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Farrukhabad News: घरों में दे दिए निजी अस्पतालों के लाइसेंस

Thu, 25 Jun 2026 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2026 12:00 AM IST
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Private hospital licenses issued for residential premises.
फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग ने घरों में निजी अस्पतालों के लाइसेंस जारी कर दिए। अधिकांश भवनों का वाणिज्यिक तो दूर घरेलू नक्शा भी पास नहीं है। अग्निशमन विभाग की एनओसी भी नहीं है। आपातकालीन स्थिति में निकलने के लिए दूसरा गेट भी नहीं है।
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स्वास्थ्य विभाग में 174 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। इनमें अधिकांश ऐसे हैं, जिनमें एक ही गेट से मरीजों का आना-जाना है। जबकि मानक के अनुसार मरीजों के लिए निकास व प्रवेश द्वार अलग-अलग होना चाहिए। अग्निशमन विभाग के रिकार्ड के अनुसार 32 निजी अस्पतालों ने एनओसी ली है। इससे साफ है कि बिना एनओसी के चल रहे 142 निजी अस्पतालों में अग्निशमन के मानक पूरे नहीं हैं। इनमें कई अस्पताल में एक ही गेट है और उसकी भी चौड़ाई काफी कम है। इससे आग लगने जैसी आपात स्थिति में मरीजों व तीमारदारों को भागकर जान बचाना मुश्किल पड़ सकता है। अधिकांश निजी अस्पतालों के गेट पर ही बिजली का मीटर लगा है। शार्ट सर्किट से यदि गेट पर आग लग जाए तो अंदर फंसे लोगों को भागने के लिए कोई जगह भी नहीं है।
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केस 1. फतेहगढ़ के जिला जेल चौराहे के निकट स्थित निजी अस्पताल मात्र 20 फीट के चौड़े भवन में संचालित है। इसमें न तो अग्निशमन विभाग की एनओसी है और न ही आपातकालीन दूसरा गेट। चार फीट के एक ही गेट से मरीजों का आना-जाना होता है। तीन मंजिल तक बने वार्डों में मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
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केस 2. मसेनी चौराहे के निकट 20 से अधिक निजी अस्पताल संचालित हैं। अधिकांश अस्पतालों के भवनों का न तो नक्शा पास है और न ही अग्निशमन विभाग की एनओसी। इनमें शामिल एक अस्पताल कुछ दिन पहले ही दूसरी बार सील किया गया था, जो अब संचालित है। हालांकि इस अस्पताल में अब बेसमेंट में मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे।
केस 3. निजी अस्पतालों के सामने वाहन खड़े होने से यातायात में असुविधा हो रही है। आवास विकास के निकट स्थित कई अस्पतालों के सामने फुटपाथ ही पार्किंग स्थल बने हैं। सड़क किनारे तक वाहन खड़े होने से कई बार जाम की स्थिति बनती है और लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
छोटी कार्रवाई और बड़े बयान
शहर की बाबूजी वाली गली में संचालित नर्सिंग होम के मानक पूरे न होने पर सीएमओ ने मंगलवार को ही इसे सील करने का दावा किया था। जबकि बुधवार को यह नर्सिंग होम चलता मिला। जब डिप्टी सीएमओ डॉ. आरसी माथुर से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सिर्फ ओटी सील की गई है। संचालन पर कोई रोक नहीं लगी है।

क्षमता से अधिक मरीज किए जा रहे भर्ती
स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से अस्पताल संचालक खेल कर रहे हैं। वह 10 से 19 बेड के अस्पताल की मंजूरी लेकर 30 से 40 मरीज भर्ती कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि 20 बेड के अस्पताल के मानक बदल जाते हैं, इससे छोटे मानकों पर काम कर मोटी कमाई की जा रही है।

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जानकारी मिली है कि कई अस्पताल संकरी गलियों में चल रहे हैं और उसमें निकास का कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है। अस्पताल में दो गेट होना पहली प्राथमिकता है। शीघ्र ही अभियान चलाकर मानकों की जांच कराई जाएगी। अमानक अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।-
डॉ. आनंद उपाध्याय, सीएमओ


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