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प्रिंस के परिवार का राशनकार्ड, न आयुष्मान कार्ड
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शहर के मोहल्ला खतराना में गरीब परिवार को राशन सामग्री देते हिंदू युवा वाहिनी के पदाधिकारी। संवा?
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। घर में रोटी की व्यवस्था न होने पर नूडल्स खाने के बाद जान गंवाने वाले प्रिंस के परिवार का न ही राशनकार्ड बना है और न ही आयुष्मान कार्ड। करीब ढाई साल पहले कार्ड निरस्त हो गया था। कई बार कोटेदार से फरियाद की लेकिन कार्ड नहीं बन पाया।
मनोज तिवारी ने बताया कि पत्नी प्रीती के नाम राशन कार्ड बना था। उसमें उनका और बेटे प्रिंस का नाम भी दर्ज था। करीब ढाई साल पहले कोटेदार ने राशन कार्ड जमा कर लिया। इसके बाद न ही राशनकार्ड दिया और न ही राशन। राशनकार्ड मांगने पर निरस्त होने की जानकारी दी थी। मनोज ने बताया कि राशनकार्ड कैसे बनता है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। मां सुमन के राशनकार्ड में अविवाहित बेटे रवि और रामजी के नाम दर्ज थे। एक साल पहले दोनों के नाम हटा दिए गए। अब सुमन को एक यूनिट का राशन मिलता है।
खतराना के कोटेदार विपुल शंकर दुबे का कहना है कि मनोज का राशन कार्ड निरस्त हो गया था और उनकी मां के राशनकार्ड से दो यूनिट कट गए थे। नया राशनकार्ड बनवाने का प्रयास किया लेकिन नहीं बन पाया। जिलापूर्ति अधिकारी जीवेश कुमार मौर्य ने बताया कि राशन कार्ड बनवाने के लिए जनसेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन करने के बाद हार्ड कापी कार्यालय में जमा कर दें। पात्रता परीक्षण के बाद राशन कार्ड बनाकर दिया जाएगा।
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इनसेट
बेटी के इलाज पर खर्च हुए 25 हजार
मनोज ने बताया कि बेटी के इलाज में करीब 25 हजार रुपये खर्च हुए थे। पूरा पैसा दुकान मालिक ने डॉक्टर को दिया था। दुकानदार का कर्ज चुकाना है। इसको लेकर भी मनोज परेशान रहते हैं।
इनसेट
पड़ोसन से उधार लिए थे 100 रुपये
सुमन तिवारी ने बताया कि शुक्रवार सुबह प्रिंस की हालत बिगड़ने पर पड़ोसन भाभी से 100 रुपये उधार लेकर डाक्टर के यहां गई थी। मगर तब तक उसकी हालत बिगड़ चुकी थी।
नेताओं ने घर जाकर दिया राशन
हिंदू युवा महासभा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवम त्रिपाठी, नगर उपाध्यक्ष धीरज पाल, राष्ट्रवादी ब्राह्मण महासभा जिलाध्यक्ष विनोद मिश्रा ने घर जाकर मनोज तिवारी को ढांढस बंधाया और उन्हें राशन भी दिया। संगठन ने मनोज के भरण पोषण की जिम्मेदारी भी ली है। शिवम और विनोद ने कहा कि मनोज को लेकर अधिकारियों से मिलेंगे। उनका राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड बनवाने का प्रयास किया जाएगा। मनोज को कर्ज से उबारने के लिए भी संगठन की बैठक में चर्चा करेंगे।
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मनोज तिवारी ने बताया कि पत्नी प्रीती के नाम राशन कार्ड बना था। उसमें उनका और बेटे प्रिंस का नाम भी दर्ज था। करीब ढाई साल पहले कोटेदार ने राशन कार्ड जमा कर लिया। इसके बाद न ही राशनकार्ड दिया और न ही राशन। राशनकार्ड मांगने पर निरस्त होने की जानकारी दी थी। मनोज ने बताया कि राशनकार्ड कैसे बनता है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। मां सुमन के राशनकार्ड में अविवाहित बेटे रवि और रामजी के नाम दर्ज थे। एक साल पहले दोनों के नाम हटा दिए गए। अब सुमन को एक यूनिट का राशन मिलता है।
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खतराना के कोटेदार विपुल शंकर दुबे का कहना है कि मनोज का राशन कार्ड निरस्त हो गया था और उनकी मां के राशनकार्ड से दो यूनिट कट गए थे। नया राशनकार्ड बनवाने का प्रयास किया लेकिन नहीं बन पाया। जिलापूर्ति अधिकारी जीवेश कुमार मौर्य ने बताया कि राशन कार्ड बनवाने के लिए जनसेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन करने के बाद हार्ड कापी कार्यालय में जमा कर दें। पात्रता परीक्षण के बाद राशन कार्ड बनाकर दिया जाएगा।
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बेटी के इलाज पर खर्च हुए 25 हजार
मनोज ने बताया कि बेटी के इलाज में करीब 25 हजार रुपये खर्च हुए थे। पूरा पैसा दुकान मालिक ने डॉक्टर को दिया था। दुकानदार का कर्ज चुकाना है। इसको लेकर भी मनोज परेशान रहते हैं।
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पड़ोसन से उधार लिए थे 100 रुपये
सुमन तिवारी ने बताया कि शुक्रवार सुबह प्रिंस की हालत बिगड़ने पर पड़ोसन भाभी से 100 रुपये उधार लेकर डाक्टर के यहां गई थी। मगर तब तक उसकी हालत बिगड़ चुकी थी।
नेताओं ने घर जाकर दिया राशन
हिंदू युवा महासभा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवम त्रिपाठी, नगर उपाध्यक्ष धीरज पाल, राष्ट्रवादी ब्राह्मण महासभा जिलाध्यक्ष विनोद मिश्रा ने घर जाकर मनोज तिवारी को ढांढस बंधाया और उन्हें राशन भी दिया। संगठन ने मनोज के भरण पोषण की जिम्मेदारी भी ली है। शिवम और विनोद ने कहा कि मनोज को लेकर अधिकारियों से मिलेंगे। उनका राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड बनवाने का प्रयास किया जाएगा। मनोज को कर्ज से उबारने के लिए भी संगठन की बैठक में चर्चा करेंगे।