी 303 स्कूलों में हैंडपंप लगाने के लिए बजट शासन ने आवंटित किया है। पत्रावली अनुमोदन के बाद जलनिगम को धनराशि भेज दी जाएगी। तकनीकी खराबी से बंद हैंडपंपों की मरम्मत कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों की है।
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फतेहपुर। गर्मी के मौसम में 733 परिषदीय विद्यालयों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, जबकि प्रधानों को हैंडपंप लगाने का आदेश फाइलों में ही गुम होकर रह गया। ऐसे में स्कूली बच्चों को बोतल में पानी भरकर घर से ले आना मजबूरी है। मध्याह्न भोजन खाने के बाद अधिकतर बच्चे अपने घर चले जाते हैं। ऐसे में भोजन के बाद स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति नगण्य हो जाती है।
जिले में कुल 2650 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 733 विद्यालयों में कुछ में हैंडपंप ही नहीं हैं। बहुतायत स्कूलों में लगे हैंडपंप खराब हैं। यहां बच्चों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा। पिछली गर्मी के मौसम में तत्कालीन बीएसए विनय कुमार ने समस्या से डीएम को अवगत कराया था। डीएम ने जिला पंचायत राज विभाग को हैंडपंपों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। एक साल गुजर चुका है, लेकिन अभी तक जिला पंचायत राज विभाग ने नए हैंडपंप लगाना तो दूर, पुराने हैंडपंपों की मरम्मत तक नहीं कराई। यहां के बच्चों को दोपहर में एमडीएम तो परोसा जा रहा है लेकिन पीने का पानी बच्चे घर से लाते हैं। रसोइयां खाना पकाने और बर्तन धोने के लिए पानी लाती हैं, लेकिन बच्चों के पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं होती है।
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कोट्स-
बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि अभी 303 स्कूलों में हैंडपंप लगाने के लिए बजट शासन ने आवंटित किया है। पत्रावली अनुमोदन के बाद जलनिगम को धनराशि भेज दी जाएगी। तकनीकी खराबी से बंद हैंडपंपों की मरम्मत कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों की है।
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