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निवेशकों को चार करोड़ रुपये लेकर चिटफंड कंपनी फरार
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फतेहपुर। करीब आठ साल से नाम बदल कर जिले में सक्रिय रही एक चिटफंड कंपनी निवेशकों का लाखों रुपये हड़प कर भाग गई। कंपनी का नेटवर्क तीन राज्यों में होना बताया जा रहा है। परेशान एजेंट थाने, कोतवाली के चक्कर लगा कर हार गए। अब सोशल मीडिया के माध्यम से कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए अन्य एजेंटों को एकजुट कर रहे हैं।
बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के रारीबुजुर्ग गांव निवासी राजपाल प्रसाद चिटफंड कंपनी में एजेंट है। राजपाल ने बताया कि शहर के हरिहरगंज इलाके में चिटफंड कंपनी का दफ्तर 2011 से संचालित था। वह 2012 से कंपनी में कार्यरत था। कंपनी के संचालक दंपति ने 2013 में कंपनी का नाम बदल दिया। वह कंपनी का टीम लीडर था।
उसके व अन्य एजेंटों ने कई लोगों का कंपनी में निवेश कराया। निवेशकों में लोधीगंज के शिवनरायण यादव, हसवा के संतोष यादव,, कुंवरपुर के शमीम अहमद, राधानगर के जितेंद्र सिंह, अनिल पटेल, राधानगर के जय सिंह, कमलेश मौर्या, रेवाड़ी के सुघर सिंह यादव समेत कई लोग हैं। संचालक दंपति मूलरूप से रायबरेली जिले के हैं। उनका वर्तमान पता डालीगंज लखनऊ हैं। इनके खिलाफ एससपी से सीधे व 18 सितंबर 2018 को रजिस्ट्री के
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जरिए शिकायत की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद कोई कार्रवाई नहीं की। कंपनी के कार्यालय महाराष्ट्र, उत्तराखंड, यूपी में कई जगह हैं। पीड़ित का कहना है कि पुलिस के सुनवाई न करने पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर कंपनी से निवेशकों का डूबा रुपया निकालने का प्रयास किया जा रहा है। सभी जिलों के एजेंट एफआईआर के लिए कोर्ट की शरण में गए हैं। एसपी राहुल राज का कहना है कि अभी तक ऐसी शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी।
निवेशकों के लाखों हजम लेकर चिटफंड कंपनी फरार
पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप, एजेंटों ने सोशल मीडिया में छेड़ी मुहिम
अमर उजाला ब्यूरो
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बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के रारीबुजुर्ग गांव निवासी राजपाल प्रसाद चिटफंड कंपनी में एजेंट है। राजपाल ने बताया कि शहर के हरिहरगंज इलाके में चिटफंड कंपनी का दफ्तर 2011 से संचालित था। वह 2012 से कंपनी में कार्यरत था। कंपनी के संचालक दंपति ने 2013 में कंपनी का नाम बदल दिया। वह कंपनी का टीम लीडर था।
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उसके व अन्य एजेंटों ने कई लोगों का कंपनी में निवेश कराया। निवेशकों में लोधीगंज के शिवनरायण यादव, हसवा के संतोष यादव,, कुंवरपुर के शमीम अहमद, राधानगर के जितेंद्र सिंह, अनिल पटेल, राधानगर के जय सिंह, कमलेश मौर्या, रेवाड़ी के सुघर सिंह यादव समेत कई लोग हैं। संचालक दंपति मूलरूप से रायबरेली जिले के हैं। उनका वर्तमान पता डालीगंज लखनऊ हैं। इनके खिलाफ एससपी से सीधे व 18 सितंबर 2018 को रजिस्ट्री के
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जरिए शिकायत की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद कोई कार्रवाई नहीं की। कंपनी के कार्यालय महाराष्ट्र, उत्तराखंड, यूपी में कई जगह हैं। पीड़ित का कहना है कि पुलिस के सुनवाई न करने पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर कंपनी से निवेशकों का डूबा रुपया निकालने का प्रयास किया जा रहा है। सभी जिलों के एजेंट एफआईआर के लिए कोर्ट की शरण में गए हैं। एसपी राहुल राज का कहना है कि अभी तक ऐसी शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी।
निवेशकों के लाखों हजम लेकर चिटफंड कंपनी फरार
पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप, एजेंटों ने सोशल मीडिया में छेड़ी मुहिम
अमर उजाला ब्यूरो