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गंगा में डूबे भाइयों का दूसरे दिन भी नहीं लगा पता
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गंगा में डूबे भाइयों का दूसरे दिन भी सुराग नहीं
फर्रुखाबाद। चचेरी बहन के शव का जलप्रवाह करते समय डूबे दो सगे भाइयों का दूसरे दिन भी पता नहीं चल सका। प्रशासन के निर्देश पर पांच मोटर बोट दिन भर खोजबीन में लगी रहीं। मगरमच्छ के भय से गोताखोर ज्यादा गहरे में घुसने को तैयार नहीं हैं।
मऊदरवाजा थाने के गांव हंसी नगला के हरेंद्र (28), बिजेंद्र (26) पुत्रगण स्व. रामवीर यादव शुक्रवार को चचेरी बहन के शव का जल प्रवाह करने पंखियों की मड़ैया स्थित कुबेरपुर घाट पर गए थे। वहां नाव पलटने से कुल छह लोग डूब गए थे। इनमें से नाविक ने चार को बचा लिया था जबकि हरेंद्र और बिजेंद्र गंगा में समा गए।
एसडीएम सदर अनिल कुमार के निर्देश पर शनिवार सुबह नौ बजे पांच मोटर बोट पहुंची। उन्होंने गंगा में खोजबीन शुरू की मगर शाम तक नाकामी ही हाथ लगी। सुबह से गंगा तट पर कोई भी अधिकारी जायजा लेने नहीं पहुंचा। कुछ देर के लिए कानूनगो और लेखपाल पहुंचे। दरोगा सद्दाम हुसैन पूरे दिन खोज कराते रहे। परिजन गंगा के तट पर बिलखते रहे। भाई सुरेंद्र सिंह यादव बोले, मेरे आंखों के सामने ही भाई गंगा में समा गए। ये कहकर रोने लगे।
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पूर्व प्रधान शाहिद अली ने काफी मान मनौव्वल करके गांव के ही गोताखोर याकूब और नवाब को गंगा में उतारा। दोनों कई घंटे तक भाइयों को खोजते रहे। वह भी मगरमच्छ के भय से अधिक गहराई में नहीं गए। जिस नाव में यह लोग सवार थे वह भी गंगा में समा गई है। नाव पूर्व प्रधान शाहिद अली की थी। उन्होंने कुछ महीने पहले ही नई बनवाई थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सुरेंद्र सिंह की मां रामसती का दो अक्तूबर को तेरहवीं संस्कार है। उनके चाचा रामनिवास की बेटी लक्ष्मी की शुक्रवार की सुबह मौत हो गई थी। लक्ष्मी की अंत्येष्टि के दौरान ही दो भाइयों के गंगा में समा जाने से चार-चार दुख परिवार पर आठ दिन में पड़े हैं।
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फर्रुखाबाद। चचेरी बहन के शव का जलप्रवाह करते समय डूबे दो सगे भाइयों का दूसरे दिन भी पता नहीं चल सका। प्रशासन के निर्देश पर पांच मोटर बोट दिन भर खोजबीन में लगी रहीं। मगरमच्छ के भय से गोताखोर ज्यादा गहरे में घुसने को तैयार नहीं हैं।
मऊदरवाजा थाने के गांव हंसी नगला के हरेंद्र (28), बिजेंद्र (26) पुत्रगण स्व. रामवीर यादव शुक्रवार को चचेरी बहन के शव का जल प्रवाह करने पंखियों की मड़ैया स्थित कुबेरपुर घाट पर गए थे। वहां नाव पलटने से कुल छह लोग डूब गए थे। इनमें से नाविक ने चार को बचा लिया था जबकि हरेंद्र और बिजेंद्र गंगा में समा गए।
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एसडीएम सदर अनिल कुमार के निर्देश पर शनिवार सुबह नौ बजे पांच मोटर बोट पहुंची। उन्होंने गंगा में खोजबीन शुरू की मगर शाम तक नाकामी ही हाथ लगी। सुबह से गंगा तट पर कोई भी अधिकारी जायजा लेने नहीं पहुंचा। कुछ देर के लिए कानूनगो और लेखपाल पहुंचे। दरोगा सद्दाम हुसैन पूरे दिन खोज कराते रहे। परिजन गंगा के तट पर बिलखते रहे। भाई सुरेंद्र सिंह यादव बोले, मेरे आंखों के सामने ही भाई गंगा में समा गए। ये कहकर रोने लगे।
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पूर्व प्रधान शाहिद अली ने काफी मान मनौव्वल करके गांव के ही गोताखोर याकूब और नवाब को गंगा में उतारा। दोनों कई घंटे तक भाइयों को खोजते रहे। वह भी मगरमच्छ के भय से अधिक गहराई में नहीं गए। जिस नाव में यह लोग सवार थे वह भी गंगा में समा गई है। नाव पूर्व प्रधान शाहिद अली की थी। उन्होंने कुछ महीने पहले ही नई बनवाई थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सुरेंद्र सिंह की मां रामसती का दो अक्तूबर को तेरहवीं संस्कार है। उनके चाचा रामनिवास की बेटी लक्ष्मी की शुक्रवार की सुबह मौत हो गई थी। लक्ष्मी की अंत्येष्टि के दौरान ही दो भाइयों के गंगा में समा जाने से चार-चार दुख परिवार पर आठ दिन में पड़े हैं।