{"_id":"697673c1f8d9b0556001acd0","slug":"the-elderly-man-arrived-on-his-sons-shoulders-to-provide-proof-of-his-birthplace-farrukhabad-news-c-222-1-frk1001-136442-2026-01-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: बेटों के कंधों पर जन्मस्थान का प्रमाण देने पहुंचे बुजुर्ग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: बेटों के कंधों पर जन्मस्थान का प्रमाण देने पहुंचे बुजुर्ग
Mon, 26 Jan 2026 01:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:19 AM IST
विज्ञापन
फोटो-14 बेटों के कंधों के सहारे ऑफीसर्स क्लब में सुनवाई के लिए आते 70 वर्षीय बुजुर्ग राजकुमार।
फर्रुखाबाद। उम्र 70 वर्ष, बीमारी से चलने में असमर्थ। दिल में लोकतंत्र के पर्व पर हिस्सा लेने की पूरी हसरत। तभी तो वोट कटने का नोटिस मिलते ही बेटों के कंधों के सहारे भोलेपुर से दो किलोमीटर दूर फतेहगढ़ स्थित आफीसर्स क्लब में अपने मतदाता होने का सुबूत देने राजकुमार पहुंचे। अस्थमा होने से बोलने में भी परेशानी होने के बाद भी बोले 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद से मतदान करते चले आ रहे हैं, अब बुढ़ापे में मतदाता होने का सुबूत देना पड़ रहा है।
जनपद में एसआईआर अभियान के बाद यह दर्द अकेले राजकुमार का ही नहीं उन सभी अनमैप्ड 68,310 मतदाताओं का है जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे जन्मतिथि, जन्म स्थान व 2003 में पुराने बूथ के मतदाता होने के प्रमाण मांगे गए हैं। अब इन नोटिस पर सुनवाई की जा रही है। फतेहगढ़ ऑफीसर्स कालोनी में अधिकारी सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान हाथ में नोटिस व मांगे गए प्रमाण के प्रपत्र लिए मतदाताओं की लाइन लगी थी। यहां सुनवाई करने के बजाय अधिकारी मतदाताओं को टरकाते दिखे।
अशिक्षित मतदाता जब प्रपत्रों के बारे में पूछते तो अधिकारी उन्हें बताने के बजाय यह कह रहे थे कि नोटिस में सब लिखा है। पढ़कर उसी हिसाब से कागज लेकर आओ। हालांकि कुछ नोटिसों का अधिकारियों ने निस्तारण भी किया, लेकिन अधिकांश मतदाता साक्ष्य पूरा न देने पाने से भटकते और परेशान नजर आए।
विज्ञापन
केस .1-
नोटिस में लिखा है, पढ़ लीजिए, साहब! पढ़े-लिखे नहीं हैं...
सुनवाई के दौरान बेवर रोड भोलेपुर नगला नैन निवासी राजकुमार(70) चलने में असमर्थ होने से अपने के बेटे अखिलेश व कमलेश के कंधों के सहारे आते दिखे। उन्होंने बताया कि उनका जन्म इसी स्थान पर हुआ। पिता व बाबा भी यहीं रहते थे। उनका पैतृक निवास है। वोट बनने से लेकर अब तक मतदान करते आ रहे हैं। प्रत्येक चुनाव में वह मतदान भी करते हैं। वर्ष 2003 व उससे पहले की मतदाता सूचियों में नाम भी है। इसके बावजूद नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। नोटिस पर भाग संख्या 368, क्रम संख्या 467 लिखा। प्रमाण के तौर पर राशन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पास बुक, पेन कार्ड, वर्ष 2001 का पहचानपत्र आदि प्रपत्र लेकर अधिकारी के पास पहुंचे। कहा कि साहब कौन का प्रमाण चाहिए, देख लीजिए। इस पर साहब बोले नोटिस में लिखा है, पढ़ लीजिए और वही कागज चाहिए। इस पर राजकुमार बोले कि साहब वह पढ़े-लिखे नहीं हैं। उनके अलावा पत्नी सरस्वती, पुत्र अखिलेश, कमलेश व विमल कुमार व पुत्रवधू कौशल्या को भी नोटिस दिए गए। इस पर साहब हमें कागज चाहिए। जब पूरे कागज लेकर आओगे, तभी सुनवाई पूरी होगी। इस पर वह बहुत दुखी हुए। कहा कि पूरे प्रपत्र लेकर आने की फिर कोशिश करेंगे। मतदान को करना ही है।
केस.2-
2003 की मतदाता सूची में नाम होने के बाद भी नोटिस
बेवर रोड भोलेपुर निवासी मीना चौहान (54) नोटिस लेकर ऑफीसर्स क्लब में सुनवाई के दौरान पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह 35 वर्ष से यहां रहकर मतदान कर रही हैं। मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव मौधा निवासी फूल सिंह की पुत्री हैं। मां का नाम रामकुमारी है। ससुराल में ही उनका वोट बना और पहली बार मतदान भी किया। 2003 की मतदाता सूची में भी उनका नाम शामिल है। इसके बावजूद उन्हें नोटिस भेजा गया है।
केस.3-
प्रधानी का चुनाव लड़ने के बाद अब देना होगा मतदाता होने का साक्ष्य
मुख्यालय फतेहगढ़ से करीब 10 किमी दूर कमालगंज ब्लॉक क्षेत्र के गांव रूनी चुरसई निवासी सुषमा अपने ससुर उदयवीर राजपूत के साथ नोटिस का जवाब देने ऑफीसर्स क्लब पहुंचीं। उन्होंने बताया कि 2012 में उनकी शादी हुई। ससुराल में ही उनका वोट बना। लोकसभा चुनाव 2014 में उन्होंने पहली बार मतदान किया। इसके बाद 2017 में विधानसभा चुनाव, 2019 में लोकसभा चुनाव, 2022 में विधानसभा चुनाव और फिर 2024 में लोकसभा चुनाव में मतदान किया। 2021 में उन्होंने प्रधान पद पर खुद चुनाव लड़ा। एसआईआर में उन्हें नोटिस दिया गया। इससे अब प्रमाण देना पड़ रहा है।
विज्ञापन
जनपद में एसआईआर अभियान के बाद यह दर्द अकेले राजकुमार का ही नहीं उन सभी अनमैप्ड 68,310 मतदाताओं का है जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे जन्मतिथि, जन्म स्थान व 2003 में पुराने बूथ के मतदाता होने के प्रमाण मांगे गए हैं। अब इन नोटिस पर सुनवाई की जा रही है। फतेहगढ़ ऑफीसर्स कालोनी में अधिकारी सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान हाथ में नोटिस व मांगे गए प्रमाण के प्रपत्र लिए मतदाताओं की लाइन लगी थी। यहां सुनवाई करने के बजाय अधिकारी मतदाताओं को टरकाते दिखे।
विज्ञापन
अशिक्षित मतदाता जब प्रपत्रों के बारे में पूछते तो अधिकारी उन्हें बताने के बजाय यह कह रहे थे कि नोटिस में सब लिखा है। पढ़कर उसी हिसाब से कागज लेकर आओ। हालांकि कुछ नोटिसों का अधिकारियों ने निस्तारण भी किया, लेकिन अधिकांश मतदाता साक्ष्य पूरा न देने पाने से भटकते और परेशान नजर आए।
विज्ञापन
केस .1-
नोटिस में लिखा है, पढ़ लीजिए, साहब! पढ़े-लिखे नहीं हैं...
सुनवाई के दौरान बेवर रोड भोलेपुर नगला नैन निवासी राजकुमार(70) चलने में असमर्थ होने से अपने के बेटे अखिलेश व कमलेश के कंधों के सहारे आते दिखे। उन्होंने बताया कि उनका जन्म इसी स्थान पर हुआ। पिता व बाबा भी यहीं रहते थे। उनका पैतृक निवास है। वोट बनने से लेकर अब तक मतदान करते आ रहे हैं। प्रत्येक चुनाव में वह मतदान भी करते हैं। वर्ष 2003 व उससे पहले की मतदाता सूचियों में नाम भी है। इसके बावजूद नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। नोटिस पर भाग संख्या 368, क्रम संख्या 467 लिखा। प्रमाण के तौर पर राशन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पास बुक, पेन कार्ड, वर्ष 2001 का पहचानपत्र आदि प्रपत्र लेकर अधिकारी के पास पहुंचे। कहा कि साहब कौन का प्रमाण चाहिए, देख लीजिए। इस पर साहब बोले नोटिस में लिखा है, पढ़ लीजिए और वही कागज चाहिए। इस पर राजकुमार बोले कि साहब वह पढ़े-लिखे नहीं हैं। उनके अलावा पत्नी सरस्वती, पुत्र अखिलेश, कमलेश व विमल कुमार व पुत्रवधू कौशल्या को भी नोटिस दिए गए। इस पर साहब हमें कागज चाहिए। जब पूरे कागज लेकर आओगे, तभी सुनवाई पूरी होगी। इस पर वह बहुत दुखी हुए। कहा कि पूरे प्रपत्र लेकर आने की फिर कोशिश करेंगे। मतदान को करना ही है।
केस.2-
2003 की मतदाता सूची में नाम होने के बाद भी नोटिस
बेवर रोड भोलेपुर निवासी मीना चौहान (54) नोटिस लेकर ऑफीसर्स क्लब में सुनवाई के दौरान पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह 35 वर्ष से यहां रहकर मतदान कर रही हैं। मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव मौधा निवासी फूल सिंह की पुत्री हैं। मां का नाम रामकुमारी है। ससुराल में ही उनका वोट बना और पहली बार मतदान भी किया। 2003 की मतदाता सूची में भी उनका नाम शामिल है। इसके बावजूद उन्हें नोटिस भेजा गया है।
केस.3-
प्रधानी का चुनाव लड़ने के बाद अब देना होगा मतदाता होने का साक्ष्य
मुख्यालय फतेहगढ़ से करीब 10 किमी दूर कमालगंज ब्लॉक क्षेत्र के गांव रूनी चुरसई निवासी सुषमा अपने ससुर उदयवीर राजपूत के साथ नोटिस का जवाब देने ऑफीसर्स क्लब पहुंचीं। उन्होंने बताया कि 2012 में उनकी शादी हुई। ससुराल में ही उनका वोट बना। लोकसभा चुनाव 2014 में उन्होंने पहली बार मतदान किया। इसके बाद 2017 में विधानसभा चुनाव, 2019 में लोकसभा चुनाव, 2022 में विधानसभा चुनाव और फिर 2024 में लोकसभा चुनाव में मतदान किया। 2021 में उन्होंने प्रधान पद पर खुद चुनाव लड़ा। एसआईआर में उन्हें नोटिस दिया गया। इससे अब प्रमाण देना पड़ रहा है।