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बाढ़ के पानी से 40 गांवों के ग्रामीणों की जान जोखिम में
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गांव जोगरापुर के लिए नाव से जाते लोग। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
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अमृतपुर/शमसाबाद। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंचने से 40 गांव में बाढ़ का पानी भर गया। सात गांव पानी से घिरे हैं। पांच गांवों में आवागमन के लिए नाव चल रही हैं।
ग्रामीणों के सामने परिवार के भरण- पोषण के लिए खाद्य सामग्री लाने और पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है।
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 137.10 के पास 136.95 मीटर तक पहुंच गया है। शुक्रवार को नरौरा से गंगा में 42,381 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अमृतपुर के 26 और शमसाबाद क्षेत्र के 14 गांवों में पानी भर गया है। कटरी तौफीक व चितार में पानी अधिक होने से आवागमन के लिए नाव चल रहीं हैं।
अमृतपुर के गांव हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, माखन नगला, कारनपुरघाट, कुड़री, जोगराजपुर में भी नाव से आवागमन हो रहा है।
गांव जोगराजपुर के ग्रामीण सत्यपाल, संतोष सिंह, अन्नू, विशाल का कहना है कि बाढ़ के पानी से स्कूल के पास कच्ची सड़क कट गई है। उस पर लकड़ी व बोरियों में मिट्टी भरकर रास्ता बनाया जा रहा है।
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आशा की मड़ैया के रहने वाले मनोहर, राजकरण, अरविंद, गीतादेवी ने बताया कि रास्ते पर पानी ज्यादा भरा हुआ है, लेकिन प्रशासन ने नाव की कोई व्यवस्था नहीं की है।
गांव चौराहार के सामने शमसाबाद-शाहजहांपुर मार्ग पर करीब दो फीट बाढ़ का पानी बह रहा है। आवागमन में खतरा बना हुआ है। चालक बहुत धीमी गति से वाहन निकालते हैं।
अमृतपुर के गांव रामपुर, जोगराजपुर, उदयपुर, लायकपुर, सबलपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, मंझा, माखन नगला, रामप्रसाद नगला, कहिलियाई, अंबरपुर गांव में चल रहे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में बाढ़ का पानी भर गया है।
इससे शैक्षिक कार्य ठप है। प्राथमिक विद्यालय लायकपुर के प्रधानाध्यापक ने पंचायत घर में विद्यालय लगाया। खंड शिक्षा अधिकारी अनूप कुमार सिंह ने बताया कि कितने विद्यालय में पानी भर गया है, इसकी जानकारी नहीं है। शिक्षकों से सूचना मांगी गई है।
शमसाबाद के18 स्कूलों में बाढ़ का पानी भर गया है। खंड शिक्षा अधिकारी सतीश कुमार वर्मा ने पानी भरे स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को दूसरे विद्यालय में संबद्ध कर शिक्षण कार्य कराने का आदेश दिया है।
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ग्रामीणों के सामने परिवार के भरण- पोषण के लिए खाद्य सामग्री लाने और पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है।
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 137.10 के पास 136.95 मीटर तक पहुंच गया है। शुक्रवार को नरौरा से गंगा में 42,381 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अमृतपुर के 26 और शमसाबाद क्षेत्र के 14 गांवों में पानी भर गया है। कटरी तौफीक व चितार में पानी अधिक होने से आवागमन के लिए नाव चल रहीं हैं।
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अमृतपुर के गांव हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, माखन नगला, कारनपुरघाट, कुड़री, जोगराजपुर में भी नाव से आवागमन हो रहा है।
गांव जोगराजपुर के ग्रामीण सत्यपाल, संतोष सिंह, अन्नू, विशाल का कहना है कि बाढ़ के पानी से स्कूल के पास कच्ची सड़क कट गई है। उस पर लकड़ी व बोरियों में मिट्टी भरकर रास्ता बनाया जा रहा है।
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आशा की मड़ैया के रहने वाले मनोहर, राजकरण, अरविंद, गीतादेवी ने बताया कि रास्ते पर पानी ज्यादा भरा हुआ है, लेकिन प्रशासन ने नाव की कोई व्यवस्था नहीं की है।
गांव चौराहार के सामने शमसाबाद-शाहजहांपुर मार्ग पर करीब दो फीट बाढ़ का पानी बह रहा है। आवागमन में खतरा बना हुआ है। चालक बहुत धीमी गति से वाहन निकालते हैं।
अमृतपुर के गांव रामपुर, जोगराजपुर, उदयपुर, लायकपुर, सबलपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, मंझा, माखन नगला, रामप्रसाद नगला, कहिलियाई, अंबरपुर गांव में चल रहे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में बाढ़ का पानी भर गया है।
इससे शैक्षिक कार्य ठप है। प्राथमिक विद्यालय लायकपुर के प्रधानाध्यापक ने पंचायत घर में विद्यालय लगाया। खंड शिक्षा अधिकारी अनूप कुमार सिंह ने बताया कि कितने विद्यालय में पानी भर गया है, इसकी जानकारी नहीं है। शिक्षकों से सूचना मांगी गई है।
शमसाबाद के18 स्कूलों में बाढ़ का पानी भर गया है। खंड शिक्षा अधिकारी सतीश कुमार वर्मा ने पानी भरे स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को दूसरे विद्यालय में संबद्ध कर शिक्षण कार्य कराने का आदेश दिया है।