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जसमई प्रधान और सचिव फिर पहुंचे सड़क डलवाने, हंगामा
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गांव नूरपुर जसमई रोड की पैमाइश के दौरान खड़े ग्रामीण।
- फोटो : FARRUKHABAD
प्रधान और सचिव फिर पहुंचे सड़क बनवाने, हंगामा
फर्रुखाबाद। किसानों के खेतों से होकर चकरोड बनवाने को लेकर रविवार को फिर प्रधान और सचिव मिट्टी डलवाने पहुंच गए। इस पर पीड़ित किसानों ने पहुंचकर जमकर हंगामा करके काम नहीं होने दिया। सूचना पर तहसीलदार राजू कुमार पहुंचे और किसानों से वार्ता की। तहसीलदार ने किसानों को भरोसा दिया कि फसलें जब तक नहीं काटी जातीं, तब तक कोई काम नहीं किया जाएगा।
शहर के ही एक सत्तापक्ष के नेता का नूरपुर जसमई में खेत है। वह एक साइड से तिरछा है। खेत को सीधा करने की मंशा से नेता के चहेते प्रधान और कुछ राजस्व कर्मी किसानों के खेतों से चकरोड निकालना चाह रहे हैं। रविवार सुबह आठ बजे फिर प्रधान और ग्राम सचिव चकरोड पर मिट्टी डलवाने पहुंचे। कुछ ही देर में वहां तमाम ग्रामीण पहुंच गए।
उन्होंने काम न करने को कहा, तो प्रधान ने मिट्टी डलवाने की बात कही। इस पर किसान हंगामा करने लगे। कहा कि जब शनिवार को दो महीने तक काम न होने की बात कही थी, फिर आज क्यों ऐसा किया जा रहा है। अन्याय सहन नहीं करेंगे। इसकी सूचना मिलते ही तहसीलदार राजू कुमार, कानूनगो अनिल कुमार अवस्थी, लेखपाल आशुतोष पांडेय मौके पर पहुंचे।
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उनसे ग्रामीणों ने कहा कि उनके पैतृक खेत हैं। खेतों से चकरोड निकालना अन्याय है। वे छोटे किसान हैं। बर्बाद हो जाएंगे। तहसीलदार ने किसानों को भरोसा दिया कि जो कागजों में होगा, वही नापजोख की जाएगी। फिलहाल खेतों में फसलें खड़ी हैं। फसलें कटने के बाद ही दोबारा पैमाइश कराएंगे। तहसीलदार ने बताया कि मक्का की फसलों से होकर पैमाइश करना मुश्किल है। अभी कोई भी काम नहीं किया जाएगा।
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फर्रुखाबाद। किसानों के खेतों से होकर चकरोड बनवाने को लेकर रविवार को फिर प्रधान और सचिव मिट्टी डलवाने पहुंच गए। इस पर पीड़ित किसानों ने पहुंचकर जमकर हंगामा करके काम नहीं होने दिया। सूचना पर तहसीलदार राजू कुमार पहुंचे और किसानों से वार्ता की। तहसीलदार ने किसानों को भरोसा दिया कि फसलें जब तक नहीं काटी जातीं, तब तक कोई काम नहीं किया जाएगा।
शहर के ही एक सत्तापक्ष के नेता का नूरपुर जसमई में खेत है। वह एक साइड से तिरछा है। खेत को सीधा करने की मंशा से नेता के चहेते प्रधान और कुछ राजस्व कर्मी किसानों के खेतों से चकरोड निकालना चाह रहे हैं। रविवार सुबह आठ बजे फिर प्रधान और ग्राम सचिव चकरोड पर मिट्टी डलवाने पहुंचे। कुछ ही देर में वहां तमाम ग्रामीण पहुंच गए।
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उन्होंने काम न करने को कहा, तो प्रधान ने मिट्टी डलवाने की बात कही। इस पर किसान हंगामा करने लगे। कहा कि जब शनिवार को दो महीने तक काम न होने की बात कही थी, फिर आज क्यों ऐसा किया जा रहा है। अन्याय सहन नहीं करेंगे। इसकी सूचना मिलते ही तहसीलदार राजू कुमार, कानूनगो अनिल कुमार अवस्थी, लेखपाल आशुतोष पांडेय मौके पर पहुंचे।
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उनसे ग्रामीणों ने कहा कि उनके पैतृक खेत हैं। खेतों से चकरोड निकालना अन्याय है। वे छोटे किसान हैं। बर्बाद हो जाएंगे। तहसीलदार ने किसानों को भरोसा दिया कि जो कागजों में होगा, वही नापजोख की जाएगी। फिलहाल खेतों में फसलें खड़ी हैं। फसलें कटने के बाद ही दोबारा पैमाइश कराएंगे। तहसीलदार ने बताया कि मक्का की फसलों से होकर पैमाइश करना मुश्किल है। अभी कोई भी काम नहीं किया जाएगा।