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जनपद के चार सौ ईंट भट्टों के संचालन पर संकट
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फतेहपुर। एनजीटी के एक फरमान से जिले के समस्त चार सौ ईंट भट्टों के संचालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। दरअसल ईंट भट्टों के संचालन के लिए पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र जारी का करने का अधिकार जिला स्तर पर समाप्त कर दिया गया है। अब एनजीटी के नए आदेश के मुताबिक संचालकों को शासन स्तर से इजाजत लेनी पड़ेगी। इसके बाद ही ईंटों की पथाई के लिए मिट्टी उपलब्ध हो सकेगी।
जिला खनन अधिकारी सौरभ गुप्ता ने बताया कि अभी तक ईंट-भट्टों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में ग्यारह सदस्यीय कमेटी बनी हुई थी। डीएम की अध्यक्षता में संचालित इस कमेटी में तीन भू वैज्ञानिक विशेषज्ञ के तौर पर, डीएफओ, स्वास्थ्य विभाग, खनन अधिकारी, उप जिलाधिकारी और
अधिशाषी अभियंता सिंचाई व जिला उद्यान अधिकारी सहित ग्यारह अधिकारियों की कमेटी क्लीयरेंस देती थी। अब एनजीटी के नए नियमों के मुताबिक इस कमेटी के अधिकारों को भंग करते हुए शासन स्तर की कमेटी को प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दे दिया गया है। पर्यावरण निदेशालय के सदस्य कमेटी का प्रमुख हिस्सा होंगे।
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अब इससे समस्या है कि प्रदेश स्तर पर बनी कमेटी को खनन के मामले में ही एक पट्टेधारक को ईसी देने में दो से तीन महीने का समय लग जाता है तो पूरे चार सौ भट्टों को ईसी जारी करने में तो महीनों बीत जाएंगे। तब तक भट्टों का एक सीजन बीत जाएगा और हर भट्टा मालिक को खासा बट्टा लगेगा। जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने इस संबंध में बताया कि ईसी जारी करने का विषय शासन में विचाराधीन है। शासन स्तर से ही इस संबंध में फैसला आने पर कुछ हो सकता है।
चार सौ ईंट-भट्टों के संचालन पर संकट
अब जिला स्तर पर पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा
अमर उजाला ब्यूरो
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जिला खनन अधिकारी सौरभ गुप्ता ने बताया कि अभी तक ईंट-भट्टों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में ग्यारह सदस्यीय कमेटी बनी हुई थी। डीएम की अध्यक्षता में संचालित इस कमेटी में तीन भू वैज्ञानिक विशेषज्ञ के तौर पर, डीएफओ, स्वास्थ्य विभाग, खनन अधिकारी, उप जिलाधिकारी और
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अधिशाषी अभियंता सिंचाई व जिला उद्यान अधिकारी सहित ग्यारह अधिकारियों की कमेटी क्लीयरेंस देती थी। अब एनजीटी के नए नियमों के मुताबिक इस कमेटी के अधिकारों को भंग करते हुए शासन स्तर की कमेटी को प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दे दिया गया है। पर्यावरण निदेशालय के सदस्य कमेटी का प्रमुख हिस्सा होंगे।
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अब इससे समस्या है कि प्रदेश स्तर पर बनी कमेटी को खनन के मामले में ही एक पट्टेधारक को ईसी देने में दो से तीन महीने का समय लग जाता है तो पूरे चार सौ भट्टों को ईसी जारी करने में तो महीनों बीत जाएंगे। तब तक भट्टों का एक सीजन बीत जाएगा और हर भट्टा मालिक को खासा बट्टा लगेगा। जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने इस संबंध में बताया कि ईसी जारी करने का विषय शासन में विचाराधीन है। शासन स्तर से ही इस संबंध में फैसला आने पर कुछ हो सकता है।
चार सौ ईंट-भट्टों के संचालन पर संकट
अब जिला स्तर पर पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा
अमर उजाला ब्यूरो