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Farrukhabad News: पटाखों के बीच सेहत का भी रखें ख्याल
Mon, 20 Oct 2025 08:01 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 20 Oct 2025 08:01 PM IST
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फर्रुखाबाद। दिवाली का पर्व आनंद और उल्लास का प्रतीक है। रंग-बिरंगी आतिशबाजी और स्वादिष्ट मिठाइयां इस पर्व की रौनक को और बढ़ा देती हैं।
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस खुशियों भरे त्योहार में सेहत के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। खास तौर पर दमा (अस्थमा) और हृदय रोगियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
लोहिया अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि दिवाली के दौरान वायु में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। पटाखों से निकलने वाले धुएं में हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, जो सांस और हृदय संबंधी मरीजों के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पटाखों की तेज आवाज से हृदय गति और रक्तचाप अचानक बढ़ सकता है। यह स्थिति हृदय रोगियों के लिए जोखिमपूर्ण होती है। वहीं, धुएं में मौजूद विषैले तत्व दमा और श्वसन संबंधी मरीजों की तकलीफें बढ़ा देते हैं।
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दिवाली पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने जिले के सभी चिकित्सा प्रभारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे सक्रिय रहें। किसी घटना या दुर्घटना की सूचना पर तत्काल चिकित्सक मौके पर पहुंचे।
लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने भी चिकित्सकों की टीम को अलर्ट पर रखा है ताकि त्योहार के दौरान आने वाले मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
सावधानी के उपाय
- तली-भुनी और अत्यधिक नमक या मिठाई युक्त चीजों का सेवन न करें।
- पटाखों के धुएं से यथासंभव दूरी बनाए रखें।
- सांस या सीने में घबराहट महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
पटाखों का शोर कहीं कानों को न कर दे कमजोर
फर्रुखाबाद। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन और दीप जलाने के बाद लोग पटाखे फोड़कर खुशी मनाते हैं, लेकिन तेज आवाज वाले पटाखे कानों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। इनसे सुनने की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है।
सामान्य ध्वनि का मानक 50 डेसिबल है, जबकि दिवाली पर चलने वाले कई पटाखे 120 से 150 डेसिबल तक की आवाज पैदा करते हैं, जो कान के लिए बेहद नुकसानदेह है। लोहिया अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. नवनीत कुमार बताते हैं कि यदि 70 डेसिबल की आवाज भी लंबे समय तक सुनी जाए तो कान में समस्या शुरू हो सकती है।
पटाखों की आवाज 120 से 150 डेसिबल तक जाती है, इसलिए उनसे कम से कम पांच मीटर की दूरी बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कान का पर्दा बहुत नाजुक होता है। अत्यधिक शोर से यह फट भी सकता है। विशेषकर बच्चों के कान ज्यादा संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें पटाखों से दूर रखना चाहिए। कई बार पटाखे पास में फटने से कान में सीटी बजने जैसी आवाज सुनाई देने लगती है। यह संकेत है कि ध्वनि कान की सहनशक्ति से अधिक थी।
सरकार ने 125 डेसिबल तक की आवाज वाले पटाखों की ही अनुमति दी है, परंतु बाजार में बिकने वाले कई पटाखे इस सीमा से कहीं अधिक तेज आवाज करते हैं। उन्होंने कहा कि तेज आवाज वाले पटाखों से दूर रहें।
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हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस खुशियों भरे त्योहार में सेहत के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। खास तौर पर दमा (अस्थमा) और हृदय रोगियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
लोहिया अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि दिवाली के दौरान वायु में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। पटाखों से निकलने वाले धुएं में हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, जो सांस और हृदय संबंधी मरीजों के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि पटाखों की तेज आवाज से हृदय गति और रक्तचाप अचानक बढ़ सकता है। यह स्थिति हृदय रोगियों के लिए जोखिमपूर्ण होती है। वहीं, धुएं में मौजूद विषैले तत्व दमा और श्वसन संबंधी मरीजों की तकलीफें बढ़ा देते हैं।
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दिवाली पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने जिले के सभी चिकित्सा प्रभारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे सक्रिय रहें। किसी घटना या दुर्घटना की सूचना पर तत्काल चिकित्सक मौके पर पहुंचे।
लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने भी चिकित्सकों की टीम को अलर्ट पर रखा है ताकि त्योहार के दौरान आने वाले मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
सावधानी के उपाय
- तली-भुनी और अत्यधिक नमक या मिठाई युक्त चीजों का सेवन न करें।
- पटाखों के धुएं से यथासंभव दूरी बनाए रखें।
- सांस या सीने में घबराहट महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
पटाखों का शोर कहीं कानों को न कर दे कमजोर
फर्रुखाबाद। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन और दीप जलाने के बाद लोग पटाखे फोड़कर खुशी मनाते हैं, लेकिन तेज आवाज वाले पटाखे कानों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। इनसे सुनने की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है।
सामान्य ध्वनि का मानक 50 डेसिबल है, जबकि दिवाली पर चलने वाले कई पटाखे 120 से 150 डेसिबल तक की आवाज पैदा करते हैं, जो कान के लिए बेहद नुकसानदेह है। लोहिया अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. नवनीत कुमार बताते हैं कि यदि 70 डेसिबल की आवाज भी लंबे समय तक सुनी जाए तो कान में समस्या शुरू हो सकती है।
पटाखों की आवाज 120 से 150 डेसिबल तक जाती है, इसलिए उनसे कम से कम पांच मीटर की दूरी बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कान का पर्दा बहुत नाजुक होता है। अत्यधिक शोर से यह फट भी सकता है। विशेषकर बच्चों के कान ज्यादा संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें पटाखों से दूर रखना चाहिए। कई बार पटाखे पास में फटने से कान में सीटी बजने जैसी आवाज सुनाई देने लगती है। यह संकेत है कि ध्वनि कान की सहनशक्ति से अधिक थी।
सरकार ने 125 डेसिबल तक की आवाज वाले पटाखों की ही अनुमति दी है, परंतु बाजार में बिकने वाले कई पटाखे इस सीमा से कहीं अधिक तेज आवाज करते हैं। उन्होंने कहा कि तेज आवाज वाले पटाखों से दूर रहें।