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22 हजार पौधे लगे नहीं, हजारों पौधे सूखे
ब्यूरो अमर उजाला फर्रुखाबाद।
Updated Wed, 25 Nov 2015 12:27 AM IST
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ग्राम सभा चंद्रपुर आट स्थित कटरी क्षेत्र में 75 हेक्टेयर भूमि पर लगने आए पौधों में से 22 हजार पौधे अभी तक लगाए ही नहीं गए हैं, जो पौधे लगाए गए और जो लगने के लिए रखे हैं, उनमें से अधिकतर पौधे सूखने लगे हैं।
एक हजार सूखे पौधे तो कूड़े के ढेर में डाल दिए गए हैं। इससे नौकरशाह द्वारा प्रदेश सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर पानी फेरने का काम किया जा रहा है। वहीं जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं और लाखों रुपये के पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।
सात नवंबर को डीएम सत्येंद्र सिंह की देखरेख में प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत कटरी क्षेत्र में 82,500 पौधे लगने को आए थे। इनमें शीशम, जामुन, अर्जुन, पाकड़, बरगद, कनकचंपा और बालमखीरा आदि 50 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। 22 हजार पौधों को अभी तक नहीं लगाया जा सका है।
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देखरेख के अभाव में अधिकतर पौधे सूखने लगे हैं। साथ ही लगाए गए पौधों में से पांच हजार पौधे सूख गए हैं, जो पौधे लगने हैं, उनमें से एक हजार सूखे पौधे तो कूड़े के ढेर में डाल दिए गए हैं।
हालांकि जिला प्रशासन ने पौधों की सिंचाई को छह पंपिंग सेट लगवाए और इनमें ठेके पर 18 ग्रामीणों की ड्यूटी लगा रखी है। इसके बावजूद देखरेख के अभाव में अधिकतर पौधे सूख रहे हैं। वहीं 22 हजार पौधों को अभी तक लगाया नहीं जा सका है।
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एक हजार सूखे पौधे तो कूड़े के ढेर में डाल दिए गए हैं। इससे नौकरशाह द्वारा प्रदेश सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर पानी फेरने का काम किया जा रहा है। वहीं जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं और लाखों रुपये के पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।
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सात नवंबर को डीएम सत्येंद्र सिंह की देखरेख में प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत कटरी क्षेत्र में 82,500 पौधे लगने को आए थे। इनमें शीशम, जामुन, अर्जुन, पाकड़, बरगद, कनकचंपा और बालमखीरा आदि 50 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। 22 हजार पौधों को अभी तक नहीं लगाया जा सका है।
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देखरेख के अभाव में अधिकतर पौधे सूखने लगे हैं। साथ ही लगाए गए पौधों में से पांच हजार पौधे सूख गए हैं, जो पौधे लगने हैं, उनमें से एक हजार सूखे पौधे तो कूड़े के ढेर में डाल दिए गए हैं।
हालांकि जिला प्रशासन ने पौधों की सिंचाई को छह पंपिंग सेट लगवाए और इनमें ठेके पर 18 ग्रामीणों की ड्यूटी लगा रखी है। इसके बावजूद देखरेख के अभाव में अधिकतर पौधे सूख रहे हैं। वहीं 22 हजार पौधों को अभी तक लगाया नहीं जा सका है।