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Farrukhabad News: माता के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा, तप-त्याग की मिली प्रेरणा
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फर्रुखाबाद। नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी। मां के जयकारों से मंदिर गूंज उठे। महिलाओं ने मंदिरों में संकीर्तन कर माता से मनौती मांगी।
शहर के देवी मंदिरों में प्रसिद्ध बढ़पुर शीतला माता मंदिर, संकटा माता मंदिर, गुरुगांव मंगला माता मंदिर में सुबह पांच बजे से ही माता के भक्तों की भीड़ पहुंचने लगी। गुरुगांव देवी मंदिर परिसर में मेला भी लगाया गया। दिन भर भक्त खरीदारी करते रहे। मां को शक्कर का भोग लगाकर आयु और यश की कामना की।
पं. कपिध्वज मिश्र ने बताया कि ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके हाथों में जप की माला और कमंडल रहता है। यह स्वरूप भक्तों को अनंत फल देने वाला है। इनकी पूजा से भक्तों को तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। आचार्य सत्यव्रत पांडेय ने कहा कि मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।
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शहर के देवी मंदिरों में प्रसिद्ध बढ़पुर शीतला माता मंदिर, संकटा माता मंदिर, गुरुगांव मंगला माता मंदिर में सुबह पांच बजे से ही माता के भक्तों की भीड़ पहुंचने लगी। गुरुगांव देवी मंदिर परिसर में मेला भी लगाया गया। दिन भर भक्त खरीदारी करते रहे। मां को शक्कर का भोग लगाकर आयु और यश की कामना की।
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पं. कपिध्वज मिश्र ने बताया कि ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके हाथों में जप की माला और कमंडल रहता है। यह स्वरूप भक्तों को अनंत फल देने वाला है। इनकी पूजा से भक्तों को तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। आचार्य सत्यव्रत पांडेय ने कहा कि मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।
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