{"_id":"65244ca17a77532dbc0c5984","slug":"ramayana-teaches-the-real-way-of-living-life-farrukhabad-news-c-22-1-sknp1018-977-2023-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: जीवन जीने का असली तरीका सिखाती है रामायण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: जीवन जीने का असली तरीका सिखाती है रामायण
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। रामचरित मानस वक्ता सुमन रामायणी ने कहा कि जीवन जीने का असली तरीका सीखना है, तो यह रामायण से ही संभव है। हर किसी को रामचरित मानस को अपने जीवन में उतारना चाहिए। माता-पिता बच्चों को रोजाना पांच चौपाइयों का अध्ययन जरूर कराएं।
मानस विचार समिति की ओर से मानस सम्मेलन के दूसरे दिन पांडवेश्वर नाथ मंदिर के सभागार में चित्रकूट से आईं सुमन रामायणी ने कहा कि भगवान से किसी ने अहिल्या का उद्धार करने के लिए नहीं कहा। समय आने पर श्रीराम ने अहिल्या का उद्धार किया। परमात्मा हमेशा भक्त के पास रहते हैं। प्रयागराज के मानस विद्वान रमामणि पांडेय ने कहा कि मानव जीवन भगवान की अद्भुत कृति है। इसके बाद भी मानव को काम, क्रोध, मद, लोभ और मोह का अभिमान है।
शिवजी के समझाने के बाद भी सती श्रीराम की परीक्षा लेने वन में पहुंच गईं। सीता का वेश रखकर जाने के बावजूद श्रीराम ने सती को देखते ही प्रणाम किया। शिव ने अंतरदृष्टि से देखकर सब जान लिया। शिवजी ने सती को दांए भाग में बैठाया और सती का धर्मपत्नी के रूप में त्याग कर दिया।
विज्ञापन
झांसी के मानस मनोहर अरुण गोस्वामी ने भी कथावाचन किया। कथा में ज्योतिस्वरूप अग्निहोत्री, अशोक रस्तोगी, सुरजीत पाठक बंटू, नरेश चंद्र द्विवेदी, ओमप्रकाश दुबे, मधु गौड़, सुमित्रा, रजनी लौगानी, सुषमा दीक्षित, मुन्ना पाठक आदि मौजूद रहे। संचालन पं.रामेंद्र मिश्र ने किया।
विज्ञापन
मानस विचार समिति की ओर से मानस सम्मेलन के दूसरे दिन पांडवेश्वर नाथ मंदिर के सभागार में चित्रकूट से आईं सुमन रामायणी ने कहा कि भगवान से किसी ने अहिल्या का उद्धार करने के लिए नहीं कहा। समय आने पर श्रीराम ने अहिल्या का उद्धार किया। परमात्मा हमेशा भक्त के पास रहते हैं। प्रयागराज के मानस विद्वान रमामणि पांडेय ने कहा कि मानव जीवन भगवान की अद्भुत कृति है। इसके बाद भी मानव को काम, क्रोध, मद, लोभ और मोह का अभिमान है।
विज्ञापन
शिवजी के समझाने के बाद भी सती श्रीराम की परीक्षा लेने वन में पहुंच गईं। सीता का वेश रखकर जाने के बावजूद श्रीराम ने सती को देखते ही प्रणाम किया। शिव ने अंतरदृष्टि से देखकर सब जान लिया। शिवजी ने सती को दांए भाग में बैठाया और सती का धर्मपत्नी के रूप में त्याग कर दिया।
विज्ञापन
झांसी के मानस मनोहर अरुण गोस्वामी ने भी कथावाचन किया। कथा में ज्योतिस्वरूप अग्निहोत्री, अशोक रस्तोगी, सुरजीत पाठक बंटू, नरेश चंद्र द्विवेदी, ओमप्रकाश दुबे, मधु गौड़, सुमित्रा, रजनी लौगानी, सुषमा दीक्षित, मुन्ना पाठक आदि मौजूद रहे। संचालन पं.रामेंद्र मिश्र ने किया।