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प्रशिक्षण कर रहे रिक्रूटों की वर्दी में कमीशन का खेल
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फर्रुखाबाद। प्रशिक्षण ले रहे रिक्रूटों को वर्दी देने में पुलिस लाइन के अफसरों की कमीशनखोरी का खेल सामने आया है। 190 रिक्रूटों से 4900 की दर से 9.31 लाख रुपये जमा कराए गए। ये स्थिति तब है जबकि एक वर्दी की कीमत 1700 रुपये है। खास बात ये कि रिक्रूटों को वर्दी देने के लिए कमेटी का गठन किया गया था।
पुलिस लाइन की आरटीसी (रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर) में डेढ़ माह से 190 रिक्रूट प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनको वर्दी देने के लिए शासन के आदेश पर कमेटी का गठन हुआ। कमेटी ने वर्दी के कपड़े का चयन कर प्रति रिक्रूट 4900 रुपये लेने का आदेश दिया। इस तरह 190 रिक्रूटों से 9 लाख 31 हजार रुपये जमा करवाए गए।
रिक्रूटों को जो वर्दी दी गई उसकी कीमत खुले बाजार में 1700 रुपये है। थोक में लेने पर प्रति वर्दी की कीमत महज 1400 रुपये पड़ती है। इस समय जो वर्दी दी गई वह गर्म है। गर्मी की वर्दी के रेट और भी कम है। कमीशन खोरी के खेल को लेकर रिक्रूट ही दबी जुबान में चर्चा कर रहे हैं।
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पुलिस लाइन गेट पर कानपुर वाले बाजपेयी टेलर की दुकान है। टेलर ने बताया कि रिक्रूटों को जो वर्दी दी गई है उसकी कीमत 1400 से लेकर 2400 रुपये है। कपड़े के हिसाब से अलग अलग रेट है। थोक में काम मिलने पर वर्दी के रेट और भी कम हो जाते हैं।
आरटीसी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूटों की वर्दी की खरीद के लिए कमेटी गठित की गई है। कमेटी के निर्णय से ही कपड़ा खरीदकर वर्दी सिलवाई गई है। िफर भी पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई की जाएगी। --डॉ. अनिल मिश्रा एसपी
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पुलिस लाइन की आरटीसी (रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर) में डेढ़ माह से 190 रिक्रूट प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनको वर्दी देने के लिए शासन के आदेश पर कमेटी का गठन हुआ। कमेटी ने वर्दी के कपड़े का चयन कर प्रति रिक्रूट 4900 रुपये लेने का आदेश दिया। इस तरह 190 रिक्रूटों से 9 लाख 31 हजार रुपये जमा करवाए गए।
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रिक्रूटों को जो वर्दी दी गई उसकी कीमत खुले बाजार में 1700 रुपये है। थोक में लेने पर प्रति वर्दी की कीमत महज 1400 रुपये पड़ती है। इस समय जो वर्दी दी गई वह गर्म है। गर्मी की वर्दी के रेट और भी कम है। कमीशन खोरी के खेल को लेकर रिक्रूट ही दबी जुबान में चर्चा कर रहे हैं।
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पुलिस लाइन गेट पर कानपुर वाले बाजपेयी टेलर की दुकान है। टेलर ने बताया कि रिक्रूटों को जो वर्दी दी गई है उसकी कीमत 1400 से लेकर 2400 रुपये है। कपड़े के हिसाब से अलग अलग रेट है। थोक में काम मिलने पर वर्दी के रेट और भी कम हो जाते हैं।
आरटीसी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूटों की वर्दी की खरीद के लिए कमेटी गठित की गई है। कमेटी के निर्णय से ही कपड़ा खरीदकर वर्दी सिलवाई गई है। िफर भी पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई की जाएगी। --डॉ. अनिल मिश्रा एसपी