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अधूरे संसधानों के साथ दौड़ रहीं रोडवेज बसें
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फर्रुखाबाद। डिपो की बसें आधे-अधूरे संसाधनों से सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं। बारिश में प्रयोग होने वाले किसी बस में वाइपर नहीं हैं, तो किसी में फॉग लाइटें।
यही नहीं कई बसों की छतें टपक रही हैं। इससे बारिश के वक्त यात्रियों को खड़े होकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है।
स्थानीय रोडवेज डिपो के बेड़े में 95 बसें हैं। इनमें करीब 20 से अधिक बसें ऐसी हैं, जिनमें जरूरत का सामान गायब है।
बारिश और कम रोशनी के दौरान प्रयोग में होने वाली वाइपर और फॉग लाइटें तक नहीं हैं। कई बसों में वाइपर लगे हैं, मगर वह खराब हैं।
बारिश में सबसे बड़ी दिक्कत छतों के टपकने से है। हद तो यह है कि दिल्ली मार्ग की बसों में भी सही से मरम्मत नहीं की जाती।
लिहाजा रास्ते में बारिश होने पर पूरा पानी सीटों पर टपकता है। इससे उस पर बैठे यात्रियों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है।
रोडवेज कार्यशाला के जिम्मेदारों की मनमानी इतनी कि आधे-अधूरे संसाधनों के बावजूद बसों को ओके करके दे दिया जाता है। इससे दिक्कतों चालक और परिचालकों को उठानी पड़ रही है।
डिपो इन दिनों 15 से अधिक बसें ऐसी हैं, जिनमें बैटरी तक नहीं है। लिहाजा उन्हें धक्का मारकर चालू किया जाता है। धक्का परेड बसों की संख्या आगरा, बदायूं, कानपुर मार्ग पर सबसे ज्यादा है। इससे बसों में अधिक
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‘बसों में पूरी तरह मरम्मत न होने की उन्हें जानकारी नहीं है। यदि बसों में काम सही से नहीं होता, तो वह इसकी जांच कर उच्चाधिकारियों को लिखेंगे।’
-आरसी यादव, एआरएम, फर्रुखाबाद डिपो।
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यही नहीं कई बसों की छतें टपक रही हैं। इससे बारिश के वक्त यात्रियों को खड़े होकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है।
स्थानीय रोडवेज डिपो के बेड़े में 95 बसें हैं। इनमें करीब 20 से अधिक बसें ऐसी हैं, जिनमें जरूरत का सामान गायब है।
बारिश और कम रोशनी के दौरान प्रयोग में होने वाली वाइपर और फॉग लाइटें तक नहीं हैं। कई बसों में वाइपर लगे हैं, मगर वह खराब हैं।
बारिश में सबसे बड़ी दिक्कत छतों के टपकने से है। हद तो यह है कि दिल्ली मार्ग की बसों में भी सही से मरम्मत नहीं की जाती।
लिहाजा रास्ते में बारिश होने पर पूरा पानी सीटों पर टपकता है। इससे उस पर बैठे यात्रियों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है।
रोडवेज कार्यशाला के जिम्मेदारों की मनमानी इतनी कि आधे-अधूरे संसाधनों के बावजूद बसों को ओके करके दे दिया जाता है। इससे दिक्कतों चालक और परिचालकों को उठानी पड़ रही है।
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डिपो इन दिनों 15 से अधिक बसें ऐसी हैं, जिनमें बैटरी तक नहीं है। लिहाजा उन्हें धक्का मारकर चालू किया जाता है। धक्का परेड बसों की संख्या आगरा, बदायूं, कानपुर मार्ग पर सबसे ज्यादा है। इससे बसों में अधिक
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‘बसों में पूरी तरह मरम्मत न होने की उन्हें जानकारी नहीं है। यदि बसों में काम सही से नहीं होता, तो वह इसकी जांच कर उच्चाधिकारियों को लिखेंगे।’
-आरसी यादव, एआरएम, फर्रुखाबाद डिपो।