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धान बिक्री का भुगतान न होने से किसान परेशान
Updated Wed, 31 Jan 2018 11:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। क्रय केंद्रों में धान बेचने के बाद भी किसानों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे किसानों को परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। रबी की फसलों में उर्वरक व कीट नाशक दवाएं छिड़कने के लिए किसानों के पास रुपये नहीं हैं। फसल का भुगतान कराने के लिए किसान केंद्र प्रभारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
असोथर प्रतिनिधि के अनुसार कौंडर गांव के तीन किसानों ने एग्रो क्रय केंद्र में दो महीना पहले धान बेचा था। अभी तक धान का पैसा नहीं मिला है। किसान अंबर सिंह ने बताया कि ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद धान की तौल हुई थी। बैंक पासबुक, आधार कार्ड और खतौनी की फोटो कापी भी जमा की थी, लेकिन अभी तक खाते में रुपया नहीं आया है।
किसान गुड्डू सिंह ने बताया कि धान बिक्री का भुगतान कराने के लिए केंद्र प्रभारी के चक्कर लगा रहे हैं। एक-दो दिन कह कर केंद्र प्रभारी ने दो महीना टाल दिया है। धान की फसल तैयार करने में दुकान से उधार खाद ली थी। धान बेच कर रुपये देने का वादा किया था। अब तो दुकानदार ने भी उधारी मांगना शुरू कर दिया है। रुपये न मिलने की वजह से गेहूं की फसल में यूरिया का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं।
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अर्रा गांव के धरम सिंह ने बताया कि बच्चों के स्कूल की फीस कई महीने से नहीं जमा कर पाए हैं। धान बिक्री के रुपये मिले तो जमा करें। स्कूल से फीस जमा करने का मैसेज भी आ रहा है। परिवार के अन्य खर्च में भी परेशानी हो रही है।
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फतेहपुर। क्रय केंद्रों में धान बेचने के बाद भी किसानों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे किसानों को परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। रबी की फसलों में उर्वरक व कीट नाशक दवाएं छिड़कने के लिए किसानों के पास रुपये नहीं हैं। फसल का भुगतान कराने के लिए किसान केंद्र प्रभारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
असोथर प्रतिनिधि के अनुसार कौंडर गांव के तीन किसानों ने एग्रो क्रय केंद्र में दो महीना पहले धान बेचा था। अभी तक धान का पैसा नहीं मिला है। किसान अंबर सिंह ने बताया कि ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद धान की तौल हुई थी। बैंक पासबुक, आधार कार्ड और खतौनी की फोटो कापी भी जमा की थी, लेकिन अभी तक खाते में रुपया नहीं आया है।
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किसान गुड्डू सिंह ने बताया कि धान बिक्री का भुगतान कराने के लिए केंद्र प्रभारी के चक्कर लगा रहे हैं। एक-दो दिन कह कर केंद्र प्रभारी ने दो महीना टाल दिया है। धान की फसल तैयार करने में दुकान से उधार खाद ली थी। धान बेच कर रुपये देने का वादा किया था। अब तो दुकानदार ने भी उधारी मांगना शुरू कर दिया है। रुपये न मिलने की वजह से गेहूं की फसल में यूरिया का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं।
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अर्रा गांव के धरम सिंह ने बताया कि बच्चों के स्कूल की फीस कई महीने से नहीं जमा कर पाए हैं। धान बिक्री के रुपये मिले तो जमा करें। स्कूल से फीस जमा करने का मैसेज भी आ रहा है। परिवार के अन्य खर्च में भी परेशानी हो रही है।