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सीसीटीवी कैमरे में खेल करने वाले परीक्षा केंद्र नकल कराने के आरोपी होंगे
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फर्रुखाबाद। 28 फरवरी से होने वली विश्वविद्यालय परीक्षा में नकल रोकने के उपायों में कुछ कालेज सहयोग नहीं दे रहे हैं। इस संबंध में कुलपति द्वारा महाविद्यालयों के प्राचार्यों को भेजे गए कड़े पत्र से नकल का खेल करने वाले प्रबंधक-प्राचार्यों में खलबली मच गई है।
पत्र में कहा गया है कि परीक्षाकाल में सीसीटीवी कैमरे बंद पाए जाने वाले व उनकी कनेक्टिविटी विश्वविद्यालय से स्थापित न होने वाले परीक्षा केंद्रों को नकल में आरोपी बनाए जाएंगे। विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाएं 28 फरवरी से तीन पालियों में शुरू होनी हैं। इस संबंध में कुलपति विनय कुमार पाठक की ओर से कॉलेज प्राचार्यों को मिले पत्र में कहा गया है कि परीक्षाओं में ई-सर्विलांस का अधिकाधिक प्रयोग करते हुए महाविद्यालय में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग विश्वविद्यालय द्वारा की जानी है।
इसके लिए कई दिन से तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा महाविद्यालयों में स्थापित कैमरों की जांच का कार्य किया जा रहा है। कमियों को दूर करने के लिए कालेजों को लगातार सूचित किया जा रहा है। लेकिन कुछ कालेज अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं। इससे परीक्षा के समय मानीटरिंग में दिक्कत आ सकती है। कैमरे बंद पाए जाने व विश्वविद्यालय से उनकी कनेक्टिविटी स्थापित न हो पाने की दशा में संबंधित परीक्षा केंद्र को यूएफएम की श्रेणी के अंतर्गत किए जाने को विश्वविद्यालय को बाध्य होना पड़ेगा।
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पत्र में कहा गया है कि परीक्षाकाल में सीसीटीवी कैमरे बंद पाए जाने वाले व उनकी कनेक्टिविटी विश्वविद्यालय से स्थापित न होने वाले परीक्षा केंद्रों को नकल में आरोपी बनाए जाएंगे। विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाएं 28 फरवरी से तीन पालियों में शुरू होनी हैं। इस संबंध में कुलपति विनय कुमार पाठक की ओर से कॉलेज प्राचार्यों को मिले पत्र में कहा गया है कि परीक्षाओं में ई-सर्विलांस का अधिकाधिक प्रयोग करते हुए महाविद्यालय में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग विश्वविद्यालय द्वारा की जानी है।
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इसके लिए कई दिन से तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा महाविद्यालयों में स्थापित कैमरों की जांच का कार्य किया जा रहा है। कमियों को दूर करने के लिए कालेजों को लगातार सूचित किया जा रहा है। लेकिन कुछ कालेज अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं। इससे परीक्षा के समय मानीटरिंग में दिक्कत आ सकती है। कैमरे बंद पाए जाने व विश्वविद्यालय से उनकी कनेक्टिविटी स्थापित न हो पाने की दशा में संबंधित परीक्षा केंद्र को यूएफएम की श्रेणी के अंतर्गत किए जाने को विश्वविद्यालय को बाध्य होना पड़ेगा।
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