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नहर निरीक्षण में खरपतवार देख बिफरे डीएम
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिंदकी (फतेहपुर)। मलवां विकास खंड के कोरसम गांव में निचली गंगा व रामगंगा नहरों का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम खरपतवार और जमा सिल्ट देख बिफर गए। किसानों ने उन्हें जमीनी हकीकत बताई। कई सवालों का जवाब न दे पाने पर डीएम ने दोनों अभियंता को कड़ी फटकार लगाई।
गुरुवार सुबह सात बजे जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह कोरसम गांव के पास निचली गंगा व रामगंगा नहरों का निरीक्षण करने पहुंच गए। यहां प्रगतिशील किसान लोकनाथ पांडेय, कमल, जगदीश सिंह आदि किसानों ने नहर विभाग के अधिकारियों की पोल खोलनी शुरू कर दी। कहा कि सिल्ट सफाई नहीं कराई जाती, नहरों में खरपतवार, झंखाड़ खड़ी हो गई है। पटरियों की मरम्मत ठीक से न कराने की वजह से कनेरी गांव, कंसपुर, पहरवापुर के पास अक्सर खांदी हो जाती है। फसल बर्बाद हो जाती हैं। मुआवजा भी नहीं मिलता। लोकनाथ पांडेय ने बताया कि शासन से 11-11 सौ क्यूसेक पानी दोनों नहरों में छोडने का रोस्टर तय है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण इसके एवज में मात्र सात से आठ सौ क्यूसेक पानी मिल पाता है। टेल तक बड़ी नहरों, राजबहों, माइनरों में पानी नहीं पहुंच पाता है। इस मौके पर एसडीएम सुशील कुमार गोंड, सीओ अभिषेक तिवारी, तहसीलदार प्रमेश श्रीवास्तव भी रहे।
बिंदकी। निचली गंगा नहर के अधिशासी अभिंयता वैभव सिंह व राम गंगा नहर के अभियंता महेंद्र सिंह से जब डीएम ने पूछा कि यह सब क्या सुन और देख रहे हैं? इस समय कितने क्यूसेक पानी चल रहा है? इसका जवाब दोनों अधिकारी नहीं दे सके। इस पर डीएम ने फटकार लगाते हुए कहा कि सभी नहरों, रजबहों, माइनरों में टेल तक पानी पहुंचना चाहिए वरना खैर नहीं।
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बिंदकी। जिलाधिकारी ने कहा कि नहरों, रजबहों, मइनरों के अंतर्गत आने वाले सभी किसानों को पानी मिले। इसके पहले पानी खांदी काटकर, फर्जी कुलाबों को लगाकर पानी के आगे बढने में अवरोध उत्पन्न करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी जिलेदार सुरेंद्र सिंह गौर, सींचपालो को देते हुए कहा कि ऐसी शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
- किसानों ने पोल खोली, बताई हकीकत
-जवाब नहीं दे सके अधिशासी अभिंयता
बिंदकी (फतेहपुर)। मलवां विकास खंड के कोरसम गांव में निचली गंगा व रामगंगा नहरों का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम खरपतवार और जमा सिल्ट देख बिफर गए। किसानों ने उन्हें जमीनी हकीकत बताई। कई सवालों का जवाब न दे पाने पर डीएम ने दोनों अभियंता को कड़ी फटकार लगाई।
गुरुवार सुबह सात बजे जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह कोरसम गांव के पास निचली गंगा व रामगंगा नहरों का निरीक्षण करने पहुंच गए। यहां प्रगतिशील किसान लोकनाथ पांडेय, कमल, जगदीश सिंह आदि किसानों ने नहर विभाग के अधिकारियों की पोल खोलनी शुरू कर दी। कहा कि सिल्ट सफाई नहीं कराई जाती, नहरों में खरपतवार, झंखाड़ खड़ी हो गई है। पटरियों की मरम्मत ठीक से न कराने की वजह से कनेरी गांव, कंसपुर, पहरवापुर के पास अक्सर खांदी हो जाती है। फसल बर्बाद हो जाती हैं। मुआवजा भी नहीं मिलता। लोकनाथ पांडेय ने बताया कि शासन से 11-11 सौ क्यूसेक पानी दोनों नहरों में छोडने का रोस्टर तय है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण इसके एवज में मात्र सात से आठ सौ क्यूसेक पानी मिल पाता है। टेल तक बड़ी नहरों, राजबहों, माइनरों में पानी नहीं पहुंच पाता है। इस मौके पर एसडीएम सुशील कुमार गोंड, सीओ अभिषेक तिवारी, तहसीलदार प्रमेश श्रीवास्तव भी रहे।
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बिंदकी। निचली गंगा नहर के अधिशासी अभिंयता वैभव सिंह व राम गंगा नहर के अभियंता महेंद्र सिंह से जब डीएम ने पूछा कि यह सब क्या सुन और देख रहे हैं? इस समय कितने क्यूसेक पानी चल रहा है? इसका जवाब दोनों अधिकारी नहीं दे सके। इस पर डीएम ने फटकार लगाते हुए कहा कि सभी नहरों, रजबहों, माइनरों में टेल तक पानी पहुंचना चाहिए वरना खैर नहीं।
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बिंदकी। जिलाधिकारी ने कहा कि नहरों, रजबहों, मइनरों के अंतर्गत आने वाले सभी किसानों को पानी मिले। इसके पहले पानी खांदी काटकर, फर्जी कुलाबों को लगाकर पानी के आगे बढने में अवरोध उत्पन्न करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी जिलेदार सुरेंद्र सिंह गौर, सींचपालो को देते हुए कहा कि ऐसी शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
- किसानों ने पोल खोली, बताई हकीकत
-जवाब नहीं दे सके अधिशासी अभिंयता