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बस में सफर को बेवश यात्नी, करनी पड़ी धक्का-मुक्की
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शहर के रोडवेज बस स्टेशन पर खिड़की से बस में चढ़ता यात्री।
- फोटो : FARRUKHABAD
बस में सफर की जल्दी, कोरोना की अनदेखी
फर्रुखाबाद। संक्रमण काल में बनाए गए नियम रोडवेज बस स्टैंड पर तार-तार हो रहे हैं। बेशुमार भीड़ और बसों का टोटा यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बना है। सोमवार को सुबह 11 बजे जब दो घंटे बाद हरदोई की बस पहुंची, तो बस में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच धक्कामुक्की होने लगी। पहले चढ़ने के चक्कर में महिलाओं संग बच्चे भी बीच में फंस गए।
हद तो यह हो गई कि कुछ युवा सीट पर कब्जा करने को खिड़कियों से ही घुस गए। कुछ ही मिनट में बस में पैर रखने को जगह न रही, जबकि दो बसों के यात्री जमीन पर भीषण गर्मी में परेशान खड़े रहे। इस दौरान न तो सोशल डिस्टेंस का पालन दिखा और न ही कोरोना का भय। और तो और वहां रोकने टोकने वाले न तो रोडवेज के लोग थे और न ही पुलिस।
‘हां बसों की कुछ कमी महसूस की जाने लगी है। यदि कुछ दिन और यात्रियों का इसी तरह दबाव बना रहा, तो शासन स्तर से सरेंडर की गईं बसें वापस लेने का फैसला आ जाएगा। जैसे ही निर्देश मिलेंगे, वह खड़ी बसों को भी चालू कर देंगे।’
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- आरसी यादव, एआरएम, फर्रुखाबाद।
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फर्रुखाबाद। संक्रमण काल में बनाए गए नियम रोडवेज बस स्टैंड पर तार-तार हो रहे हैं। बेशुमार भीड़ और बसों का टोटा यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बना है। सोमवार को सुबह 11 बजे जब दो घंटे बाद हरदोई की बस पहुंची, तो बस में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच धक्कामुक्की होने लगी। पहले चढ़ने के चक्कर में महिलाओं संग बच्चे भी बीच में फंस गए।
हद तो यह हो गई कि कुछ युवा सीट पर कब्जा करने को खिड़कियों से ही घुस गए। कुछ ही मिनट में बस में पैर रखने को जगह न रही, जबकि दो बसों के यात्री जमीन पर भीषण गर्मी में परेशान खड़े रहे। इस दौरान न तो सोशल डिस्टेंस का पालन दिखा और न ही कोरोना का भय। और तो और वहां रोकने टोकने वाले न तो रोडवेज के लोग थे और न ही पुलिस।
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‘हां बसों की कुछ कमी महसूस की जाने लगी है। यदि कुछ दिन और यात्रियों का इसी तरह दबाव बना रहा, तो शासन स्तर से सरेंडर की गईं बसें वापस लेने का फैसला आ जाएगा। जैसे ही निर्देश मिलेंगे, वह खड़ी बसों को भी चालू कर देंगे।’
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- आरसी यादव, एआरएम, फर्रुखाबाद।