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Farrukhabad News: रस्सी से बंधी खिड़कियां, सात खटारा एंबुलेंस ढो रहीं मरीज
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फर्रुखाबाद। एंबुलेंस की खिड़कियां रस्सी से बंधी हैं। डीजल टैंक से लॉक गायब है, उसकी जगह प्लास्टिक की बोतल लगी दी गई है। खटारा हो चुकी इन एंबुलेंसों से मरीजों को ढोया जा रहा है। आए दिन होने वाली खराबी से कई एंबुलेंस ऑफ रोड भी हो जाती हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
लोहिया जिला अस्पताल, लिंजीगंज सिविल अस्पताल और सात सीएचसी पर 108 की 22 और 102 नंबर की 21 एंबुलेंस हैं। इनमें से सात एंबुलेंस ऐसी हैं, जो आए दिन खराब हो जाती हैं। इसके बावजूद इन एंबुलेंस को मरीज ढोने के काम में लिया जा रहा है। कई एंबुलेंसों की खिड़कियां टूटी हैं। इन खिड़कियों को इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) और चालक रस्सी से बांध देते हैं। हालत यह है कि मरीज को चढ़ाने के बाद एंबुलेंस स्टाफ खिड़की को रस्सी से बांध देता है। जब मरीज को उतारते हैं, तब रस्सी खोल दी जाती है।
शुक्रवार सुबह लोहिया अस्पताल में मरीज लेकर पहुंची एक एंबुलेंस की खिड़की ही रस्सी से नहीं बंधी थी, बल्कि डीजल टैंक का लॉक गायब होने पर उसमें प्लास्टिक की बोतल लगा दी गई थी। इस एंबुलेंस का खुला बोनट आवाज कर रहा था।
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इसके साथ सात अन्य एंबुलेंस की हालत बेहद खराब है। ये अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुकी हैं। चालक उन्हें काफी धीमी गति से चलाते हैं। इससे मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं। एंबुलेंस संचालक कंपनी के जिला प्रभारी (ईएमई) पवन कुमार ने बताया कि सात-आठ माह पहले यहां 19 एंबुलेंस नई आई थीं। उस समय से सात एंबुलेंस की हालत ठीक नहीं है। समय-समय पर डाटा सरकार को भेजा जाता है। एंबुलेंस मिलते ही पुरानी हटवा दी जाएंगी। मजबूरी में काम चलाया जा रहा है।
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लोहिया जिला अस्पताल, लिंजीगंज सिविल अस्पताल और सात सीएचसी पर 108 की 22 और 102 नंबर की 21 एंबुलेंस हैं। इनमें से सात एंबुलेंस ऐसी हैं, जो आए दिन खराब हो जाती हैं। इसके बावजूद इन एंबुलेंस को मरीज ढोने के काम में लिया जा रहा है। कई एंबुलेंसों की खिड़कियां टूटी हैं। इन खिड़कियों को इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) और चालक रस्सी से बांध देते हैं। हालत यह है कि मरीज को चढ़ाने के बाद एंबुलेंस स्टाफ खिड़की को रस्सी से बांध देता है। जब मरीज को उतारते हैं, तब रस्सी खोल दी जाती है।
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शुक्रवार सुबह लोहिया अस्पताल में मरीज लेकर पहुंची एक एंबुलेंस की खिड़की ही रस्सी से नहीं बंधी थी, बल्कि डीजल टैंक का लॉक गायब होने पर उसमें प्लास्टिक की बोतल लगा दी गई थी। इस एंबुलेंस का खुला बोनट आवाज कर रहा था।
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इसके साथ सात अन्य एंबुलेंस की हालत बेहद खराब है। ये अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुकी हैं। चालक उन्हें काफी धीमी गति से चलाते हैं। इससे मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं। एंबुलेंस संचालक कंपनी के जिला प्रभारी (ईएमई) पवन कुमार ने बताया कि सात-आठ माह पहले यहां 19 एंबुलेंस नई आई थीं। उस समय से सात एंबुलेंस की हालत ठीक नहीं है। समय-समय पर डाटा सरकार को भेजा जाता है। एंबुलेंस मिलते ही पुरानी हटवा दी जाएंगी। मजबूरी में काम चलाया जा रहा है।