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शिकारी कुत्तों ने किशोर को नोच-नोचकर खाया
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
Updated Sun, 03 Jul 2016 12:25 AM IST
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लोहिया अस्पताल में भर्ती कुत्तों के हमले से घायल हुआ किशोर मुकर्रम।
- फोटो : अमर उजाला
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थाना जहानगंज के गांव पतौंजा में शुक्रवार को आदमखोर कुत्ते एक किशोर को नोच-नोचकर खा गए। गंभीर हालत में उसे डाक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले भी यह कुत्ते दो बच्चों को अपना शिकार बना चुके हैं। गांव पतौंजा में आदमखोर कुत्तों को लेकर दहशत व्याप्त है।
गंभीर अवस्था में डाक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती मुकर्रम (11) पुत्र ताहिर हुसैन को कुत्तों ने उस समय गिरा लिया, जब वह अपने खेत पर गया हुआ था। उसी समय चार-पांच कुत्ते उस पर आक्रामक हो गए और उसे खेत में ही गिरा लिया। नोच-नोचकर कुत्ते उसका मांस खाने लगे। कुत्तों के भौंकने से उसके बेटे की आवाज लोगों तक नहीं पहुंच सकी। गांव के लोग जब खेत की ओर गए तो उन्होंने इन आदमखोर कुत्तों को भगाया। इन आदमखोर कुत्तों के संबंध में जानकारी करने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. पुष्प कुमार ने बताया कि मामला गंभीर है। कोई भी कुत्ता दौड़कर नहीं काटता।
वही कुत्ते दौड़कर काटते हैं, जिनके अंदर रैबीज पैदा हो जाता है। इसके कारण वह पागल हो जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ पतौंजा के लोगों का कहना है कि श्मशान घाट पर रहने वाले या कब्रिस्तान पर रहने वाले कुत्ते आदमखोर हो जाते हैं। यह केवल मांसाहारी होते हैं। इन्हीं कुत्तों को भरकर कोई छोड़ गया है। इससे पहले एक बालिका भी इनका निवाला बन चुकी है और पड़ोसी गांव के एक बच्चे के कान नोचकर भी कुत्ते खा गए हैं।
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गंभीर अवस्था में डाक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती मुकर्रम (11) पुत्र ताहिर हुसैन को कुत्तों ने उस समय गिरा लिया, जब वह अपने खेत पर गया हुआ था। उसी समय चार-पांच कुत्ते उस पर आक्रामक हो गए और उसे खेत में ही गिरा लिया। नोच-नोचकर कुत्ते उसका मांस खाने लगे। कुत्तों के भौंकने से उसके बेटे की आवाज लोगों तक नहीं पहुंच सकी। गांव के लोग जब खेत की ओर गए तो उन्होंने इन आदमखोर कुत्तों को भगाया। इन आदमखोर कुत्तों के संबंध में जानकारी करने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. पुष्प कुमार ने बताया कि मामला गंभीर है। कोई भी कुत्ता दौड़कर नहीं काटता।
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वही कुत्ते दौड़कर काटते हैं, जिनके अंदर रैबीज पैदा हो जाता है। इसके कारण वह पागल हो जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ पतौंजा के लोगों का कहना है कि श्मशान घाट पर रहने वाले या कब्रिस्तान पर रहने वाले कुत्ते आदमखोर हो जाते हैं। यह केवल मांसाहारी होते हैं। इन्हीं कुत्तों को भरकर कोई छोड़ गया है। इससे पहले एक बालिका भी इनका निवाला बन चुकी है और पड़ोसी गांव के एक बच्चे के कान नोचकर भी कुत्ते खा गए हैं।
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