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मंदी की मार से शीतगृहों में आलू की निकासी धीमी
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फर्रुखाबाद। भाव गिरने से आलू किसान परेशान है। इस बार शीतगृहों से आलू की निकासी भी काफी धीमी है। पिछले वर्ष की तुलना में अब तक माल की आधी निकासी ही हो सकी है। शीतगृह पूरी क्षमता से भरे होने के चलते किसानों ने संकट और गहराने की आशंका जताई है। हालांकि किसान भाव अच्छा मिलने की उम्मीद में कोल्डस्टोरेज से आलू नहीं निकाल रहे हैं।
जनपद में 94 शीतगृह संचालित हैं। शुरुआती दौर में आलू भाव कम मिलने से किसानों ने शीतगृहों में जमकर भंडारण किया। कई शीतगृहों में तो क्षमता से अधिक भंडारण हुआ। रिकार्ड के अनुसार कोल्ड स्टोरेज में भंडारण क्षमता 880646.23 मीट्रिक के सापेक्ष 83 प्रतिशत यानी 730936.37 मीट्रिक टन आलू भंडारित है। इन दिनों आलू का भाव 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। इससे किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल है। मंदी से किसान शीतगृहों से निकासी नहीं कर रहे हैं।
चार जुलाई तक मात्र आठ प्रतिशत 58474.90 मीट्रिक टन आलू ही शीतगृहों से निकाला गया है। जबकि गत वर्ष छह जुलाई तक शीतगृहों से किसान 15 फीसद आलू की निकासी कर चुके थे। आलू का भाव भी 1600 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान को आगे भाव बढ़ने की उम्मीद है। इससे अभी वह आलू निकासी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अधिकांश शीतगृह आलू से भरे हुए हैं। आलू की धीमी निकासी से शीतगृह संचालक भी चिंतित हैं। फिलहाल आलू के भाव में अभी सुर्खी आती नहीं दिख रही है। यही हालात रहे तो आखिर तक एकदम निकासी से अच्छा भाव मिलने की भी संभावना कम जताई जा रही है।
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‘इस बार आलू की बाहर से मांग न आने से भाव भी काफी कम है। इसे शीतगृहों से आलू की निकासी काफी धीमी है। यही हालात रहे तो आलू किसानों पर संकट आ सकता है। सभी जनपदों में निकासी की यही स्थिति है। इससे आलू फेंकने की भी आशंका बन रही है।’ आरएन वर्मा, आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी
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जनपद में 94 शीतगृह संचालित हैं। शुरुआती दौर में आलू भाव कम मिलने से किसानों ने शीतगृहों में जमकर भंडारण किया। कई शीतगृहों में तो क्षमता से अधिक भंडारण हुआ। रिकार्ड के अनुसार कोल्ड स्टोरेज में भंडारण क्षमता 880646.23 मीट्रिक के सापेक्ष 83 प्रतिशत यानी 730936.37 मीट्रिक टन आलू भंडारित है। इन दिनों आलू का भाव 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। इससे किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल है। मंदी से किसान शीतगृहों से निकासी नहीं कर रहे हैं।
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चार जुलाई तक मात्र आठ प्रतिशत 58474.90 मीट्रिक टन आलू ही शीतगृहों से निकाला गया है। जबकि गत वर्ष छह जुलाई तक शीतगृहों से किसान 15 फीसद आलू की निकासी कर चुके थे। आलू का भाव भी 1600 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान को आगे भाव बढ़ने की उम्मीद है। इससे अभी वह आलू निकासी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अधिकांश शीतगृह आलू से भरे हुए हैं। आलू की धीमी निकासी से शीतगृह संचालक भी चिंतित हैं। फिलहाल आलू के भाव में अभी सुर्खी आती नहीं दिख रही है। यही हालात रहे तो आखिर तक एकदम निकासी से अच्छा भाव मिलने की भी संभावना कम जताई जा रही है।
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‘इस बार आलू की बाहर से मांग न आने से भाव भी काफी कम है। इसे शीतगृहों से आलू की निकासी काफी धीमी है। यही हालात रहे तो आलू किसानों पर संकट आ सकता है। सभी जनपदों में निकासी की यही स्थिति है। इससे आलू फेंकने की भी आशंका बन रही है।’ आरएन वर्मा, आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी