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दो बार किराया देने से व्यापारियों में नाराजगी
Updated Sun, 04 Mar 2018 11:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जहानाबाद (फतेहपुर)। कस्बे में लगने वाली बाजार में फुटपाथ व सब्जी मंडी में दुकान लगाने वाले दुकानदारों से दोहरा किराया वसूला जा रहा है। वहीं, बाजार में शौचालय और पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है। इससे उनमें नाराजगी पनप रही है।
सप्ताह में दो दिन लगने वाली बाजार में कस्बा सहित ग्रामीण इलाकों से व्यापारी आते हैं। यहां उन्हें पहले तो बाजार मालिक के ठेकेदार को किराया चुकाना पड़ता है उसके बाद मंडी समिति के लोग किराया वसूलते हैं। एक ही स्थान के लिए दो बार किराया देने से दुकानदारों में रोष है।
किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये की लागत से मंडी का निर्माण कराया है। थोक व फुटकर सामान बेचने की सुविधा है पर मंडी वीरान पड़ी हुई है। यहां थोक दुकानदारों ने दुकान लेकर या तो गोदाम बना लिया या फिर खाली छोड़ रखा है। प्रशासन की उदासीनता के चलते यहां दुकानें नहीं लग पा रही हैं और सरकार का करोड़ों रुपया यूं ही बेकार हो गया है। बाजार बदस्तूर निजी हाथों में बना हुआ है।
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यही नहीं बाजार मालिक, दुकानदारों की सुविधा के लिये कोई काम भी नहीं कर रहे हैं। बाजार में न तो कोई सुलभ शौचालय है और न तो पीने के पानी की कोई व्यवस्था है। बरसात के दिनों में कीचड़ में ही खरीद फरोख्त करने की मजबूरी है। दुकानदार राम किशन, भोला नाथ, शिवशंकर ने बताया कि दोहरे किराये की समस्या से जूझ रहे हैं। कोई समाधान न निकलने से मजबूर हैं।
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जहानाबाद (फतेहपुर)। कस्बे में लगने वाली बाजार में फुटपाथ व सब्जी मंडी में दुकान लगाने वाले दुकानदारों से दोहरा किराया वसूला जा रहा है। वहीं, बाजार में शौचालय और पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है। इससे उनमें नाराजगी पनप रही है।
सप्ताह में दो दिन लगने वाली बाजार में कस्बा सहित ग्रामीण इलाकों से व्यापारी आते हैं। यहां उन्हें पहले तो बाजार मालिक के ठेकेदार को किराया चुकाना पड़ता है उसके बाद मंडी समिति के लोग किराया वसूलते हैं। एक ही स्थान के लिए दो बार किराया देने से दुकानदारों में रोष है।
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किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये की लागत से मंडी का निर्माण कराया है। थोक व फुटकर सामान बेचने की सुविधा है पर मंडी वीरान पड़ी हुई है। यहां थोक दुकानदारों ने दुकान लेकर या तो गोदाम बना लिया या फिर खाली छोड़ रखा है। प्रशासन की उदासीनता के चलते यहां दुकानें नहीं लग पा रही हैं और सरकार का करोड़ों रुपया यूं ही बेकार हो गया है। बाजार बदस्तूर निजी हाथों में बना हुआ है।
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यही नहीं बाजार मालिक, दुकानदारों की सुविधा के लिये कोई काम भी नहीं कर रहे हैं। बाजार में न तो कोई सुलभ शौचालय है और न तो पीने के पानी की कोई व्यवस्था है। बरसात के दिनों में कीचड़ में ही खरीद फरोख्त करने की मजबूरी है। दुकानदार राम किशन, भोला नाथ, शिवशंकर ने बताया कि दोहरे किराये की समस्या से जूझ रहे हैं। कोई समाधान न निकलने से मजबूर हैं।