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कायमगंज के तत्कालीन कोतवाल समेत नौ पुलिसकर्मियों पर रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Tue, 23 Aug 2016 10:18 PM IST
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दो साल पहले कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव बसोला नगला के रहने वाले आधा दर्जन से अधिक लोगों को अपहरण व शस्त्र बरामदगी के झूठे मुकदमे में फंसाने वाले तत्कालीन कोतवाल समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन के प्रभारी निरीक्षक की तहरीर पर दर्ज किए गए मुकदमे में कोतवाल के साथ चार दरोगा, एक एचसीपी और तीन सिपाहियों के नाम शामिल हैं। जिन पुलिसकर्मियों पर रिपोर्ट हुई हैं उनमें चार ने अपहरण की बरामदगी दिखाई और पांच दरोगा व सिपाहियों ने गुडवर्क में अपना नाम फर्द में शामिल कर दिया। नतीजतन जांचकर्ता एजेंसी ने इन सभी के खिलाफ विद्वेष की भावना से मुकदमा दर्ज करने और मारपीट करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
बसोला नगला के रहने वाले चंद्रपाल के पिता फूलसिंह ने 26 मार्च 2014 को अपने पुत्र चंद्रपाल के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें राधेश्याम, रामहरि, अरविंद अवस्थी, मुकेश दीक्षित, रामशंकर मिश्र प्रधान मुंशी नगला, राधेश्याम, मोहित और राहुल के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। तत्कालीन कोतवाल ने फूल सिंह की तहरीर पर इन सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और इनसे तमंचे की बरामदगी दिखाई।
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घटना के समय प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार यादव, एसआई राजेंद्र सिंह और सिपाही संदेश कुमार, सुधीर कुमार कुआंखेड़ा चौकी से इन लोगों को पकड़ लाए और तमंचा लगाकर जेल भेज दिया। मामले की विवेचना भ्रष्टाचार संगठन के प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र मिश्र को सौंपी गई।
सतेंद्र मिश्र ने मामले को झूठा पाए जाने पर प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र यादव, एसआई राजेंद्र सिंह, एसआई महेंद्र कुमार त्रिपाठी, एसआई रंजीत कुमार, एसआई रवेंद्र कुमार, एचसीपी रामनिवास अवस्थी, सिपाही संजेश कुमार, सुधीर कुमार व जर्मन सिंह के विरुद्घ मुकदमा दर्ज करा दिया है। इनमें पांच दरोगा और सिपाही गुडवर्क में वाहवाही करने के लिए फर्द में अपना नाम शामिल कराने पर नप गए हैं।
प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र कुमार मिश्र ने एसपी को प्रकरण की जानकारी देकर अभियोग पंजीकृत करने की मांग की थी, जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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भ्रष्टाचार निवारण संगठन के प्रभारी निरीक्षक की तहरीर पर दर्ज किए गए मुकदमे में कोतवाल के साथ चार दरोगा, एक एचसीपी और तीन सिपाहियों के नाम शामिल हैं। जिन पुलिसकर्मियों पर रिपोर्ट हुई हैं उनमें चार ने अपहरण की बरामदगी दिखाई और पांच दरोगा व सिपाहियों ने गुडवर्क में अपना नाम फर्द में शामिल कर दिया। नतीजतन जांचकर्ता एजेंसी ने इन सभी के खिलाफ विद्वेष की भावना से मुकदमा दर्ज करने और मारपीट करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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बसोला नगला के रहने वाले चंद्रपाल के पिता फूलसिंह ने 26 मार्च 2014 को अपने पुत्र चंद्रपाल के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें राधेश्याम, रामहरि, अरविंद अवस्थी, मुकेश दीक्षित, रामशंकर मिश्र प्रधान मुंशी नगला, राधेश्याम, मोहित और राहुल के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। तत्कालीन कोतवाल ने फूल सिंह की तहरीर पर इन सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और इनसे तमंचे की बरामदगी दिखाई।
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घटना के समय प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार यादव, एसआई राजेंद्र सिंह और सिपाही संदेश कुमार, सुधीर कुमार कुआंखेड़ा चौकी से इन लोगों को पकड़ लाए और तमंचा लगाकर जेल भेज दिया। मामले की विवेचना भ्रष्टाचार संगठन के प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र मिश्र को सौंपी गई।
सतेंद्र मिश्र ने मामले को झूठा पाए जाने पर प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र यादव, एसआई राजेंद्र सिंह, एसआई महेंद्र कुमार त्रिपाठी, एसआई रंजीत कुमार, एसआई रवेंद्र कुमार, एचसीपी रामनिवास अवस्थी, सिपाही संजेश कुमार, सुधीर कुमार व जर्मन सिंह के विरुद्घ मुकदमा दर्ज करा दिया है। इनमें पांच दरोगा और सिपाही गुडवर्क में वाहवाही करने के लिए फर्द में अपना नाम शामिल कराने पर नप गए हैं।
प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र कुमार मिश्र ने एसपी को प्रकरण की जानकारी देकर अभियोग पंजीकृत करने की मांग की थी, जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।