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जिला जेल में उपद्रव व तोड़फोड़ करने में दो को चार साल की सजा
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फर्रुखाबाद। अपर जिला जज द्वितीय महेंद्र सिंह ने जिला जेल में उपद्रव, तोड़फोड़ कर सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने, अभिलेखों में आग लगाने के मुकदमे में दो को दोषी पाकर चार साल की सजा सुनाई है। 11-11 हजार रुपये जुर्माना किया है।
जिला कारागार फतेहगढ़ में 26 मार्च 2017 में सुबह नौ बजे बंदियों ने उपद्रव कर जेलर कार्यालय का रोशनदान में लगा शीशा और दो अलमारी तोड़ दी। चेस्ट बॉक्स से 10-15 हजार रुपये, बंदियों के जमा जेवर, घड़ी, मोबाइल लूटा था।
जेलर का लैपटॉप तोड़ कर अलमारी में रखी पत्रावलियों को फाड़ दिया था। अभिलेखों में आग लगा दी थी। इसकी जानकारी पर तत्कालीन सीडीओ एनपी पांडेय, जेल अधीक्षक राकेश कुमार व फतेहगढ़ कोतवाल अनूप निगम पुलिस फोर्स के साथ जेल पहुंचे।
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उन्होंने बंदियों को समझाने का प्रयास किया तो उन पर पथराव किया था।
इससे जेल अधीक्षक व सीडीओ चुटहिल हो गए थे। बमुश्किल प्रशासन ने बंदियों के उपद्रव को शांत किया था। जेलर धर्मपाल सिंह ने 36 बंदी नामजद व 150 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें बंदी अतुल, सतीश व प्रदीप पर आरोप लगाया था कि इन तीनों लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया था, जिस कारण इन तीनों बंदियों के नेतृत्व में जेल में बंदियों ने उपद्रव किया। पुलिस ने विवेचना कर 32 बंदियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
शहर के सातनपुर पट्टी निवासी बबलू कटियार व विक्की उर्फ बूटी के अनुपस्थित होने पर इनकी पत्रावली अलग कर मुकदमे की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के वकील व विशेष लोक अभियोजक अशोक कटियार, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनुज प्रताप सिंह ने दलीलें पेश कीं।
बबलू कटियार व विक्की ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर जुर्म स्वीकार किया। न्यायाधीश ने दोनों को सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
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जिला कारागार फतेहगढ़ में 26 मार्च 2017 में सुबह नौ बजे बंदियों ने उपद्रव कर जेलर कार्यालय का रोशनदान में लगा शीशा और दो अलमारी तोड़ दी। चेस्ट बॉक्स से 10-15 हजार रुपये, बंदियों के जमा जेवर, घड़ी, मोबाइल लूटा था।
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जेलर का लैपटॉप तोड़ कर अलमारी में रखी पत्रावलियों को फाड़ दिया था। अभिलेखों में आग लगा दी थी। इसकी जानकारी पर तत्कालीन सीडीओ एनपी पांडेय, जेल अधीक्षक राकेश कुमार व फतेहगढ़ कोतवाल अनूप निगम पुलिस फोर्स के साथ जेल पहुंचे।
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उन्होंने बंदियों को समझाने का प्रयास किया तो उन पर पथराव किया था।
इससे जेल अधीक्षक व सीडीओ चुटहिल हो गए थे। बमुश्किल प्रशासन ने बंदियों के उपद्रव को शांत किया था। जेलर धर्मपाल सिंह ने 36 बंदी नामजद व 150 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें बंदी अतुल, सतीश व प्रदीप पर आरोप लगाया था कि इन तीनों लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया था, जिस कारण इन तीनों बंदियों के नेतृत्व में जेल में बंदियों ने उपद्रव किया। पुलिस ने विवेचना कर 32 बंदियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
शहर के सातनपुर पट्टी निवासी बबलू कटियार व विक्की उर्फ बूटी के अनुपस्थित होने पर इनकी पत्रावली अलग कर मुकदमे की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के वकील व विशेष लोक अभियोजक अशोक कटियार, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनुज प्रताप सिंह ने दलीलें पेश कीं।
बबलू कटियार व विक्की ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर जुर्म स्वीकार किया। न्यायाधीश ने दोनों को सजा और जुर्माने से दंडित किया है।