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आलू : रिकॉर्ड मंदी से लागत निकलना भी मुश्किल
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फोटो-1 जहानगंज स्थित शीतगृह में सूखने के बाद बाहर भेजने के लिए बोरों में भरे जा रहे आलू। स्रोत:
- फोटो : 1
फर्रुखाबाद/कमालगंज। दूसरे राज्यों से आलू की मांग न आने से बिक्री थम गई है। जून का अंतिम सप्ताह चलने के बावजूद ज्यादातर शीतगृहों में सन्नाटा छाया है। बुधवार को जहानगंज के एक शीतगृह में आलू की नीलामी हुई तो अब तक के रिकार्ड तोड़ मंदी की गिरफ्त में सब्जियों का राजा घिरा दिखा। सफेद आलू 200 से 262 रुपये प्रति क्विंटल ही बिक पाया।
पिछले साल 109 शीतगृहों के सापेक्ष इस वर्ष 121 शीतगृहों में आलू का भंडारण हुआ है। इस साल 1,93,127 मीट्रिक टन भंडारण बढ़कर शीतगृहों में 9,72,812 मीट्रिक टन आलू जमा हुआ। पिछले साल जून के अंत तक आलू की निकासी ठीकठाक शुरू हो चुकी थी लेकिन इस बार ज्यादातर शीतगृह सन्नाटे में हैं। खरीदार नहीं मिल रहे हैं। जिन शीतगृहों से आलू निकला भी है वहां मंदी से किसान परेशान हैं। व्यापारियों का कहना है कि जिन राज्यों से मांग आती थी, वहां के खरीदार बारिश शुरू होने तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं।
जहानगंज के एक शीतगृह में बिहार भेजने के लिए आलू की बोली लगी। सफेद आलू ख्याती 100 रुपये से 131 रुपये पैकेट (50 किलो) बिका। वहीं पूर्वांचल से लेकर नेपाल तक पसंद किया जाने वाला लाल आलू हालैंड 300 से 350 रुपये व चिप्सोना आलू 250 से 330 रुपये में बिका। आलू बेचने वाले ताजपुर के किसानों ने कहा कि फिलहाल भाव सुधरने की उम्मीद न होने से उन्होंने भारी घाटा उठाकर आलू बेच दिया। व्यापारी इशरार खान का कहना है कि मांग में उत्साह न होने के बावजूद बिहार के पटना, आरा, नवादा आदि शहरों में थोड़ा-थोड़ा आलू भेजा जा रहा है। पूर्वांचल के जिलों के लिए भी लोडिंग की शुरुआत हुई है। बारिश होने पर हरी सब्जियों की आमद घटेगी तो आलू की खपत बढ़ सकती है।
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पिछले साल से भी खराब स्थिति की आहट
-मोहनपुर दिनारपुर के किसान शरद कुमार कहते हैं कि पिछले साल कई किसानों को भाव न मिलने से शीतगृहों में ही आलू छोड़ना पड़ा था। बाद में उसे फेंका गया। इस बार और भी ज्यादा आलू भंडारित है, बिक्री है नहीं। इसलिए गत वर्ष से भी ज्यादा खराब स्थिति की आहट है। खाद व कीटनाशक जो उधार में लिया, उसका पैसा दुकानदार को अभी देना है। लगातार दो साल के घाटे ने किसानों को कंगाल बना दिया है।
आलू की स्थिति आंकड़ों में-
वर्ष शीतगृह भंडारण
2025 109 779685.65 मीट्रिक टन
2026 121 972812.08 मीट्रिक टन
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किसानों द्वारा जो ढेर लगाया गया था, अभी तक वही आलू बाजार में छाया था। ढेर वाला आलू बाहर भी जा रहा था। अब वह आलू खत्म हो जाने से शीतगृहों से निकासी की शुरुआत हो रही है। भाव न मिलने से किसानों में निकासी को लेकर फिलहाल उत्साह कम है। जुलाई से शीतगृहों में निकासी बढ़ेगी। तब तक बारिश भी होने लगेगी। दूसरे राज्यों से भी मांग आएगी, इससे भाव बढ़ने की संभावना है।
राघवेंद्र सिंह, जिला उद्यान एवं आलू विकास अधिकारी
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पिछले साल 109 शीतगृहों के सापेक्ष इस वर्ष 121 शीतगृहों में आलू का भंडारण हुआ है। इस साल 1,93,127 मीट्रिक टन भंडारण बढ़कर शीतगृहों में 9,72,812 मीट्रिक टन आलू जमा हुआ। पिछले साल जून के अंत तक आलू की निकासी ठीकठाक शुरू हो चुकी थी लेकिन इस बार ज्यादातर शीतगृह सन्नाटे में हैं। खरीदार नहीं मिल रहे हैं। जिन शीतगृहों से आलू निकला भी है वहां मंदी से किसान परेशान हैं। व्यापारियों का कहना है कि जिन राज्यों से मांग आती थी, वहां के खरीदार बारिश शुरू होने तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं।
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जहानगंज के एक शीतगृह में बिहार भेजने के लिए आलू की बोली लगी। सफेद आलू ख्याती 100 रुपये से 131 रुपये पैकेट (50 किलो) बिका। वहीं पूर्वांचल से लेकर नेपाल तक पसंद किया जाने वाला लाल आलू हालैंड 300 से 350 रुपये व चिप्सोना आलू 250 से 330 रुपये में बिका। आलू बेचने वाले ताजपुर के किसानों ने कहा कि फिलहाल भाव सुधरने की उम्मीद न होने से उन्होंने भारी घाटा उठाकर आलू बेच दिया। व्यापारी इशरार खान का कहना है कि मांग में उत्साह न होने के बावजूद बिहार के पटना, आरा, नवादा आदि शहरों में थोड़ा-थोड़ा आलू भेजा जा रहा है। पूर्वांचल के जिलों के लिए भी लोडिंग की शुरुआत हुई है। बारिश होने पर हरी सब्जियों की आमद घटेगी तो आलू की खपत बढ़ सकती है।
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पिछले साल से भी खराब स्थिति की आहट
-मोहनपुर दिनारपुर के किसान शरद कुमार कहते हैं कि पिछले साल कई किसानों को भाव न मिलने से शीतगृहों में ही आलू छोड़ना पड़ा था। बाद में उसे फेंका गया। इस बार और भी ज्यादा आलू भंडारित है, बिक्री है नहीं। इसलिए गत वर्ष से भी ज्यादा खराब स्थिति की आहट है। खाद व कीटनाशक जो उधार में लिया, उसका पैसा दुकानदार को अभी देना है। लगातार दो साल के घाटे ने किसानों को कंगाल बना दिया है।
आलू की स्थिति आंकड़ों में-
वर्ष शीतगृह भंडारण
2025 109 779685.65 मीट्रिक टन
2026 121 972812.08 मीट्रिक टन
किसानों द्वारा जो ढेर लगाया गया था, अभी तक वही आलू बाजार में छाया था। ढेर वाला आलू बाहर भी जा रहा था। अब वह आलू खत्म हो जाने से शीतगृहों से निकासी की शुरुआत हो रही है। भाव न मिलने से किसानों में निकासी को लेकर फिलहाल उत्साह कम है। जुलाई से शीतगृहों में निकासी बढ़ेगी। तब तक बारिश भी होने लगेगी। दूसरे राज्यों से भी मांग आएगी, इससे भाव बढ़ने की संभावना है।
राघवेंद्र सिंह, जिला उद्यान एवं आलू विकास अधिकारी