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25 से 4 बेड का बचा आयुर्वेदिक अस्पताल
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खागा। तहसील क्षेत्र का एक मात्र नगर का 25 बेड का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल करीब दो दशक से किराए के भवन में चल रहा है। भवन में जगह की कमी से अब अस्पताल में केवल चार ही बेड बचे हैं। अस्पताल में मानक के अनुसार न तो डॉक्टर हैं और न ही कर्मचारी।
नगर के जीटी रोड रानी चंद्र प्रभा डिग्री कालेज के पास चल रहा यह आयुर्वेदिक अस्पताल पहले रेलवे क्रासिंग के उस पार भी किराए के मकान में चल रहा था। पर्याप्त जगह होने पर 25 बेड थे। मरीजों को भर्ती कर इलाज किया
जाता था। वहां पर पेट्रोल पंप खुल जाने से भवन बदलना पड़ा। अब हालत यह है कि मरीज बहुत कम भर्ती होते हैं। मरीज भी कम तादात में जाते हैं। प्रतिदिन 20 से 30 मरीज ही जाते हैं। अस्पताल में तैनात डॉक्टर नीलेंद्र कुमार ने बताया कि मानक के अनुसार तीन कम्पाउंडर के सापेक्ष एक ही कम्पाउंडर है। वहीं चार स्टाफ नर्स की जगह दो नर्से हैं। नगर के रमाकांत गुप्ता, राकेश तिवारी, अवधेश शुक्ल, राम चरन और सुरेश चंद्र गुप्ता ने बताया आबादी से अस्पताल दूर है। आने जाने में 40 रुपए खर्च हो जाते हैं।
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नगर के जीटी रोड रानी चंद्र प्रभा डिग्री कालेज के पास चल रहा यह आयुर्वेदिक अस्पताल पहले रेलवे क्रासिंग के उस पार भी किराए के मकान में चल रहा था। पर्याप्त जगह होने पर 25 बेड थे। मरीजों को भर्ती कर इलाज किया
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जाता था। वहां पर पेट्रोल पंप खुल जाने से भवन बदलना पड़ा। अब हालत यह है कि मरीज बहुत कम भर्ती होते हैं। मरीज भी कम तादात में जाते हैं। प्रतिदिन 20 से 30 मरीज ही जाते हैं। अस्पताल में तैनात डॉक्टर नीलेंद्र कुमार ने बताया कि मानक के अनुसार तीन कम्पाउंडर के सापेक्ष एक ही कम्पाउंडर है। वहीं चार स्टाफ नर्स की जगह दो नर्से हैं। नगर के रमाकांत गुप्ता, राकेश तिवारी, अवधेश शुक्ल, राम चरन और सुरेश चंद्र गुप्ता ने बताया आबादी से अस्पताल दूर है। आने जाने में 40 रुपए खर्च हो जाते हैं।
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