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शिक्षा के हक से वंचित 2930 निशक्त बच्चे
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Fri, 15 Apr 2016 12:58 AM IST
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- फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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जिले के 2930 निशक्त बच्चों को अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का हक नहीं मिल रहा है। इन बच्चों का परिषदीय स्कूलों में पंजीयन तो है, लेकिन इन्हें पढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसी हालत में यह बच्चे स्कूलों में उपेक्षित हैं। यह बच्चे स्कूलों से एमडीएम खाकर घर लौट आते हैं। यह अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का सच है।
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बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों में जिले में 3530 निशक्त बच्चे चिह्नित हैं। इनमें 120 निशक्त बच्चों को जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी पूर्व माध्यमिक स्कूल परिसर में एक्सीलरेटेड लर्निंग कैंप लगाकर पढ़ाया जा रहा है। शेष 3410 बच्चे परिषदीय स्कूलों में पंजीकृत हैं।
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परिषदीय स्कूलों में पंजीकृत निशक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने सर्व शिक्षा से 36 विशेषज्ञ तथा दो रिसोर्स शिक्षकों की नियुक्ति कर रखी है। निशक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए विभाग इन्हें 12 हजार रुपये मासिक मानदेय का भुगतान करता है।
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एक शिक्षक के लिए प्रतिदिन छह से आठ स्कूलों में जाकर 20 निशक्त बच्चों को पूरे साल पढ़ाने का प्रावधान है। बेसिक शिक्षा विभाग ने महात्मा गांधी पूर्व माध्यमिक स्कूल परिसर में संचालित एक्सीलरेटेड लर्निंग कैंप में पढ़ाने के लिए सात विशेषज्ञ व एक रिसोर्स शिक्षक को संबद्ध कर रखा है।
ऐसे में परिषदीय स्कूलों में निशक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास 29 शिक्षक बचते हैं। इनमें से प्रत्येक शिक्षक को 20 बच्चे पढ़ाने का दायित्व है। इस तरह से यह शिक्षक 580 निशक्त बच्चों को अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का हक प्रदान कर रहे हैं।
अब सवाल उठता है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अभिलेखों में अंकित शेष 2930 निशक्त बच्चों को अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का अधिकार कैसे मिल रहा है? यह सोचनीय विषय है। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग में अनिवार्य शिक्षा अधिनियम पूरी तरह लागू होने का दावा किया जा रहा है।
सर्व शिक्षा के जिला समन्वयक अरुण मिश्रा का कहना है कि निशक्त बच्चों को पढ़ाने का सलेबस बीटीसी प्रशिक्षण में शामिल है। ऐसी हालत मेें नवनियुक्त बीटीसी शिक्षक निशक्त बच्चों को पढ़ा सकते हैं।