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योग से दूर भगाया दर्द और शुगर
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Mon, 20 Jun 2016 11:14 PM IST
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yoga camp organised on international yoga day
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शहर कोतवाली के मोहल्ला आवास विकास निवासी सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर टीएन मिश्र को गर्दन में दर्द और सुगर थी। वह कानपुर के सभी बड़े डॉक्टरों को दिखाने के बाद दिल्ली में एम्स और लखनऊ में पीजीआई तक इलाज करा आए लेकिन दोनों बीमारी ठीक नहीं हुई।
चार साल पहले बाबा रामदेव के योग शिविर में गए। वहां से उनका जीवन बदल गया। गर्दन में दर्द से राहत तो मिली ही सुगर (डायबिटीज) भी ठीक हो गई। उनका दावा है कि वह अब कोई दवा नहीं खाते हैं। अब योग उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है
।
आनंद भैरव तंत्र के अनुसार योग का शुभारंभ भगवान शंकर ने सबसे पहले किया। उन्होंने पार्वती को योग की 112 विधियां बताईं। उन विधियों को पतंजलि ने सरल ढंग से लोगों तक पहुंचाया। ओशो ने ध्यान और योग को जोड़कर इन विधियों से हजारों साधकों की बीमारियों को दूर किया।
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मौजूदा समय में बाबा रामदेव विश्व भर में योग का डंका बजा रहे हैं। टीएन मिश्र का कहना है कि गर्दन में दर्द और डायबिटीज का इलाज कानपुर में के सभी बड़े अस्पतालों में कराया। जब यहां ठीक नहीं हुआ तो लखनऊ पीजीआई गए। फिर दिल्ली में एम्स के बड़े डॉक्टरों को दिखाया लेकिन दोनों बीमारी में कोई राहत नहीं मिली।
उन्होंने बताया कि चार साल पहले वह बाबा रामदेव की शरण में पहुंचे। योग करने के बाद उन्हें अपने गर्दन के दर्द में राहत मिली और जब योग को अपने जीवन में पूरी तरह से उतार लिया तो दोनों बीमारी ठीक हो गई। वह हर दिन एक घंटा योग करते हैं। उनका दावा है कि उन्हें अब न दवा की जरूरत है और न डॉक्टर की।
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चार साल पहले बाबा रामदेव के योग शिविर में गए। वहां से उनका जीवन बदल गया। गर्दन में दर्द से राहत तो मिली ही सुगर (डायबिटीज) भी ठीक हो गई। उनका दावा है कि वह अब कोई दवा नहीं खाते हैं। अब योग उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है
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आनंद भैरव तंत्र के अनुसार योग का शुभारंभ भगवान शंकर ने सबसे पहले किया। उन्होंने पार्वती को योग की 112 विधियां बताईं। उन विधियों को पतंजलि ने सरल ढंग से लोगों तक पहुंचाया। ओशो ने ध्यान और योग को जोड़कर इन विधियों से हजारों साधकों की बीमारियों को दूर किया।
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मौजूदा समय में बाबा रामदेव विश्व भर में योग का डंका बजा रहे हैं। टीएन मिश्र का कहना है कि गर्दन में दर्द और डायबिटीज का इलाज कानपुर में के सभी बड़े अस्पतालों में कराया। जब यहां ठीक नहीं हुआ तो लखनऊ पीजीआई गए। फिर दिल्ली में एम्स के बड़े डॉक्टरों को दिखाया लेकिन दोनों बीमारी में कोई राहत नहीं मिली।
उन्होंने बताया कि चार साल पहले वह बाबा रामदेव की शरण में पहुंचे। योग करने के बाद उन्हें अपने गर्दन के दर्द में राहत मिली और जब योग को अपने जीवन में पूरी तरह से उतार लिया तो दोनों बीमारी ठीक हो गई। वह हर दिन एक घंटा योग करते हैं। उनका दावा है कि उन्हें अब न दवा की जरूरत है और न डॉक्टर की।