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बीमारी फैलने से छह पशु मरे, 30 बीमार
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शिवराज शाक्य। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कायमगंज। क्षेत्र के गांव सत्तार नगर में एक सप्ताह में खुरपका-मुंहपका बीमारी ने छह मवेशियों की जान ले ली है। गांव में 30 से अधिक मवेशी बीमार हैं। साथ ही पशुपालकों को मृत मवेशियों को उठवाने के लिए पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे पशुपालक परेशान हैं।
इस साल मवेशियों का टीकाकरण न होने की वजह से अधिकांश गांवों के मवेशी खुरपका-मुंहपका बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। मवेशियों के मरने की सूचनाएं आए दिन मिल रही हैं। शनिवार को गांव सत्तार निवासी शिवराज शाक्य ने भैंस को बाड़े से बाहर निकाला तो बेहोश होकर गिर पड़ी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। इससे पहले उनके चार मवेशी मर चुके हैं। गांव में एक सप्ताह में छह मवेशियों की मौत हो चुकी है।
गांव के 30 मवेशी बीमारी की चपेट में हैं। मवेशियों के मरने के बाद पशुपालकों को उन्हें उठवाने के लिए 1000 रुपये देने पड़ रहे हैं। न देने पर ठेकेदार मृत मवेशी उठाने से मना कर देता है। शिवराज की भैंस मरने पर उसे उठाने के लिए 1000 रुपये मांगे तो वे अड़ गए और कहा पैसा नहीं देंगे इससे पहले वे दे चुके हैं। ग्रामीण मृत मवेशी सड़क पर रखकर जाम लगाने की कहने लगे। बाद में 600 रुपये लेकर ठेकेदार मवेशी उठाने के लिए तैयार हुआ।
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ठेकेदार शादाब ने बताया कि ठेका खत्म हो गया है। अब मवेशियों की खाल की मांग नहीं है। पहले लाभ था। किराए भाड़े के लिए पशुपालकों से खर्च ले लिया जाता है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुखदेव सिंह शाक्य ने बताया कि पशुओं में अब बीमारी घट गई है। यदि किसी गांव में पशु बीमार हैं तो टीम भेजकर इलाज कराया जाएगा। सत्तार नगर में भी जल्द कैंप लगाकर पशुओं का इलाज किया जाएगा।
गांव सत्तार नगर निवासी पशुपालक शिवराज शाक्य ने बताया कि एक सप्ताह में उनके पांच मवेशियों की मौत हो चुकी है। इससे लाखों रुपये का नुकसान हो गया है। इसके बाद मृत मवेशियों को उठाने के लिए भी रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। शनिवार को मवेशी उठाने के लिए ठेकेदार से काफी झंझट हुई फिर भी 600 रुपये देने पड़े।
गांव के विजय सिंह ने बताया कि मवेशियों में फैली बीमारी पशुपालकों का काफी नुकसान कर रही है। इसकी रोकथाम होना बहुत जरूरी है। ऐसे तो पशुपालक बर्बाद हो जाएंगे। गांव में तो मवेशी ही लोगों के रोजी रोटी का जरिया हैं।
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इस साल मवेशियों का टीकाकरण न होने की वजह से अधिकांश गांवों के मवेशी खुरपका-मुंहपका बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। मवेशियों के मरने की सूचनाएं आए दिन मिल रही हैं। शनिवार को गांव सत्तार निवासी शिवराज शाक्य ने भैंस को बाड़े से बाहर निकाला तो बेहोश होकर गिर पड़ी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। इससे पहले उनके चार मवेशी मर चुके हैं। गांव में एक सप्ताह में छह मवेशियों की मौत हो चुकी है।
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गांव के 30 मवेशी बीमारी की चपेट में हैं। मवेशियों के मरने के बाद पशुपालकों को उन्हें उठवाने के लिए 1000 रुपये देने पड़ रहे हैं। न देने पर ठेकेदार मृत मवेशी उठाने से मना कर देता है। शिवराज की भैंस मरने पर उसे उठाने के लिए 1000 रुपये मांगे तो वे अड़ गए और कहा पैसा नहीं देंगे इससे पहले वे दे चुके हैं। ग्रामीण मृत मवेशी सड़क पर रखकर जाम लगाने की कहने लगे। बाद में 600 रुपये लेकर ठेकेदार मवेशी उठाने के लिए तैयार हुआ।
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ठेकेदार शादाब ने बताया कि ठेका खत्म हो गया है। अब मवेशियों की खाल की मांग नहीं है। पहले लाभ था। किराए भाड़े के लिए पशुपालकों से खर्च ले लिया जाता है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुखदेव सिंह शाक्य ने बताया कि पशुओं में अब बीमारी घट गई है। यदि किसी गांव में पशु बीमार हैं तो टीम भेजकर इलाज कराया जाएगा। सत्तार नगर में भी जल्द कैंप लगाकर पशुओं का इलाज किया जाएगा।
गांव सत्तार नगर निवासी पशुपालक शिवराज शाक्य ने बताया कि एक सप्ताह में उनके पांच मवेशियों की मौत हो चुकी है। इससे लाखों रुपये का नुकसान हो गया है। इसके बाद मृत मवेशियों को उठाने के लिए भी रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। शनिवार को मवेशी उठाने के लिए ठेकेदार से काफी झंझट हुई फिर भी 600 रुपये देने पड़े।
गांव के विजय सिंह ने बताया कि मवेशियों में फैली बीमारी पशुपालकों का काफी नुकसान कर रही है। इसकी रोकथाम होना बहुत जरूरी है। ऐसे तो पशुपालक बर्बाद हो जाएंगे। गांव में तो मवेशी ही लोगों के रोजी रोटी का जरिया हैं।

विजय सिंह। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD