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ट्रामा सेंटर में धूल खा रही डिजिटल एक्सरे मशीन
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:20 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले में स्वास्थ्य सेवा मजाक बन कर रह गई है। जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन तो है लेकिन उसे चलाने वाला कोई नहीं। तर्क भी अजीब है कि इसे चलाने का किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। यहां से मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं।
यूपी हेल्थ सिस्टम स्टैंडिंग प्रोजेक्ट (यूपीएचएसएसपी) के अंतर्गत जिला अस्पताल को एक डिजिटल एक्सरे मशीन मिली है। प्रशिक्षित कर्मी न होने की वजह से मशीन शोपीस बनी है। हर दिन 40 से 50 रोगी लौट रहे हैं। प्रदेश सरकार 21 अस्पतालों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने जा रही है। जिसकी शुरुआत फतेहपुर से की गई है। जिला अस्पताल में एम्स की तर्ज पर आधुनिक एक्सरे मशीन तो आ गई लेकिन इसे चलाने के लिए एक्सरे टेक्नीशियन को प्रशिक्षण नहीं मिला है। स्थापना रिपोर्ट शासन के पास भेजने के बाद ही इसको चलाने के लिए प्रशिक्षण का पत्र भेजा गया था। सोमवार को ट्रामा सेंटर में डिजिटल एक्सरे कराने के लिए मरीज आए लेकिन यहां बंद ताला देखकर लौट गए।
हसवा से आए महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें सीने का डिजिटल एक्सरे कराना था लेकिन नहीं हो पाया। इसी प्रकार बहुआ की सुनीता, औंग के सोहन, वीरेंद्र आदि ने बताया कि हड्डी टूट गई थी जिसका एक्सरे कराना था लेकिन मशीन न चलने से बाहर एक्सरे कराना पड़ा।
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सीएमएस डा. हरगोविंद सिंह ने बताया कि शासन को पत्र भेजा है। इसी हफ्ते लखनऊ से ट्रेनरों की टीम आने की उम्मीद है।
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फतेहपुर। जिले में स्वास्थ्य सेवा मजाक बन कर रह गई है। जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन तो है लेकिन उसे चलाने वाला कोई नहीं। तर्क भी अजीब है कि इसे चलाने का किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। यहां से मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं।
यूपी हेल्थ सिस्टम स्टैंडिंग प्रोजेक्ट (यूपीएचएसएसपी) के अंतर्गत जिला अस्पताल को एक डिजिटल एक्सरे मशीन मिली है। प्रशिक्षित कर्मी न होने की वजह से मशीन शोपीस बनी है। हर दिन 40 से 50 रोगी लौट रहे हैं। प्रदेश सरकार 21 अस्पतालों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने जा रही है। जिसकी शुरुआत फतेहपुर से की गई है। जिला अस्पताल में एम्स की तर्ज पर आधुनिक एक्सरे मशीन तो आ गई लेकिन इसे चलाने के लिए एक्सरे टेक्नीशियन को प्रशिक्षण नहीं मिला है। स्थापना रिपोर्ट शासन के पास भेजने के बाद ही इसको चलाने के लिए प्रशिक्षण का पत्र भेजा गया था। सोमवार को ट्रामा सेंटर में डिजिटल एक्सरे कराने के लिए मरीज आए लेकिन यहां बंद ताला देखकर लौट गए।
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हसवा से आए महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें सीने का डिजिटल एक्सरे कराना था लेकिन नहीं हो पाया। इसी प्रकार बहुआ की सुनीता, औंग के सोहन, वीरेंद्र आदि ने बताया कि हड्डी टूट गई थी जिसका एक्सरे कराना था लेकिन मशीन न चलने से बाहर एक्सरे कराना पड़ा।
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सीएमएस डा. हरगोविंद सिंह ने बताया कि शासन को पत्र भेजा है। इसी हफ्ते लखनऊ से ट्रेनरों की टीम आने की उम्मीद है।