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Farrukhabad News: अधूरे मानकों पर मिलीं निजी एंबुलेंस, सरकारी दवाएं भी बरामद
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फर्रुखाबाद। जनपद में अधूरे मानकों पर निजी एंबुलेंस फर्राटा भर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गुरुवार को जांच की तो पोल खुल गई। न तो प्रशिक्षित स्टाफ मिला और न ही ऑक्सीजन मास्क। इमरजेंसी ट्रे भी अधूरी थी। एक निजी एंबुलेंस में सरकारी दवाएं भी बरामद हुईं हैं।
एआरटीओ कार्यालय में 163 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें 120 निजी एंबुलेंस में 62 बिना फिटनेस के दौड़ रही हैं। इस संबंध में अमर उजाला ने दो दिसंबर के अंक में, अनदेखी : बिना फिटनेस फर्राटा भर रहीं 62 एंबुलेंस शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसका संज्ञान लेकर गुरुवार को नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ.आरसी माथुर, डॉ.दीपक कटारिया व फार्मासिस्ट आशीष शुक्ला लोहिया अस्पताल पहुंचे।
टीम देखकर कुछ चालक तो एंबुलेंस भगा ले गए। मौके पर मिलीं तीन एंबुलेंस की जांच की गई। इन पर चालक उदय प्रकाश, फहीम खान व बिरजू के साथ कोई पैरामेडिकल स्टाफ नहीं था। इन एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर तो मौजूद थे, लेकिन ऑक्सीजन मास्क नहीं थे। इससे किसी मरीज को ऑक्सीजन भी नहीं दी जा सकती। इमरजेंसी ट्रे में दवाएं व उपकरण अपूर्ण पाए गए। एक एंबुलेंस में तो सरकारी अस्पताल के इंजेक्शन व दवाएं भी बरामद हुईं। इससे साफ है कि मिलीभगत के खेल में रोक के बावजूद लोहिया अस्पताल के बाहर निजी एंबुलेंस खड़ी हो रही हैं।
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खास बात तो यह है कि अस्पताल परिसर में एक निजी एंबुलेंस खड़ी थी। टीम देखकर चालक गाड़ी बंदकर कहीं भाग गया। इस एंबुलेंस का मॉडल सरकारी एंबुलेंस जैसा है। अधिकारियों ने सरकारी 102 व 108 सेवा की एंबुलेंस की जांच की तो पायलट व ईएमटी बिना आईडी व यूनिफार्म के पाए गए। इस पर उन्हें चेतावनी दी गई।
डिप्टी सीएमओ डॉ.दीपक कटारिया ने बताया कि अधूरे मानकों पर एंबुलेंस चलने के संबंध में वह एआरटीओ को कार्रवाई के लिए रिपोेर्ट भेजेंगे। अभियान के तहत लगातार एंबुलेंस की जांच की जाएगी। सरकारी दवाएं एंबुलेंस में कहां से आईं इसकी भी जांच कराई जाएगी।
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एआरटीओ कार्यालय में 163 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें 120 निजी एंबुलेंस में 62 बिना फिटनेस के दौड़ रही हैं। इस संबंध में अमर उजाला ने दो दिसंबर के अंक में, अनदेखी : बिना फिटनेस फर्राटा भर रहीं 62 एंबुलेंस शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसका संज्ञान लेकर गुरुवार को नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ.आरसी माथुर, डॉ.दीपक कटारिया व फार्मासिस्ट आशीष शुक्ला लोहिया अस्पताल पहुंचे।
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टीम देखकर कुछ चालक तो एंबुलेंस भगा ले गए। मौके पर मिलीं तीन एंबुलेंस की जांच की गई। इन पर चालक उदय प्रकाश, फहीम खान व बिरजू के साथ कोई पैरामेडिकल स्टाफ नहीं था। इन एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर तो मौजूद थे, लेकिन ऑक्सीजन मास्क नहीं थे। इससे किसी मरीज को ऑक्सीजन भी नहीं दी जा सकती। इमरजेंसी ट्रे में दवाएं व उपकरण अपूर्ण पाए गए। एक एंबुलेंस में तो सरकारी अस्पताल के इंजेक्शन व दवाएं भी बरामद हुईं। इससे साफ है कि मिलीभगत के खेल में रोक के बावजूद लोहिया अस्पताल के बाहर निजी एंबुलेंस खड़ी हो रही हैं।
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खास बात तो यह है कि अस्पताल परिसर में एक निजी एंबुलेंस खड़ी थी। टीम देखकर चालक गाड़ी बंदकर कहीं भाग गया। इस एंबुलेंस का मॉडल सरकारी एंबुलेंस जैसा है। अधिकारियों ने सरकारी 102 व 108 सेवा की एंबुलेंस की जांच की तो पायलट व ईएमटी बिना आईडी व यूनिफार्म के पाए गए। इस पर उन्हें चेतावनी दी गई।
डिप्टी सीएमओ डॉ.दीपक कटारिया ने बताया कि अधूरे मानकों पर एंबुलेंस चलने के संबंध में वह एआरटीओ को कार्रवाई के लिए रिपोेर्ट भेजेंगे। अभियान के तहत लगातार एंबुलेंस की जांच की जाएगी। सरकारी दवाएं एंबुलेंस में कहां से आईं इसकी भी जांच कराई जाएगी।