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Farrukhabad News: बस की चपेट में आने से बाइक सवार दो किसानों की मौत
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फर्रुखाबाद। बरेली-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चाचूपुर के पास एक तेज रफ्तार स्लीपर बस की चपेट में आने से बाइक सवार दो किसानों की मौत हो गई। एक घायल को लोहिया अस्पताल लाया गया, वहां कुछ देर इलाज के बाद सांसें थम गईं। दो लोगों की मौत के बाद परिजनों में चीख-पुकार मची रही। पुलिस ने बस को कब्जा में ले लिया है।
राजेपुर थाना क्षेत्र के गांव चाचूपुर के मजरा आशाराम की मड़ैया निवासी सोबरन (40) और तीसराम की मड़ैया निवासी अलवर (46) की बाइक से खेतों से बंधा की ओर आ रहे थे। बरेली-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भुड्डन की मड़ैया के सामने बाइक दिल्ली जा रही तेज रफ्तार स्लीपर बस की चपेट में आ गई। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को लोहिया अस्पताल लाया गया, जहां सोबरन को मृत घोषित कर दिया, जबकि अलवर ने कुछ देर इलाज के बाद दम तोड़ दिया। सोबरन दो भाइयों में छोटे थे। बड़े भाई मेवाराम, पत्नी रामदेवी, पुत्र जितेंद्र, निर्देश, सुरजीत व कन्हैया हैं। अलवर पांच भाइयों में तीसरे नंबर के थे। ब़़ड़े भाई राजू और पत्नी की मौत हो चुकी है। भाई विजय, वीरेंद्र, नरवीर, पुत्र पिंटू, रिंकू, सीलू, मिलन, अमन व बेटी संगम का रो-रो कर बुरा हाल है। शव मोरचरी में रखवा दिए गए हैं।
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ग्रामीणों ने जबरन रोक ली थी एंबुलेंस
राजेपुर की ओर से मरीज छोड़ने के बाद शहर आ रही एक एंबुलेंस को दुर्घटनास्थल पर लगी ग्रामीणों की भीड़ ने रोक लिया। एंबुलेंस चालक और ईएमटी ने घायल अलवर का जीवन बचाने की मंशा से बिना कुछ देर किए उसे एंबुलेंस में रखवा लिया। लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान करीब आधा घंटे बाद ही उसकी भी सांसें थम गईं।
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हेलमेट लगाते तो बच सकती थी जान
बाइक सवार दोनों किसानों की मौत के बाद बताया गया कि बाइक सोबरन चला रहा था। दोनों के सिर में गंभीर चोट होने की वजह से मौत हुई है। सोबरन हेलमेट नहीं लगाए था। यदि हेलमेट लगाए होता, तो सिर को बचाया जा सकता था, लिहाजा जीवन बचने की अधिक उम्मीद थी।
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राजेपुर थाना क्षेत्र के गांव चाचूपुर के मजरा आशाराम की मड़ैया निवासी सोबरन (40) और तीसराम की मड़ैया निवासी अलवर (46) की बाइक से खेतों से बंधा की ओर आ रहे थे। बरेली-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भुड्डन की मड़ैया के सामने बाइक दिल्ली जा रही तेज रफ्तार स्लीपर बस की चपेट में आ गई। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को लोहिया अस्पताल लाया गया, जहां सोबरन को मृत घोषित कर दिया, जबकि अलवर ने कुछ देर इलाज के बाद दम तोड़ दिया। सोबरन दो भाइयों में छोटे थे। बड़े भाई मेवाराम, पत्नी रामदेवी, पुत्र जितेंद्र, निर्देश, सुरजीत व कन्हैया हैं। अलवर पांच भाइयों में तीसरे नंबर के थे। ब़़ड़े भाई राजू और पत्नी की मौत हो चुकी है। भाई विजय, वीरेंद्र, नरवीर, पुत्र पिंटू, रिंकू, सीलू, मिलन, अमन व बेटी संगम का रो-रो कर बुरा हाल है। शव मोरचरी में रखवा दिए गए हैं।
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ग्रामीणों ने जबरन रोक ली थी एंबुलेंस
राजेपुर की ओर से मरीज छोड़ने के बाद शहर आ रही एक एंबुलेंस को दुर्घटनास्थल पर लगी ग्रामीणों की भीड़ ने रोक लिया। एंबुलेंस चालक और ईएमटी ने घायल अलवर का जीवन बचाने की मंशा से बिना कुछ देर किए उसे एंबुलेंस में रखवा लिया। लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान करीब आधा घंटे बाद ही उसकी भी सांसें थम गईं।
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हेलमेट लगाते तो बच सकती थी जान
बाइक सवार दोनों किसानों की मौत के बाद बताया गया कि बाइक सोबरन चला रहा था। दोनों के सिर में गंभीर चोट होने की वजह से मौत हुई है। सोबरन हेलमेट नहीं लगाए था। यदि हेलमेट लगाए होता, तो सिर को बचाया जा सकता था, लिहाजा जीवन बचने की अधिक उम्मीद थी।