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सहकारिता चुनाव से 400 दिग्गज होंगे बाहर
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:13 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। सहकारिता का चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गलियारोें में हलचल शुरू हो गई है। चुनाव में बदलाव से दिग्गजों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। इस बार लगातार दो बार अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य रहने वाले लोग चुनाव से बाहर किए जाएंगे। ऐसे में जिले के करीब 400 दिग्गजों को सहकारिता के बोर्ड से बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा।
सहकारिता के चुनाव में दिग्गजों को रोकने के लिए शासन ने पूर्ण विराम लगा दिया है। अगर कोई व्यक्ति लगातार दो बार से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य है तो इस बार वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा। इस नए नियम से कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सदस्यता के नियम में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। इस बार 121 रुपये की रसीद कटा कर कोई भी सदस्य बन सकता है। चुनाव मैदान में वही उतरेगा जो 45 दिन पहले सदस्य बना होगा।
अभी तक समिति से खरीदारी करने वाला व सहकारी बैंक का खाता धारक ही समिति का सदस्य माना जाता था। लोगों का मानना कि है कि सहकारिता चुनाव का बदलाव समिति के हित में होगा। अब कोई भी व्यक्ति सदस्य बन सकता है और चुनाव लड़ सकता है। अभी तक कुछ लोग ही अपना वर्चस्व कायम रखे हुए थे। जो अब संभव नहीं है। अन्य चुनाव की तरह सहकारिता चुनाव सभी की भागीदारी से होगा। प्रभारी एआर सीएल प्रजापति ने बताया कि दो बार पद पर रहने वाले लोग इस बार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। दो साल के बाद एक बार अंतराल जरूरी है।
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जिले के 106 समितियों का होना है चुनाव
जिले में कुल 106 समितियों का चुनाव होना है। इसमें 74 समितियां सहकारिता की हैं। 32 समितियां अन्य संस्थाओं की हैं। जो अपने सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाते हैं। प्रत्येक समिति से बैंक के लिए डेलीकेट चुने जाते हैं। वही कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ते हैं।
इस तरह होगा समिति का चुनाव
पहले साधन सहकारी समिति, किसान सेवा केंद्र व अन्य समितियों के चुनाव होंगे। इसमें समिति के सदस्य मतदान कर निदेशक चुनेंगे। फिर निदेशक मतदान कर सभापति (अध्यक्ष), उप सभापति (उपाध्यक्ष) चुनेंगे। इस तरह से प्रबंध समिति का गठन होगा। सहकारिता चुनाव का बिगुल बजने से राजनैतिक दलों के धुरंधर सक्रिय हो गए हैं।
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फतेहपुर। सहकारिता का चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गलियारोें में हलचल शुरू हो गई है। चुनाव में बदलाव से दिग्गजों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। इस बार लगातार दो बार अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य रहने वाले लोग चुनाव से बाहर किए जाएंगे। ऐसे में जिले के करीब 400 दिग्गजों को सहकारिता के बोर्ड से बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा।
सहकारिता के चुनाव में दिग्गजों को रोकने के लिए शासन ने पूर्ण विराम लगा दिया है। अगर कोई व्यक्ति लगातार दो बार से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य है तो इस बार वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा। इस नए नियम से कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सदस्यता के नियम में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। इस बार 121 रुपये की रसीद कटा कर कोई भी सदस्य बन सकता है। चुनाव मैदान में वही उतरेगा जो 45 दिन पहले सदस्य बना होगा।
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अभी तक समिति से खरीदारी करने वाला व सहकारी बैंक का खाता धारक ही समिति का सदस्य माना जाता था। लोगों का मानना कि है कि सहकारिता चुनाव का बदलाव समिति के हित में होगा। अब कोई भी व्यक्ति सदस्य बन सकता है और चुनाव लड़ सकता है। अभी तक कुछ लोग ही अपना वर्चस्व कायम रखे हुए थे। जो अब संभव नहीं है। अन्य चुनाव की तरह सहकारिता चुनाव सभी की भागीदारी से होगा। प्रभारी एआर सीएल प्रजापति ने बताया कि दो बार पद पर रहने वाले लोग इस बार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। दो साल के बाद एक बार अंतराल जरूरी है।
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जिले के 106 समितियों का होना है चुनाव
जिले में कुल 106 समितियों का चुनाव होना है। इसमें 74 समितियां सहकारिता की हैं। 32 समितियां अन्य संस्थाओं की हैं। जो अपने सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाते हैं। प्रत्येक समिति से बैंक के लिए डेलीकेट चुने जाते हैं। वही कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ते हैं।
इस तरह होगा समिति का चुनाव
पहले साधन सहकारी समिति, किसान सेवा केंद्र व अन्य समितियों के चुनाव होंगे। इसमें समिति के सदस्य मतदान कर निदेशक चुनेंगे। फिर निदेशक मतदान कर सभापति (अध्यक्ष), उप सभापति (उपाध्यक्ष) चुनेंगे। इस तरह से प्रबंध समिति का गठन होगा। सहकारिता चुनाव का बिगुल बजने से राजनैतिक दलों के धुरंधर सक्रिय हो गए हैं।