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बदहाल व्यवस्थाओं पर अवार्ड पा रहीं पीएचसी
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अमृतपुर/जहानगंज। कायाकल्प अवार्ड से नवाजे गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं बदहाल हैं। प्रदेश में पहला पुरस्कार पाने वाली पीएचसी अमृतपुर आयुष चिकित्सक के भरोसे है, जबकि सांत्वना पुरस्कार पाने वाली पीएचसी का ताला सुबह चाय बेचने वाली महिला खोलती है। यहां पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है।
कायाकल्प अवार्ड योजना के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशालय से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमृतपुर को जिले में प्रथम पुरस्कार मिला है। राज्यस्तरीय टीम ने पीएचसी की आंतरिक और बाहरी व्यवस्थाओं का परीक्षण करने के बाद चयन किया था, जबकि हकीकत यह है कि पीएचसी पर तैनात एमबीबीएस डॉ. अभिषेक कुमार कभी आते ही नहीं हैं।
आयुष चिकित्सक गौरव वर्मा के भरोसे एलोपैथिक सेवाएं दी जा रही हैं। अस्पताल का सबमर्सिबल पंप खराब है। हैंडपंप से मरीज प्यास बुझाते हैं। एक माह में 44 प्रसव हुए, लेकिन किसी भी प्रसूता को नाश्ता और भोजन नहीं दिया गया। प्रसूताओं को बिना चादर के फटे गद्दे वाले बेड पर भर्ती किया जाता है। एएनएम सोनी ने बताया कि जो व्यवस्थाएं उन्हें मिल रही हैं, वही मरीजों को दे रही हैं।
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न चादर है और न ही प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाले ग्लब्स। अस्पताल में सफाई कर्मी न होने से परिसर में पीछे घास खड़ी है। खांसी और जुकाम की दवा लेने आए अमृतपुर के प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें दवा मिल गई है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि डॉक्टर ने उन्हें देखा या फार्मासिस्ट ने। लीलापुर की शानू का कहना है कि गेट के पास लगे वाशबेसिन में पानी नहीं आ रहा है। खुजली की दवा मिल गई है।
पीएचसी में ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दो बजे तक का है, लेकिन सुबह 8:47 बजे पीएचसी की पैथालॉजी के गेट पर ताला लगा था। 8:50 बजे एलटी पवन कुमार ने गेट का ताला खोलकर काम शुरू किया। 8:48 बजे डॉक्टर की कुर्सी खाली थी। फार्मासिस्ट ज्ञानपाल ने मरीजों को देखकर दवा दी है। राजेपुुर सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रमित राजपूत ने बताया डॉ. अभिषेक कुमार सीएचसी से संबद्ध हैं। डॉ. गौरव वर्मा अवकाश पर हैं। पीएचसी पर कुछ अव्यवस्थाएं हैं, उन्हें दुरुस्त करने का प्रयास किया जाएगा। राज्यस्तरीय टीम के निरीक्षण के बाद पीएचसी को दूसरी बार अवार्ड मिला है।
कायाकल्प अवार्ड योजना के तहत 50 हजार रुपये का सांत्वना पुरस्कार पा चुके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जरारी पर सुबह 8:30 बजे ताला लगा था। परिसर में मौजूद वार्ड ब्वॉय चंदगी राम ताला खुलने के इंतजार में खड़े थे। पूछने पर बताया कि चाय बनाने वाली राजवती के पास पीएचसी की चाबी है। 8:35 बजे जब राजवती चाबी लेकर पहुंचीं तब ताला खोला गया। 8:45 पर फार्मासिस्ट राजेंद्र कटियार और 9:00 बजे लैब टेक्नीशियन मंगली तिवारी पहुंचे। उन्होंने बताया कि डॉ. अनन्य कुमार रेस्ट पर हैं।
यदाकदा आने वाला सफाई कर्मी अमित कुमार भी नहीं आया। फार्मासिस्ट राजेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ बलगम की जांच होती है। अन्य जांचों के लिए उपकरण नहीं हैं। सीएचसी कमालगंज से टाइफाइड, मलेरिया की किटें मिल जाती हैं तो उसकी जांचें हो जाती हैं। अस्पताल का सबमर्सिबल पंप खराब होने से मरीजों के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं है। शौचालय और बाथरूम में सालों से पानी का इंतजाम नहीं है। पीएचसी में अटैच यूनानी अस्पताल के डॉ. मोहसिन खां 8:15 बजे कार्यालय में बैठे थे। वार्ड ब्वाय शशिकांत यादव, शैलेंद्र कुमार सक्सेना 10 बजे तक अस्पताल नहीं पहुंचे। प्रभारी सीएमओ डॉ. दलवीर सिंह ने बताया कि वह खुद निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराएंगे।
कायाकल्प अवार्ड स्कीम के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। एक्सटर्नल व इंटर्नल असेसमेंट में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त पाने वाली पीएचसी को कायाकल्प अवार्ड के लिए इसी साल 16 जून को घोषणा की गई। इसमें पीएचसी अमृतपुर को 77.5 अंक मिलने पर प्रथम पुरस्कार में दो लाख रुपये, संकिसा और जरारी को 50-50 हजार रुपये सांत्वना पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
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कायाकल्प अवार्ड योजना के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशालय से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमृतपुर को जिले में प्रथम पुरस्कार मिला है। राज्यस्तरीय टीम ने पीएचसी की आंतरिक और बाहरी व्यवस्थाओं का परीक्षण करने के बाद चयन किया था, जबकि हकीकत यह है कि पीएचसी पर तैनात एमबीबीएस डॉ. अभिषेक कुमार कभी आते ही नहीं हैं।
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आयुष चिकित्सक गौरव वर्मा के भरोसे एलोपैथिक सेवाएं दी जा रही हैं। अस्पताल का सबमर्सिबल पंप खराब है। हैंडपंप से मरीज प्यास बुझाते हैं। एक माह में 44 प्रसव हुए, लेकिन किसी भी प्रसूता को नाश्ता और भोजन नहीं दिया गया। प्रसूताओं को बिना चादर के फटे गद्दे वाले बेड पर भर्ती किया जाता है। एएनएम सोनी ने बताया कि जो व्यवस्थाएं उन्हें मिल रही हैं, वही मरीजों को दे रही हैं।
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न चादर है और न ही प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाले ग्लब्स। अस्पताल में सफाई कर्मी न होने से परिसर में पीछे घास खड़ी है। खांसी और जुकाम की दवा लेने आए अमृतपुर के प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें दवा मिल गई है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि डॉक्टर ने उन्हें देखा या फार्मासिस्ट ने। लीलापुर की शानू का कहना है कि गेट के पास लगे वाशबेसिन में पानी नहीं आ रहा है। खुजली की दवा मिल गई है।
पीएचसी में ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दो बजे तक का है, लेकिन सुबह 8:47 बजे पीएचसी की पैथालॉजी के गेट पर ताला लगा था। 8:50 बजे एलटी पवन कुमार ने गेट का ताला खोलकर काम शुरू किया। 8:48 बजे डॉक्टर की कुर्सी खाली थी। फार्मासिस्ट ज्ञानपाल ने मरीजों को देखकर दवा दी है। राजेपुुर सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रमित राजपूत ने बताया डॉ. अभिषेक कुमार सीएचसी से संबद्ध हैं। डॉ. गौरव वर्मा अवकाश पर हैं। पीएचसी पर कुछ अव्यवस्थाएं हैं, उन्हें दुरुस्त करने का प्रयास किया जाएगा। राज्यस्तरीय टीम के निरीक्षण के बाद पीएचसी को दूसरी बार अवार्ड मिला है।
कायाकल्प अवार्ड योजना के तहत 50 हजार रुपये का सांत्वना पुरस्कार पा चुके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जरारी पर सुबह 8:30 बजे ताला लगा था। परिसर में मौजूद वार्ड ब्वॉय चंदगी राम ताला खुलने के इंतजार में खड़े थे। पूछने पर बताया कि चाय बनाने वाली राजवती के पास पीएचसी की चाबी है। 8:35 बजे जब राजवती चाबी लेकर पहुंचीं तब ताला खोला गया। 8:45 पर फार्मासिस्ट राजेंद्र कटियार और 9:00 बजे लैब टेक्नीशियन मंगली तिवारी पहुंचे। उन्होंने बताया कि डॉ. अनन्य कुमार रेस्ट पर हैं।
यदाकदा आने वाला सफाई कर्मी अमित कुमार भी नहीं आया। फार्मासिस्ट राजेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ बलगम की जांच होती है। अन्य जांचों के लिए उपकरण नहीं हैं। सीएचसी कमालगंज से टाइफाइड, मलेरिया की किटें मिल जाती हैं तो उसकी जांचें हो जाती हैं। अस्पताल का सबमर्सिबल पंप खराब होने से मरीजों के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं है। शौचालय और बाथरूम में सालों से पानी का इंतजाम नहीं है। पीएचसी में अटैच यूनानी अस्पताल के डॉ. मोहसिन खां 8:15 बजे कार्यालय में बैठे थे। वार्ड ब्वाय शशिकांत यादव, शैलेंद्र कुमार सक्सेना 10 बजे तक अस्पताल नहीं पहुंचे। प्रभारी सीएमओ डॉ. दलवीर सिंह ने बताया कि वह खुद निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराएंगे।
कायाकल्प अवार्ड स्कीम के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। एक्सटर्नल व इंटर्नल असेसमेंट में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त पाने वाली पीएचसी को कायाकल्प अवार्ड के लिए इसी साल 16 जून को घोषणा की गई। इसमें पीएचसी अमृतपुर को 77.5 अंक मिलने पर प्रथम पुरस्कार में दो लाख रुपये, संकिसा और जरारी को 50-50 हजार रुपये सांत्वना पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।