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इन्फैंट्री डे पर शहीदों को श्रद्धांजलि
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 27 Oct 2017 11:58 PM IST
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शहीदों को श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद। शहीदों को श्रद्धांजलि देनेे के साथ ही राजपूत रेजीमेंट सेंटर में इन्फैंट्री डे मनाया गया। इन्फैंट्री डे की 70वीं वर्षगांठ पर ब्रिगेडियर सहित अधिकारियों और पूर्व सैनिकों ने शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र चढ़ाए।
शुक्रवार को भारतीय सेना ने इन्फैंट्री डे पर शहीदों को याद किया। राजपूत रेजीमेंट सेंटर के करियप्पा मैदान पर स्थित शहीद स्मारक को फूलों से सजाया गया। सेंटर कमांडेंट ब्रिगेडियर टेकचंद्र मल्होत्रा ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र चढ़ाया। सेंटर सूबेदार मेेेजर प्रताप सिंह भाटी ने सभी अधिकारियों और रिटायर्ड कैप्टन उदयराज ने पूर्व सैनिकों की ओर से शहीदों को नमन किया।
जवानों की टोली ने शस्त्र झुकाकर शहीदों को सलामी दी तो वहीं विगुल पर मातमी धुन बजाई गई। स्मारक पर मौजूद अधिकारियों ने सीमा पर शहीद हुए जांबाजों को दो मिनट मौन रखकर याद किया। इस मौके पर कर्नल संदीप जसवाल, एडज्यूटेंट मेजर रूपक ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल शाजी थामस, लेफ्टिनेंट कर्नल पंकज शर्मा, मेजर केके बाजपेई, सूबेदार मेजर हरपाल सिह, बाबूू लाल आदि मौजूद रहे।
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क्यों मनाते हैं इन्फैंट्री डे
ट्रेनिंग बटालियन कमांडर कर्नल नवीन शर्मा ने बताया कि देश की आजादी के बाद हुई 1947 में पहली जंग में उतरी इन्फैंट्री ने पाकिस्तानियों के दांत खट्टे कर श्रीनगर को भारत से अलग करने के मंसूबों पर पानी फेर दिया। आजादी के बाद कश्मीर के राजा हरी सिंह के अनुरोध पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के निर्देश पर 26 अक्तूबर1947 को कश्मीर के भारत विलय संधि के बाद 27 अक्तूबर को दिल्ली से प्रथम सिख रेजीमेंट को वायु मार्ग से श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतारा गया। इसी के उपलक्ष्य में सेना हर वर्ष इन्फैंट्री डे मनाती है।
मेजर सोमनाथ शर्मा को मिला था पहला परमवीर चक्र
27 अक्तूबर 1947 से शुरू हुए युद्ध में अद्वितीय साहस का प्रदर्शन करते हुए 4 कुमायूं रेजीमेंट के मेेजर सोमनाथ शर्मा को आजाद भारत का पहला परमवीर चक्र मरणोपरांत दिया गया।
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शुक्रवार को भारतीय सेना ने इन्फैंट्री डे पर शहीदों को याद किया। राजपूत रेजीमेंट सेंटर के करियप्पा मैदान पर स्थित शहीद स्मारक को फूलों से सजाया गया। सेंटर कमांडेंट ब्रिगेडियर टेकचंद्र मल्होत्रा ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र चढ़ाया। सेंटर सूबेदार मेेेजर प्रताप सिंह भाटी ने सभी अधिकारियों और रिटायर्ड कैप्टन उदयराज ने पूर्व सैनिकों की ओर से शहीदों को नमन किया।
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जवानों की टोली ने शस्त्र झुकाकर शहीदों को सलामी दी तो वहीं विगुल पर मातमी धुन बजाई गई। स्मारक पर मौजूद अधिकारियों ने सीमा पर शहीद हुए जांबाजों को दो मिनट मौन रखकर याद किया। इस मौके पर कर्नल संदीप जसवाल, एडज्यूटेंट मेजर रूपक ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल शाजी थामस, लेफ्टिनेंट कर्नल पंकज शर्मा, मेजर केके बाजपेई, सूबेदार मेजर हरपाल सिह, बाबूू लाल आदि मौजूद रहे।
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क्यों मनाते हैं इन्फैंट्री डे
ट्रेनिंग बटालियन कमांडर कर्नल नवीन शर्मा ने बताया कि देश की आजादी के बाद हुई 1947 में पहली जंग में उतरी इन्फैंट्री ने पाकिस्तानियों के दांत खट्टे कर श्रीनगर को भारत से अलग करने के मंसूबों पर पानी फेर दिया। आजादी के बाद कश्मीर के राजा हरी सिंह के अनुरोध पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के निर्देश पर 26 अक्तूबर1947 को कश्मीर के भारत विलय संधि के बाद 27 अक्तूबर को दिल्ली से प्रथम सिख रेजीमेंट को वायु मार्ग से श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतारा गया। इसी के उपलक्ष्य में सेना हर वर्ष इन्फैंट्री डे मनाती है।
मेजर सोमनाथ शर्मा को मिला था पहला परमवीर चक्र
27 अक्तूबर 1947 से शुरू हुए युद्ध में अद्वितीय साहस का प्रदर्शन करते हुए 4 कुमायूं रेजीमेंट के मेेजर सोमनाथ शर्मा को आजाद भारत का पहला परमवीर चक्र मरणोपरांत दिया गया।