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शहर से गांवों तक आवारा जानवरों का आतंक
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
Updated Sun, 18 Jun 2017 11:14 PM IST
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शहर से गांवों तक आवारा जानवरों का आंतक है। शहर में जहां आवारा जानवर सड़कों पर हादसों और जाम का सबब बन रहे हैं, वहीं गांवों में ये कहीं खेतों में खड़ी फसल चट कर रहे हैं तो कहीं बुरी तरह तहस-नहस कर रहे हैं।
क्षेत्र के मुडौल, लखनपुर, आखूनपुर, जौरा, पट्टिया, घसिया चिलौली, करीम नगर, नरैनामऊ, उलियापुर, सुल्तानपुर, कादरदादपुर सराय, रहमनापुर समेत दर्जनों ऐसे गाँव है जहां किसान आवारा गाय, सांड, व बछड़ों के झुंड की वजह से परेशान हैं।
फसल बचाने के लिए किसान रातों में खेतों में पहरा दे रहे हैं। आवारा जानवरों के झुंड किसानों की फसलें खाकर और पैरों से रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। एक खेत से भगाए जाने पर वे दूसरे खेतों में चले जाते हैं।
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किसानों ने कई बार वन विभाग के अधिकारियों से आवारा जानवरों से छुटकारा दिलाने की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। क्षेत्र में कई झुंडों में 200 से 220 तक गाय, बछड़े, और सांड रहते हैं।
यह झुंड गांव के जिन खेतों में घुस जाते हैं उसकी पूरी फसल बर्बाद कर डालते हैं। मुडौल के प्रधान अशोक कुमार, निर्दोष, शिवकिशोर आदि ने बताया कि इलाके में आवारा जानवरों की बाढ़ सी आ गई है। रात के समय आवारा जानवर जिन खेतों से गुजर जाते हैं, उनमें खड़ी फसलों को बर्बाद कर जाते हैं। अब तो किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए रातों में खेतों पर सोने के लिए मजबूर हैं।
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क्षेत्र के मुडौल, लखनपुर, आखूनपुर, जौरा, पट्टिया, घसिया चिलौली, करीम नगर, नरैनामऊ, उलियापुर, सुल्तानपुर, कादरदादपुर सराय, रहमनापुर समेत दर्जनों ऐसे गाँव है जहां किसान आवारा गाय, सांड, व बछड़ों के झुंड की वजह से परेशान हैं।
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फसल बचाने के लिए किसान रातों में खेतों में पहरा दे रहे हैं। आवारा जानवरों के झुंड किसानों की फसलें खाकर और पैरों से रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। एक खेत से भगाए जाने पर वे दूसरे खेतों में चले जाते हैं।
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किसानों ने कई बार वन विभाग के अधिकारियों से आवारा जानवरों से छुटकारा दिलाने की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। क्षेत्र में कई झुंडों में 200 से 220 तक गाय, बछड़े, और सांड रहते हैं।
यह झुंड गांव के जिन खेतों में घुस जाते हैं उसकी पूरी फसल बर्बाद कर डालते हैं। मुडौल के प्रधान अशोक कुमार, निर्दोष, शिवकिशोर आदि ने बताया कि इलाके में आवारा जानवरों की बाढ़ सी आ गई है। रात के समय आवारा जानवर जिन खेतों से गुजर जाते हैं, उनमें खड़ी फसलों को बर्बाद कर जाते हैं। अब तो किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए रातों में खेतों पर सोने के लिए मजबूर हैं।