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नंदी गोशाला में दो मवेशियों की मौत

Fri, 08 Feb 2019 12:19 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 08 Feb 2019 12:19 AM IST
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नंदी गोशाला में दो मवेशियों की मौत
औंग। शिवराजपुर गांव के गिरधर गोपाल नंदी गोशाला में अव्यवस्था उजागर हुई है। बुधवार रात यहां दो मवेेशी मर गए। इससे पहले भी यहां मवेशी मर चुके हैं। मवेशियों को गोशाला में ही दफना दिया गया। पशुपालन टीम ने दो मवेशियों का पोस्टमार्टम किया। इसमें ठंड, झुंड के दबाव व चारे की दिक्कत को वजह माना गया।
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गोशाला में मवेशियों को सूखा पुआल व कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रखा गया है। सूखा पुआल व भूसा खाने से मवेशियों की सेहत बिगड़ती जा रही है। गोशाला में जंगली बबूल व देशी बबूल का जंगल है। उसी के बीच में मवेशी टहलते हैं। इन मवेशियों की देखरेख के लिए मनरेगा से पांच मजदूरों को रखा गया है। जो गोशाला में लगे पुआल को मैदान में फैला देते हैं और उसी को मवेशी खाते हैं। इलाकाई लोगों का कहना है कि इनकी जांच के लिए लगाई गई टीमें सिर्फ खानापूरी करती हैं। इससे मवेशियों की गोशाला में मौत हो रही है।
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औंग। गोशाला में पांच मजदूर हैं। यहां पर एक सैकड़ा गोवंश हैं। गुरुवार को गोशाला में मजदूर नरेंद्र कुमार, सरवन कुमार, राजू, पम्मू की ड्यूटी लगाई गई, लेकिन मौके पर सिर्फ नरेंद्र कुमार मिला। नरेंद्र कुमार ने बताया भूसा रखने के लिए छाया की कोई व्यवस्था नहीं है। नरेंद्र का कहना है कि मवेशी ज्यादा मर रहे हैं। बुधवार रात छह मवेशी मरे, लेकिन दो का ही पोस्टमार्टम हुआ।
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वर्जन
शिवराजपुर ग्राम प्रधान सुरिजपाल ने कहा कि गोशाला में टीन शेड का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें मनरेगा के मजदूर लगे हैं। दो दिन में तीन शेड का काम पूरा हो जाएगा। मवेशियों का पेट भरने के लिए भूसा और पुआल मुहैया कराया जा रहा है। चारा की कोई कमी नहीं है। ठंड व बीमारी से मवेशी मरे हैं।
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वर्जन
पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ. स्नेहलता ने बताया कि गोशाला के मवेशियों की रोज जांच की जाती है। जो मवेशी झाड़ी में रहते हैं। वहीं जांच से छूट जाते होंगे। गुरुवार को दो मवेशियों का पोस्टमार्टम किया गया है। इसमें झुंड के दबाव में आकर इनकी मौत हुई है। मवेशियों की मौत से पशुपालन विभाग से कोई लेनादेना नहीं है।

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वर्जन
साईं के पशुधन विकास अधिकारी डॉ संतोष शर्मा ने बताया कि पशु स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीम लगाई गई है। जो गोशाला में आने वाले घुमंतू मवेशियों की टैगिंग कर बध्याकरण किया जाता है। साथ में जांच करने के बाद इलाज भी किया जाता है। टैगिंग किए हुए मवेशी गोशाला के बाहर मिलते हैं तो इसकी जिम्मेदारी गोशाला में काम करने वाले मजदूरों की है।
नंदी गोशाला में दो मवेशियों की मौत
- पशु चिकित्सक ने कराया पोस्टमार्टम
अमर उजाला ब्यूरो
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