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Farrukhabad News: खाद के लिए मारामारी, दाम से 350 रुपये अधिक तक की वसूली

Thu, 29 Oct 2026 11:56 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:56 PM IST
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Scramble for fertilizer; prices inflated by up to 350
कमालगंज। ब्लॉक क्षेत्र की 12 सहकारी समितियों में से 11 में खाद वितरित किए जाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद आलू की फसल के लिए खाद पाने के लिए मारामारी की स्थिति है। किसानों का कहना है कि बाजार में डीएपी व एनपीके निर्धारित मूल्य से 350 रुपये अधिक दमा पर बेची जा रही है। यदि बाजार में कालाबाजारी रुक जाए तो समितियों में मारामारी कम हो सकती है।
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12 सहकारी समितियों में बलीपुर को छोड़कर शेष 11 समितियों में डीएपी व एनपीके वितरित हो रही है। समितियों में खाताधारकों को उधार में खाद मिलती है। इसलिए मध्यम व छोटी जोत के किसान सहकारी समिति से खाद लेना चाहते हैं। साथ ही बाजार में दुकानों पर 350 रुपये बोरी अधिक दाम लेकर खाद दी जा रही है। इसलिए बिना खातेदार किसान भी सहकारी समितियों से खाद लेना चाहते हैं।
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सहकारी समिति कमालगंज में लगातार दो दिन से खाद बंट रही है, फिर भी भीड़ कम नहीं हो रही। बुधवार को भी सुबह से शाम तक भीड़ लगी रही। रजीपुर व खुदागंज सहकारी समिति में बुधवार को खाद का वितरण नहीं हुआ। दोनों समितियों का प्रभार संभाले सचिव राजीव सिंह ने बताया कि अग्रिम स्टॉक मंगाने के लिए वह कमालगंज सहकारी बैंक में पैसा जमा करने के लिए आए हैं। खुदागंज व रजीपुर में डीएपी व एनपीके उपलब्ध है, बृहस्पतिवार को वितरण शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि कतरौलीपट्टी स्थित समिति में पहली बार वितरण हुआ, फिर भी 25 लाख रुपये की खाद यहां बट चुकी है। 20 मीट्रिक टन की चेक और लगा दी है। एडीओ सहकारिता योगेंद्र प्रताप का कहना है कि मानक अनुसार खाद का वितरण हो रहा है।
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1350 वाली डीएपी 1700, 1950 वाली एनपीके 2250 में -
फोटो-3 धर्मवीर।
कमालगंज समिति में खाद लेने पहुंचे बहादुरपुर के किसान धर्मवीर का कहना है कि यदि बाजार में सरकार द्वारा निर्धारित रेट पर खाद मिलने लगे तो समिति पर मारामारी कम हो सकती है लेकिन बाजार में 1350 वाली डीएपी 1600 से 1700 तक मिल रही है। जबकि, 1950 वाली एनपीके 2250 रुपये में है। कुछ दुकानदार अपने हिसाब की कंपनी का लगेज पिपरोलीन, सल्फर, जिंक व जैविक का झोला भी लेने को मजबूर करते हैं।


लगेज खरीदने का किसानों के पास पैसा नहीं
फोटो-4 तोताराम।
नथुआपुर के तोताराम ने बताया कि वैसे किसान खाद के साथ लगेज भी ले लेता था लेकिन दो साल से आलू में लागत भी डूब गई इसलिए रुपये की कड़की है। बाजार से खाद के साथ भरपूर लगेज खरीदने की हिम्मत अब किसानों में नहीं रही। लगेज न लो तो दुकानों पर खाद ज्यादा महंगी मिलती है। इसलिए सहकारी समिति से ही पूरी खाद मिलने की उम्मीद में किसान आ रहे हैं।
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